जिस प्रताप के माथे पर भील राजा तिलक करते थे,जयपुर राजवंश में नया राजा ही मीणा सरदार के तिलक के बाद बनते थे,जहाँ रैदास की समाधि किसी राजपूत राजा के ही महल में है, और तो और एक राजपरिवार की पुत्रवधू रैदास जी की शिष्या रहती है और रैदास जी पूरे अधिकार से महलों के मंदिरों में अपने ईष्ट के भजन गाते है,पर कोई रोक टोक नही,बाबा रामदेव जिनका पूरा जीवन ही दरिद्र नारायण की सेवा में गुजर गया।
हजारों हजार उदाहरण है,जो सामाजिक समरसता की हामी भरते है।
पर कुछ विचारधारा विशेष के लोगो ने युवाओं के मन मे एक जहर भर दिया है, शोषण की एक ऐसी थ्योरी प्रस्तुत की है जो बेहद हास्यास्पद और मूर्खतापूर्ण है जिसके आधार पर जातिवाद की खाई को चौड़ा किया जा रहा है।
अंग्रेजो के चलाये षड्यंत को भारत की प्रत्येक राजनीतिक पार्टी ने मजबूत किया है जिससे एक पुरी पीढ़ी इस अतिवाद से प्रभावित है ।
इन सबसे बचने के लिए एक व्यापक रणनीति और स्वार्थों से ऊपर उठकर प्रयास की जरूरत है।
अपने हक की लड़ाई के साथ ,तथ्यों के साथ झूठे इतिहास को खंडित करना भी हमारा कर्तव्य है ताकि भविष्य की पीढ़ियों में इस झूठे इतिहास का जहर शामिल नही हो सके।।
GOLU Singh Rajput