पिता को जब उनकी बेटी होने का संदेश मिला तो वह तुरंत ही गांव चले आए और अपनी बेटी से मिलने की बात कही जो सुनकर दादी सीधा उन्हें इस कमरे में ले गई जहां उनकी बेटी और उसकी मां आराम कर रहे थे।
कमरे में आते ही जब उन्होंने अपनी बेटी को दिखा तो बहुत खुश हुए। वे विश्वास नहीं कर पा रहे थे कि इतनी खूबसूरत बेटी उनकी है। उनकी हिम्मत नहीं हुई उसे हाथ तक लगाने की, उनके हाथ कांप रहे थे और वह कुछ भी बोल नहीं पा रहे थे।
आगे बढ़ने से पहले मैं सभी लोगों का नाम बता देती हूं।
बच्ची की मां का नाम संजना है
पिता का नाम सोहेल है
दादी का नाम समायरा है।
अब आगे शुरू करते हैं।।
फिर बच्ची की मां ने ही खुद से कहा,"यह हमारी ही बेटी है".
यह सुनकर भी वह कुछ नहीं बोल पाए और खामोशी से अपनी बेटी को ही देखते रहे। उनकी बेटी इतनी खूबसूरत है जैसे कि आसमान से उतरी कोई नन्ही सी परी।
वह शादी के बाद इन दोनों की पहली संतान थी जिस कारण दोनों ही नहीं समझ पा रहे थे कि किस तरीके से रिएक्ट करें।
उन्होंने किसी भी तरीके का नामकरण का प्रोग्राम नहीं रखा है क्योंकि सोहेल जी बिल्कुल भी अपने घर में शोर शराबा नहीं चाहते थे और ना ही अभी अपनी बेटी को किसी के सामने लाना चाहते थे।
इसलिए उसका नाम घर पर ही रख दिया गया।
उसका नाम सबने मिलकर बड़े प्यार से इनाया रखा यह नाम सभी को बहुत ही पसंद आया और उसके बाद से ही सब उसे इनाया नाम से ही बुलाने लगे।