part- 4

1067 Words
कृषि की ज़ोरदार चीख़ सुनकर, सबने जब पीछे मुड़कर देखा, तो उनके सामने एक भयानक दृश्य था। कमल जी दर्द से चीख़ उठे, "सुमित्रा!" दरअसल, गुंडों में से एक ने सुमित्रा जी के सिर पर ज़ोर से वार किया था। सुमित्रा जी ने अपनी चोट और दर्द को सिर्फ़ इसलिए छुपाए रखा, ताकि उनकी बेटी कृषि डर न जाए। वह अपनी बेटी को सीने से लगाए, दर्द को पीती रहीं। लेकिन अब वह और बर्दाश्त नहीं कर पाईं। उनकी आँखों के सामने अँधेरा छाने लगा। ठीक उसी वक़्त, पति की आवाज़ उनके कानों में पड़ी, तो एक झूठी उम्मीद जागी। लेकिन वह ज़्यादा दूर तक नहीं जा पाईं। सीढ़ियों के पास आते ही, उनका सिर चकराया और वह लड़खड़ाकर ज़मीन पर गिर गईं। कृषि, जो यह सब देख रही थी, सहमी हुई खड़ी रही। उसकी आँखों के सामने भी अंधकार छा गया, और वह बेहोश होकर गिरने ही वाली थी। अर्जुन ने एक पल की भी देरी न करते हुए, उसे तेज़ी से अपनी बाँहों में उठा लिया। सब लोग तुरंत अस्पताल की ओर भागे। अस्पताल पहुँचते ही, सुमित्रा जी को तुरंत ऑपरेशन थिएटर (OT) में ले जाया गया और कृषि को इमरजेंसी वार्ड में भर्ती किया गया। बाहर, अर्जुन और राणा शांति से खड़े थे, जबकि कमल जी बेचैनी में बार-बार टहल रहे थे। वह रोते हुए अपने बाएँ सीने पर हाथ फेर रहे थे। ............... लगभग दो घंटे बाद, डॉक्टर बाहर आए। कमल जी तेज़ी से आगे बढ़े और कुछ बोलने वाले ही थे कि डॉक्टर ने निराशा से सिर झुकाया। डॉक्टर: "आई एम सॉरी मि. गुप्ता। 😔 वह अब नहीं रहीं।" यह सुनते ही कमल जी ने अपना सीना पकड़ लिया और उनकी चीख़ निकल गई। यह सदमा वह बर्दाश्त नहीं कर पाए। अर्जुन और राणा दौड़कर आगे बढ़े और कमल जी को सँभाला। लेकिन कमल जी अपने होश में नहीं थे। वह दर्द से चीख़ते हुए रो रहे थे: कमल जी (आर्त स्वर में): "सुमी! ऐ सुमी! वापस आ जाओ सुमी! यह सब झूठ है, है न? सुमित्रा! सुन रही हो तुम? तुम्हारे बिना हम बहुत असहाय हैं। सुमित्रा, प्लीज़ Come Back... I... I can't live w..." वह अपनी बात पूरी नहीं कर पाए। कमल जी का शरीर ढीला पड़ गया। "अंकल!" कहकर अर्जुन चीख़ा। डॉक्टर तुरंत उन्हें आईसीयू (ICU) में ले गए। ................. अर्जुन अस्पताल की कुर्सी पर बैठा था, टकटकी लगाए नीचे ज़मीन की ओर देख रहा था। उसका चेहरा गंभीर था। तभी डॉक्टर बाहर आए और अर्जुन को देखकर बोले, "मि. कपूर, वह आपसे मिलना चाहते हैं। प्लीज़ अंदर आइए।" अर्जुन ने बिना ऊपर देखे, चुपचाप उठा और आईसीयू की तरफ़ बढ़ गया। अर्जुन का हर क़दम भारी होता जा रहा था। अर्जुन ने आईसीयू के अंदर प्रवेश किया। कमल जी बेड पर निस्तेज लेटे थे, उनके चेहरे पर ऑक्सीजन मास्क लगा था, और चारों तरफ़ मशीनें थीं। अर्जुन आगे बढ़ा, खुद को शांत किया और हल्की आवाज़ में बोला, "अंकल..." कमल जी ने धीरे से आँखें खोलीं और अर्जुन को देखकर कमज़ोर मुस्कान दी, "तुम आ गए अर्जुन।" अर्जुन कुछ नहीं बोला। उसकी आँखें ही जैसे सब कुछ कह रही थीं। कमल जी ने बोलना शुरू किया: "तुम्हारे पिता बहुत अच्छे इंसान थे, अर्जुन... हमारी दोस्ती बचपन की थी। मैं गरीब था, फिर भी तुम्हारे पापा मुझसे मिलते थे। धीरे-धीरे हम बड़े हुए। तुम्हारे पापा गाँव से शहर आ गए, और हमारी दोस्ती भी