संघर्ष, सुकून और संजना की खामोशीUntitled

313 Words
सुबह होते ही सोहेल जी काम के लिए बाहर चले गए। कुछ खास पढ़े लिखे नहीं थे इसलिए उन्हें काम ढूंढने में बहुत दिक्कत हुई लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और लगातार अपने परिवार का गुजारा करने के लिए काम ढूंढते रहे। आखिर में शाम को थक्कर वापस घर आ गए। लेकिन उस दिन वह बाहर से थोड़ा सा आटा और कुछ सब्जियां खरीद लाए थे ताकि घर का गुजारा हो सके। घर में खाने वाले दो ही लोग थे इसलिए उनका रात का गुजार आसानी से हो गया था। उस रात तो दोनों खाना खाकर सो गए। लेकिन अब परेशानी इस बात की थी कि कब तक ऐसा ही चलेगा। अगले दिन जब सोहेल जी घर से गए तो उन्हें बाहर जाते ही एक काम मिल गया। काम लोहे टीन को कलेक्ट करके बड़े दुकानों तक पहुंचाने का था। उसमें इतना पैसा नहीं होता था मुश्किल से पूरे दिन में ₹500 ही कमा पाते थे। जिसमें की बस घर का ही गुजारा हो पाता था। संजना जी की समझदारी और उनके कम खर्च करने की आदत की वजह से₹500 में से भी सोहेल जी कुछ पैसे बचा लिया करते थे। संजना जी कभी भी कोई शिकायत नहीं करती थी इसलिये सोहेल जी उनसे बहुत प्यार करते थे और उनके बिना बोले ही उनकी हर ख्वाहिश पूरी कर देते थे। समय खुशियों में बीत रहा था। अब इनाया भी 6 महीने की हो चुकी थी। सोहेल जी और संजना जी ने मिलकर अपने लिए एक दूसरा किराए पर घर ले लिया था। जो कि पुराने वाले घर से काफी बेहतर था लेकिन यहां की जो किराए मालकिन थी वह संजना जी पर थोड़ा ज्यादा ही जुल्म किया करती थी इसके बावजूद कभी संजना जी ने सोहेल जी से कुछ नहीं कहा। पूरे दिन घर पर अकेले अपनी बेटी के साथ रहती और खामोशी से घर का सारा काम करती थी।
Free reading for new users
Scan code to download app
Facebookexpand_more
  • author-avatar
    Writer
  • chap_listContents
  • likeADD