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401 Words
कहानी: बचपन का प्यार एक छोटे से गाँव में, शुभ नाम का लड़का और रुही नाम की लड़की बचपन के साथी थे। दोनों ने साथ खेलते, पढ़ते और हँसते-हँसते अपनी मासूमियत से भरा बचपन बिताया। रुही के लिए शुभ केवल उसका दोस्त नहीं था, बल्कि उसका भगवान था। वह शुभ की हर बात मानती, उसकी हर बात पर विश्वास करती। शुभ दिखने में सुंदर था, और उसका बात करने का अंदाज़ ऐसा था कि लोग उसकी ओर खिंच जाते थे। लेकिन शुभ का स्वभाव थोड़ा चालाकी भरा था। वह अपने फायदे के लिए दूसरों के जज़्बातों का इस्तेमाल करता था। रुही को यह सब मालूम नहीं था, क्योंकि वह तो उसे अपने बचपन का पहला और आखिरी प्यार मानती थी। समय बीतता गया। शुभ और रुही बड़े हो गए। शुभ की आदतें बदलने के बजाय और भी चालाक होती गईं। दूसरी तरफ, रुही का प्यार और विश्वास शुभ के लिए दिन-ब-दिन गहरा होता गया। एक दिन शुभ ने रुही से वादा किया कि वह हमेशा उसके साथ रहेगा। रुही ने इस वादे को दिल से लगा लिया। लेकिन शुभ ने उसे केवल एक खेल की तरह लिया। कुछ ही समय बाद, शुभ किसी और लड़की के साथ देखे जाने लगा। रुही का दिल टूट गया। उसने पहली बार समझा कि उसका 'भगवान' उसे धोखा दे सकता है। रुही की आंखों से बहते आंसू उसकी मासूमियत की कहानी कह रहे थे। उसने शुभ से पूछा, "क्या बचपन की कसमें और वादे झूठे थे?" शुभ ने कोई जवाब नहीं दिया और वहाँ से चला गया। रुही ने आँसू पोंछे और खुद से वादा किया कि वह अब अपनी ज़िंदगी में खुद को पहले रखेगी। शायरी: 1. तूने जो वादे किए, वो निभा ना सका, मैंने जो प्यार दिया, उसे समझ ना सका। भगवान मान के जिस दिल को सजाया था, उस दिल को तूने धोखे से मिटा दिया। 2. तेरे बिना भी मुस्कुराने का हुनर सीख लिया है, जो दिल टूटा था, उसे फिर से जोड़ लिया है। तू था मेरे लिए, ये सिर्फ एक फसाना था, पर अब मैंने खुद को खुद का खुदा बना लिया है। निष्कर्ष: रुही ने इस कहानी से सीखा कि प्यार के लिए खुद को भूलना सही नहीं है। उसने अपनी ज़िंदगी में नए रास्ते चुने और खुद को सशक्त बनाया। बचपन का प्यार उसकी कमजोरी नहीं, बल्कि एक सबक बन गया। By . . . . . . . . . . ! " RUCHI TIWARI"
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