रुक गई... लेकिन फिर एक दिन हमारी मुलाक़ात हुई... तब तुम्हारी माँ गर्भवती थीं। तुम्हारे पापा मुझे गाँव से शहर लाए, नौकरी दी... मेरी शादी हुई, फिर तुम्हारा जन्म हुआ। लेकिन, तुम्हारी माँ यह सब सह नहीं पाईं। ग़लत मत समझना अर्जुन, पर तुम्हारी माँ ने तुम्हारे पापा से सिर्फ़ पैसों के लिए शादी की थी।" अर्जुन अभी भी शांत था। उसकी नज़र ठंडी थी। कोई हलचल नहीं, जैसे इन बातों का उस पर कोई असर नहीं पड़ रहा था। कमल जी को थोड़ी हैरानी हुई, लेकिन वह आगे कुछ कहना ही चाहते थे... कमल जी: "तुम्हारे पापा का एक्सीडेंट..." इससे पहले कि वह कुछ कहते, अर्जुन ने कहा, "मैं जानता हूँ अंकल, मैं यह सब जानता हूँ।" कमल जी हैरान हुए, "तुम जानते थे?" अर्जुन ने कुछ नहीं कहा, सिर्फ़ हल्का-सा सिर हिलाया। कमल जी: "तो तुम यक़ीनन यह भी जानते हो कि आज यह हमला किसने और क्यों किया?" अर्जुन थोड़ी देर चुप रहा, फिर बोला, "जानता हूँ।" कमल जी ने अब अर्जुन का हाथ पकड़ा और बोले, "मेरी कृषि... मेरी बेटी! उसे तुम संभालकर रखना अर्जुन। मेरी मासूम बेटी बहुत नासमझ है। उसे इस अंधेरी दुनिया से बचाए रखना, प्लीज़ अर्जुन। मेरी यह बात रख लेना।" अर्जुन ने शांत नज़रों से अपने हाथ पर देखा, जिसे कमल जी ने पकड़ा था। कमल जी समझ गए और हाथ छोड़ना चाहा, लेकिन तभी अर्जुन ने उनका हाथ और कसकर पकड़ लिया। अर्जुन: "रखूँगा।" बस, इन दो शब्दों ने कमल जी के मन का सारा डर और संकोच पल भर में दूर कर दिया। लेकिन इसके तुरंत बाद, उनकी साँसों की गति अनियमित हो गई। अर्जुन ने तुरंत डॉक्टर को बुलाया। डॉक्टर ने आकर उन्हें चेक किया, लेकिन कोई फ़ायदा नहीं हुआ। कमल जी भी चल बसे—अपनी प्यारी पत्नी के पास। अपनी बेटी को अकेला अनाथ छोड़कर चले गए। एक पल में ही, उस छोटी-सी लड़की की सुंदर दुनिया और रंगीन सपने ख़त्म हो गए। उस बेटी को पता भी नहीं चला कि उसे इस निर्दयी दुनिया में अकेला छोड़कर उसके मम्मा-डैडा चले गए है. .................. अर्जुन ने अपनी आँखें बंद कीं और एक गहरी साँस छोड़ी। फिर आईसीयू से बाहर आकर राणा से कहा, "उनके अंतिम संस्कार की व्यवस्था करो।" और इतना कहकर वह कृषि के केबिन की ओर चल दिया। कुछ देर बाद, कृषि को होश आया। वह रोते हुए उठी और पागलों की तरह चीख़ने लगी। कृषि (ज़ोर से रोते हुए): "मम्मा! डैडा! कहाँ हो आप लोग! मुझे नहीं रहना यहाँ! मुझे मेरे मम्मा-डैडा चाहिए!" अर्जुन ने तुरंत उसे अपनी बाँहों में कसकर पकड़ लिया। राणा दरवाज़े पर खड़ा, माफिया किंग को एक मासूम लड़की को गले लगाते हुए और प्यार से सांत्वना देते हुए देख रहा था। उसे विश्वास नहीं हो रहा था। अर्जुन (बेहद नरम और शांत आवाज़ में): "जान-बच्चा, श्श्श... श्श्श... मैं यहीं हूँ। डरो मत (Don't panic)।" कृषि (सिसकते हुए): "हैंडसम मैन... मेरे मम्मा-डैडा कहाँ हैं? मेरी मम्मा को... कितना ख़ून बह रहा था...!" वह अपनी बात पूरी नहीं कर पाई और फिर से फूट-फूटकर रोने लगी। अर्जुन ने उसे और कसकर पकड़ा, उसकी पीठ सहलाते हुए उसने कहा: अर्जुन: "श्श्श... मैं सब ठीक कर दूँगा।
Free reading for new users
Scan code to download app
Facebookexpand_more
  • author-avatar
    Writer
  • chap_listContents
  • likeADD