गैंगस्टर__।।

1203 Words
माया तेजी से कहीं जा रही थी। उसे अनिका के चोट लगने का बुरा तो लगा पर उससे भी ज्यादा जरूरी उसे एक काम था। उसे किसी का कॉल आया था कि उसका बचपन का फ्रेंड जो कि हमेशा उसके साथ रहा है और थाईलैंड जाने से पहले भी वह इसी के साथ रहा है उसे किसी माफिया ने माया के पता पूछने के लिए उसे उठाकर ले गए हैं। थोड़ी देर में ही माया अपने बाइक से एक खुफिया अंडरकवर जग में पहुंच जाती है।। उसके पीछे ही उसका दोस्त अर्जुन अपने ब्लैक लैंबॉर्गिनी कार से आ रहा था ।। दोनों अपने-अपने गाड़ियों से नीचे उतरे और धीरे-धीरे दोनों हाथों में अपने-अपने बंदूक के पकड़ उसे खुफिया जगह की ओर जाने लगे। उन दोनों का पोशाक और हाथों में गण ऐसे लग रहे थे जैसे दोनों एक अंदर कर ऑफिसर हो।। उन दोनों की चेहरे की चमक ऐसी थी कि जो एक बार देखे वह देखता ही रहजाए। और मदहोश हो जाए। माया और अर्जुन अपने दोस्त मयंक को ढूंढने लगे।। काफी ढूंढने पर उसे वहां पर कोई नहीं मिला। फिर आगे जाकर उन्हें एक दरवाजा दिखा जो की काफी सिक्योरिटी में था। उसके ऊपर तीन चार ऑटोमेटिक लॉक लगे हुए थे। जो की इतनी आसानी से खुलने वाले नहीं थे। पर अर्जुन ठहरा मोस्ट इंटेलीजेंट पर्सन।। उसने अपना दिमाग का तिगड़म चलाया। और लॉक खोल दिया। जैसे ही लॉक खुला दरवाजे के पीछे कही बॉडीगार्ड खड़े थे। जोकिंग उन दोनों पर पिस्टल तानी खड़े थे। पहले तो वह दोनों शांतरहे। उन्होंने स्थिति को दिखा। और स्वयं को दिखा गिनचुन कर वहां पर उन सब का एक बस और 20 बॉडीगार्ड थे। शाखा उनका जो बस था।। उसने माया को बोला।। आओ आओ तुम्हारा ही इंतजारथा। बोला था ना एक न एक दिन तुम्हें यही आना पड़ेगा। माया ने उसकी तरफ देखा औरबोला। मैं आ तो गई यहां पर पर तुम मेरा कुछ नहीं बिगाड़ सकते। मैं एक गैंगस्टर गर्ल हूं जिसे ना आज तक कोई पकड़ पाया है ना पड़ सकता है ना कुछ बिगाड़ सका है न बिगाड़सकेगा।। जिससे हमें पता लगता है माया एक गैंगस्टर माफिया गर्ल है।। जिसे मार कर मुंबई की सब माफिया खुद को वहां का माफिया बॉस बनाना चाहते हैं पर जब तक माया जिंदा है ऐसा नहीं हो सकता। माया को शाखा अपने पास बुला लेता है। और बोलता है अगर तुम्हें अपने दोस्त की जान बचाना है तो तुम्हें अपनी जान देना पड़ेगा। वह बोलती है ठीक है। शाखा जो उनका बस था वह माया को एक जहर वाली दवाई देता है और बोलता है दोस्त का जान बचाना है तो इसे खाना पड़ेगा। अर्जुन उसे देख रहा था और बोल रहा था माया नहीं नहीं मत करोऐसा।। माया ने कहा नहीं मैं मयंक की जान मुश्किल में नहीं डाल सकती उसके यहां पर कोई गलती नहीं मैं अपने खातिर अपने दोस्त की जान को दओं पर नहीं लगा सकती। माया ने वह दवाई खा ली। अर्जुन उसे नहीं-नहीं बोलता रह गया। माया का दाम घटने लगा वह अपने गाल को पकड़ के खुद को कंट्रोल करने की कोशिश कर रही थी पर वह साथ नहीं ले पा रही थी और एकदम बेहोश हो के नीचे गिरगई।। शाखा ने बोला कहा था ना एक दिन इस अंडरकवर माफिया का वह बस तो मैं ही बनेऊगा थोड़ी ही देर में शाखा ने अपने वादे।। के अनुसार मयंक को छोड़ दिया मयंक और अर्जुन जाकर माया को उठाने लगे। माया माया उठो तुम्हें क्या हुआ।। वह दोनों माया से सीमेंट के रोने लगे। इतने में माया उठे और बोलतेलगे।। इन फनी टोन ओ हो छिछोरों मुंह पर तितली बेइज्जती करते हो और पीछे रो रहे हो पता नहीं था मेरे मरने पर यह दो