पिता का आना

241 Words
पूरे परिवार को उनके स्वाभिमान प्यारा होने की वजह से वह उसे बच्ची के स्वागत में कोई कमी नहीं छोड़ रहे थे। मां के अंदर आते ही लोग उनकी सेवा में जुट गए। बच्ची की खूबसूरती के कारण हर कोई उसे लाड प्यार कर रहा था। कोई उसकी खूबसूरती की तारीफ करता तो कोई उसकी मां को उसके खूबसूरत होने की वजह मान रहा था। और वह नन्ही सी परी इतने सारे लोगों की वजह से बस परेशान हो रही थी। कुछ समय बाद बच्ची को उसकी मां के साथ एक रूम में भेज दिया जाता है, गांव में होने की वजह से मार्च के महीने में गर्मी भी बहुत ज्यादा थी जिस कारण मार्च में भी बिना पंखे के कहीं चैन नहीं था। शाम होते होते उस बच्ची के पिता भी गांव पहुंच जाते हैं, उन्हें तो जैसे ही खबर मिली कि उनको लड़की हुई है वह अपना सारा काम छोड़कर गांव के लिए निकल गए थे, और उस वक्त इतना संसाधन ना होने की वजह से उन्हें पहुंचते पहुंचते शाम हो ही गई। उन्होंने आते ही सबसे पहले अपनी बेटी से मिलने की बात कही, तो उस बच्ची की दादी सीधा उन्हें उस कमरे में ले गई जहां बच्ची के साथ उसकी मां आराम कर रही थी। उनका यह पहला बच्चा था तो दोनों ही बेहद खुश लग रहे थे, वह इस कदर खुश थे कि उन दोनों की खुशी को शब्दों में बताना शायद मुमकिन भी नहीं है।
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