मासूम इनाया: अपनों का ज़ुल्म और ममता का संघर्ष

290 Words
इनाया बहुत खूबसूरत और सबका ध्यान अपनी तरफ खींचने वाले बच्चे थी। बचपन से ही बेहद शरारती रही है घर में सबसे छोटी और अपने मां पापा की एक अकेली संतान होने की वजह से उसे सबसे ज्यादा प्यार मिलता था। बीमारी का दूर-दूर तक कोई वास्ता नहीं था। ऐसे ही वक्त खुशियों में बीतने लगा। संजना जी के साथ उनके ससुराल वालों का बिहेवियर आज भी वैसा ही था। आज भी सब उन्हें परेशान करने का एक मौका नहीं छोड़ते थे। सोहेल जी भी अपनी बच्ची से मिलकर वापस देहरादून आ चुके थे। आप सब कुछ संजना जी को अकेले ही देखना होता था क्योंकि उन्हें अपने साथ-साथ अब अपनी बेटी का भी ध्यान रखना होता था। अब वह पहले की तरह अकेली नहीं थी अब उन पर उनकी बेटी की भी जिम्मेदारी थी। सवा महीने तक ऐसा ही चलता रहा। फिर एक दिन, संजना जी के जेठ यानी कि सोहन जी के बड़े भाई ने संजना जी पर झूठे इल्जाम लगाकर सुहेल जी को झूठ बोलकर गांव बुला लिया सोहेल जी कुछ खास कमाते नहीं थे तो उन्होंने सीधा उन्हें यही धमकी दी एक तो तुम कुछ खास कमआते नहीं हो ऊपर से अपनी बीवी और अपनी लड़की का खर्चा और हमारे सर पर बढ़ा दिया है लेकर जाओ इसे यहां से और खुद अपने ख़र्चे उठाओ अब हम तुम्हारा कोई खर्चा नहीं उठाने वाले। यह सब सुनकर सोहेल जी को बहुत दुख पहुंचा लेकिन वह कुछ नहीं कह पाए क्योंकि बचपन से ही अपने बड़े भाई का हर आदेश मानते रहे थे उन्होंने किसी भी चीज के बदले उन्हें कोई जवाब नहीं दिया था इसी वजह से वह आज भी खामोश रह गए और अपनी सवा महीने की बेटी और अपनी पत्नी को लेकर देहरादून आ गए।
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