राम मंदिर उद्घाटन कविता

299 Words
"हेलो दोस्तो स्वागत है आपका हमारे इस platform में जहां तक की पूरे हिंदू समाज को पता है की 22 जनवरी को अयोध्या में राम मंदिर का उद्घाटन होने वाला है उसके उपलक्ष में हमने ये कविता लिखी है इसे पूरा सुनिए और अगर अच्छा लगे तो चैनल को सब्सक्राइब और वीडियो को लाइक जरुर करे तो चलिए शुरू करते है। दशरथ कौशल्या के नंदन जैसे कोई वीर बहादुर आए थे , ताड़का जैसी राक्षसनी को वो एक बाण मे मार गिराए थे जब सीता स्वयंवर की बात आई तो हजारो बलवान हार पछताए थे परंतु एक क्षण में श्रीराम धनुष तोड़ विजय की जीत को पाए थे इसीलिए अवध वासियों ने उनके आगमन पर खुशी के दीप जलाए थे, वो आज्ञाकारी रघुनंदन जो कैकयी के एक बार कहने पर चौदह वर्ष के वनवास को पाए थे और वो बड़ भागे लक्षमण जौ चौदह वर्ष श्री राम की सेवा में बिताए थे, वो प्यारे भरत जब ननीहाल से वापस आए ये सुनकर वनवास की बाते वे रोए और पछताए थे परंतु वो सुपुत्र श्री राम जो उसी क्षण 14 वर्ष वन में बिताने आए थे इसीलिए अवधवासियों ने उनके आगमन पर खुशी के दीप जलाए थे 13 वर्ष तो वो बड़े हर्षोल्लास से बिताए थे। सहसा सीता हरण हुआ और जटायू उन्हे आकाशमार्ग में पाए थे, उसी क्षण वे श्री राम को बताकर मुक्ति को पाए थे। बहाकर मेहनत की गंगा वो सेतु को बनाए थे, मचा दिया तहलका और रावण को वद्ध कर उसे मुक्ति दिलाए थे, लिए बाद में सीता की अग्नि परीक्षा और वापस अयोध्या आए थे। इसी लिए अवधवासियों ने उनके आगमन पर खुशी के दीप जलाए थे यही कविता लिखी गई थी तो कैसा लगा कमेंट में जरूर बताना और जाते जाते श्री राम के भक्त जय श्री राम जरूर लिखना।" - Roshni Kumari
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