शेर भीगी बिल्ली की तरह रोने लगेंगे।। और बोलती है क्या गैंगस्टर बनोगे रे तुम दोनों।। फिर माया अपने स्टाइल में खड़ी होती है। और एक भयानक सी आवाज में बोलतेहै। शाखा दो कौड़ी के माफिया बॉस।। तुम नहीं जानते आई एम द माया। थे अंडरकवर गैंगस्टर बॉस ना मुझे आज तो कोई मार पाएआ ना मार पाएगा। तुम्हें क्या लगा मैं इतनी जल्दी मर गई नहीं नहीं मैं इतनी बेवकूफ नहीं। फिर तीनों अपने-अपने स्टाइल में आते हैं। और माया एक बॉडीगार्ड के हाथ पर लात मार के उस गण छीन लेती है। अर्जुन और मयंक भी एक-एक बॉडीगार्ड को मार के उनसे गंज छीन लेते हैं।। उन तीनों को 1 मिनट भी नहीं लगता सब बॉडीगार्ड को निपटने में। आखरी में बचता है शाखा। सब बॉडीगार्ड को करने के बाद। मयंक, अर्जुन, और माया अपनी स्टाइल में शाखा की ओर बढ़ने लगते हैं। बीच में माया लेफ्ट साइड अर्जुन और राइट साइड मयंक।। यह तीनों एक साथ ऐसे चल रहे थे जैसे इनका सामना कोई नहीं कर सकता। माया शाखा की और बढ़ती है और बोलती है बोला था ना मुझे ना आज तक कोई मार पाया है ना मार पाएगा और उसके माथे में गन रखते गण चला देता है जिसके कारण शाखा वहीं के वहीं मर जाता है। फिर माया मयंक को बोलता है बच्चे आगे से अपना ध्यान रखना अगली बार नहीं आऊंगी तुम्हें बचाने पता है ना पेट्रोल कितना महंगा हो गया है।। तो मयंक बोलता है ओ अब मेरी जिंदगी से ज्यादा कीमती तुम्हारे लिए इस गाड़ी का पेट्रोल हो गया माया या या या या या। इतना बोलने के बाद तीनों हंसने लगतेहैं। फिर माया अपनी बाइक में,, अर्जुन अपने लैंबॉर्गिनी में, बैठ कर घर जाने के तैयार होते हैं। इतने में मयंक बोलता है अरे यार क्या मुझे तुम लोग यही छोड़ जाओगे क्या मेरी गाड़ी कहां है। वही साइड में एक साइकिल खड़ी थी। अर्जुन उसे साइकिल की तरफ इशारा करते हुए बोलता है वह देखो तुम्हारी गाड़ी तुम उसमें आ जाओ। माया टू बाय बोलकर पहले ही निकल गई थी। पर जब अर्जुन अपनी लैंबॉर्गिनी को स्टार्ट करके निकल ही रहा था कि मयंक कूद कर लैंबॉर्गिनी के अंदर बैठ जाता है। और अर्जुन को बोलता है। तुम्हें क्या लगा तुम मुझे ऐसे ही यहां पर छोड़ कर चले जाओगे और मैं देखारहूंगा। मैं भी किसी से काम नहीं देखा ना आ गया। तो अर्जुन बोलता है हां तुम बंदर से कम नहीं।। और वह घर की ओर चल पढ़ते हैं। दूसरी तरफ अनिका छाया को बोलता है "अरे यार अब सिर्फ एक महीना ही भेज गया स्कॉलरशिप के एग्जाम को पहले तो यूनिवर्सिटी ढूंढने में टाइम लग गया उसके बाद फिर स्कॉलरशिप उसके बाद वह किताबें और लाइब्रेरी ढूंढने में निकल गया-और जब वह किताबें और लाइब्रेरी मेरी तो यह पैर टूट गया जिसमें एक हफ्ता और निकल गया! गिनचुन का सिर्फ अब 40 ही दिन बचे हैं मेरे पास एग्जाम की तैयारी के लिए अब मैं क्या करूं! छाया थोड़ी सोचती है फिर बोलतीहै"बात तो सही की है तुमने एग्जाम को 40 ही दिन हो गए हैं लेकिन कोई बात नहीं एग्जाम तक तुम्हारे पैर ठीक हो जाएंगे और रही बात तैयारी की अगर तुम तैयारी के लिए बाहर नहीं जा सकते तो क्या हुआ किताबें तो अंदर आ सकती है ना तुम यहां पर बैठकर अपनी तैयारी करो किसी बात की टेंशन मत लेना और कहीं आने जाने की जरूरत भी नहीं पड़ेगी! अनिका हां में से हिलतीहै क्या अनिका एग्जाम देने तक कर पाएगी एग्जाम की तैयारी जा रह जाएगी वह इस एग्जाम को देने से
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