श्रीराम मंदिर के बनने पर क्षत्रिय समाज को सबसे ज़्यादा ख़ुशी हुई जिनमें अयोध्या के सराय रासी गाँव के क्षत्रिय समाज के लोग प्रथम है क्योकी सन 1528 में ठाकुर गजसिंह जी के नेतृत्व में जो लड़ाई बाबर के साथ लड़ी गई थी उस लड़ाई से पहले ठाकुर गजसिंह ने प्रतिज्ञा थी कि जब तक श्रीराम मंदिर नहीं बनेगा तब तक वो पैर में जूता और सिर पर पगड़ी नहीं पहनेगें और उनकी वो प्रतिज्ञा आज भी अयोध्या के सराय रासी गाँव में ज़िन्दा है जहां के लोग आज भी पैर में जूता और सिर पर पगड़ी और छाता लेकर नहीं चलते है ।
500 सालो से भी ज़्यादा हो गए और इन क्षत्रियों ने आज श्रीराम मंदिर के हक़ में फ़ैसले की बात सुनकर कितना खुश हुए हैं उसका अंदाज़ा शायद ही कोई लगा पाए ।
और दूसरे शख़्स है कन्नौज नरेश राजा जयचन्द्र जी जिन्होंने अयोध्या में श्रीराम मंदिर का निर्माण करवाया था और ये वो ही जयचन्द्र हैं जिनको कुछ कुंठित लोगों ने ग़द्दारी का पर्यायवाची बना दिया है आज उनकी आत्मा को भी बहुत शांति मिलेगी ... और तीसरे महान शख्सियत थे जयपुर नरेश सवाई जय सिंह, 1717 में राजा जयसिंह ने ये सारी जमीन खरीद ली थी और यहां विधिवत् पूजा शुरू करवाई थी।
आजादी बाद जिस श्री राम जन्मभूमि आंदोलन की शुरुआत की गई थी, उसके अगुआ भी एक क्षत्रिय ही थे, मेवाड़ महाराणा भगवंत सिंह जी को ही विश्व हिन्दू परिषद के संस्थापक अध्यक्ष का दायित्व सौंप इस आंदोलन की कमान सौंपी गई थी, जिसे उन्होंने भली प्रकार से उस मुहिम को परवान चढ़ाया।