Untitled

841 Words
💀 माफिया किंग की दस्तक (Mafia King Ki Dastak) कपूर इंडस्ट्रीज़ में अचानक ख़ामोशी छा गई। हर कर्मचारी के माथे पर ठंडा पसीना आ गया। सब के हाथ-पाँव काँपने लगे थे। इसकी वजह थी—ऑफिस के गेट के सामने आकर रुकी हुई काले रंग की रोल्स-रॉयस कार, जो स्वयं अर्जुन कपूर की थी। धमक भरी चाल से चलते हुए अर्जुन ऑफिस के अंदर आ रहे थे। हर स्टाफ ने सिर नीचे झुका लिया। आज किसी की 'टूँ' करने की भी हिम्मत नहीं हो रही थी। अर्जुन कपूर का aura ही कुछ और था। जैसे ही अर्जुन अपने केबिन में घुसे, खड़े सभी लोगों ने चैन की साँस ली। उन्हें लगा जैसे इतनी देर तक उनकी साँसें अटकी हुई थीं। 💼 केबिन के अंदर का कहर (Cabin Ke Andar Ka Kahar) अर्जुन के केबिन में... राणा: "भाई, मि. सेन को हमारे लोगों ने पकड़ लिया है। उसे इस वक्त डेथ हाउस में रखा गया है।" अर्जुन ने राणा की बात सुनी और कुर्सी पर बैठे-बैठे टेढ़ी मुस्कान के साथ अपनी ठंडी आवाज़ में कहा, "क्या वो सेन... नहीं जानता कि मामूली पैसों के लिए इस अर्जुन कपूर के साथ विश्वासघात करने का अंजाम क्या हो सकता है? पैसा? ह्म्म। मामूली से कुछ पैसों की कीमत उसके लिए इतनी ज़्यादा हो गई... मेरी कंपनी, अर्जुन कपूर की कंपनी को धोखा, हूँ? हूँ? दोगुनी कीमत... यह कीमत उसे अपनी जान देकर चुकानी पड़ेगी!" राणा इतनी देर से अर्जुन की बातें सुन रहा था। उसने सूखी निगल ली और मन ही मन बोला: (मैं जानता था, मि. सेन को आज कोई नहीं बचा पाएगा।) तभी केबिन के दरवाज़े पर दस्तक हुई। राणा ने धीरे से 'अंदर आ जाओ' कहा, और कमल जी अंदर दाखिल हुए। कमल जी ने राणा की तरफ़ देखा और आँखों से इशारा किया, मानो पूछ रहे हों—'माहौल कैसा है?' राणा कुछ बोल पाता, उससे पहले ही अर्जुन ने अपनी गंभीर आवाज़ में कहा: अर्जुन: "अंकल।" अर्जुन के इस तरह बुलाने पर कमल जी चौंक गए। फिर तुरंत खुद को सँभालकर बोले, "हम्म... हा हा... सर बोलिए।" अर्जुन: "अंकल, प्लीज़, मैंने आपको कितनी बार बोला है कि मुझे अर्जुन कहकर ही बुलाया करें। मैं सबके लिए जैसा भी हूँ, आपके लिए आपके बेटे जैसा ही हूँ।" अर्जुन की यह बात सुनकर कमल जी की आँखों में आँसू आ गए। उन्होंने अर्जुन के पास जाकर कहा, "नहीं अर्जुन, तुम ग़लत सोच रहे हो। मैं तो बस... ऑफ़िस..." उनकी बात पूरी होने से पहले ही अर्जुन ने कहा, "उसकी कोई ज़रूरत नहीं अंकल। ऑफ़िस हो या कहीं और, आप मुझे मेरे नाम से ही बुलाएँगे।" कमल जी ने हल्का-सा सिर हिलाकर अपनी सहमति दी। फिर वह कुछ हकलाते हुए अपनी बात शुरू करना चाहते थे। कमल जी: "अ... असल में... असल में..." अर्जुन: (अपनी गंभीर आवाज़ में) "What happened, Uncle? कोई प्रॉब्लम है?" कमल जी: "असल में, मैं आपसे एक बात कहना चाहता हूँ..." अर्जुन ने बिना कुछ कहे कमल जी की तरफ़ देखा। कमल जी: "अर्जुन... वह लोग हमारे ठिकाने तक पहुँच गए हैं..." बोलते-बोलते कमल जी का फ़ोन बज उठा। उन्होंने सामने लाकर देखा—उनकी पत्नी सुमित्रा जी का फ़ोन था। उन्होंने माथे पर बल डाला कि इस समय सुमित्रा ने क्यों फ़ोन किया। सोचते-सोचते उन्होंने फ़ोन कान से लगाया, और तभी दूसरी तरफ़ सुमित्रा जी ने रोते-रोते कहा: सुमित्रा जी: "व... व... वो लोग... घ... घर पर आ... आ गए हैं!" बस! वह और कुछ बोल नहीं पाईं। कमल जी के हाथ से फ़ोन छूटकर गिर गया। उन्होंने यह क्या सुन लिया! तभी राणा ने कमल जी के कंधे पर हाथ रखकर पूछा, "अंकल! क्या हुआ?" कमल जी: "ह... हाँ... मुझे जाना होगा! मेरी पत्नी... मेरी बेटी... वह लोग उन्हें मार डालेंगे! मुझे जाना होगा!" यह कहते-कहते वह तेज़ी से बाहर निकल गए। इधर अर्जुन और राणा ने एक-दूसरे की तरफ़ देखा, और फिर एक साथ कमल जी के पीछे-पीछे दौड़ पड़े। 🏠 गुप्ता हाउस में चीख़ (Gupta House Mein Cheekh) गुप्ता हाउस... माँ और बेटी दोनों एक कमरे में बैठी थीं। कृषि डर के मारे थर-थर काँप रही थी। सुमित्रा जी अपनी बेटी को अपने सीने से लगाए हुए थीं। वह अपने डर को छिपाकर बोलीं, "सोनू बच्चा, डरो मत सोना। मम्मा हैं न बच्चा... कुछ नहीं होगा। डैडा आ रहे हैं, सोना बच्चा।" इधर घर का हाल बेहद बुरा था। सारा सामान बिखरा पड़ा था। ठीक उसी समय कमल जी, अर्जुन और राणा तेज़ी से घर के अंदर दाखिल हुए। घर की हालत देखकर कमल जी भयभीत हो गए और काँपती आवाज़ में पुकारा, "सुमित्रा! पी... प्रिंसेस!" तभी कृषि दौड़कर अपने डैडा (कमल जी) से लिपट गई और फूट-फूटकर रोने लगी। इधर अर्जुन अपनी जगह पर ठिठक गए। वह टकटकी लगाए, कृषि के रोते हुए चेहरे को देख रहे थे। रोने की वजह से कृषि के गाल, नाक और कान लाल हो गए थे। कृषि सिसक-सिसककर रो रही थी और अपने पापा से कह रही थी, "व... वो गुंडों ने क्या... क्या किया..." तभी एक ज़ोरदार आवाज़ हुई। सब चौंककर पीछे मुड़े, और पीछे मुड़ते ही कृषि चीख़ उठी! आज के लिए इतना ही! आगे की कहानी जानने के लिए पढ़ते रहिए... His Silly Girl
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