Story By Z_toxic _Z
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Z_toxic _Z

bc
​👻 Classic and Gothic Horror Novels (Foundational)
Updated at Dec 7, 2025, 20:54
​Dracula by Bram Stoker (1897): The definitive vampire novel that shaped the modern mythology of the bloodsucker.​Frankenstein by Mary Shelley (1818): A foundational work of both horror and science fiction, exploring themes of creation, ambition, and monstrosity.​The Strange Case of Dr. Jekyll and Mr. Hyde by Robert Louis Stevenson (1886): A psychological thriller about the duality of human nature.​The Picture of Dorian Gray by Oscar Wilde (1890): A gothic and philosophical horror story about moral corruption and eternal youth.
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"The Desperate Ghosts" appears to be the cover of a template for horror novels, rather than a specific published book with an es
Updated at Dec 7, 2025, 16:05
बात उन दिनों की है जब में कॉलेज का स्टूडेंट था| अपने कॉलेज की ओर से हम सभी कैम्प के लिए एक जंगल में गए थे।, लकी ठंढ थी : अतः रात में हम सबने पूरी रात कैम " फायर के साथ डांस करने ,गाने आदि का प्रोग्रा तय किया मुझजे और सभी साथियों को कैम्प फायर के लिए नकडियाँ इक्ट्डी करने का भार सौंपा गया मैं निकला तो सबके साथ ही लेकिन जंगल के प्राकृतिक सौन्दर्य में भटकता हुआ अकेले बहुत दूर कहीं निकल गया अचानक आसमान बादलों से भर गया और गरज के साथ बारिश होने लगीबादलों के लगातार गरजने से मेंपेड़ के नीचेखड़ रहना मुनासिब न समझ आसपास किसी घर की तलाश में एक दिशा में भागने लगा| मुझे कुछ ही दूरी पर एक लाल ईटों से बनी शानदार बिल्डिंग नजर आई। , बेल्डिंग रोशनी से पूरी नहाई हुई थी और उसमें ढे सारे लोग हैं - ऐसा दूर से ही लग रहा था मैं तेजी से भागते हुए उस बिल्डिंग में जा घुसा और गामने से आती हुई एक खुबसूरत नर्स से टकराते टकराते बचा र्स ने मुझे घूर कर देखते हुए कहा - " बहुत अधि् भीग गए हो ,सर्दी लग जायेगी| उधर बाई ओर एक स्टोर रूम है ; वहां जाकर जो भ मेले उससे कहना सिस्टर जूलिया ने दुसरे सूखे औ साफ़ कपडे मुझेदेने को कहा है - वह तुम्हेकपडे दै देगा। " में हक्का बक्का मुंह फाड़़े सिस्टर जूलिया को टेखता रहा। मुझे एकदम से यह समझ नहीं आया कि में क्या करूंरी स्थिति देखकर सिस्टर जूलिया खिलखिलाक इंस पडी और बोली - गहले तो तुम अपना मुंह बंद करो वरना मुंह में मच्छ घुस जायेंगे और अब जाकर वीसा ही करो जैसा मेंने कहा है।" नं हलके से 'होँ ' में सर हिला सिस्टर की बताई दिश में जाने को मुद गया] मभी कुछेक दस कदम ही चला होउंगा कि मेरे कंधेप किसी ने हाथ रखा मैं चोककर पीछे मुदा और अपने सामने आर्मी की वर्दी ें एक युवक को खडा मुस्कुराता पायरे चेहरे पर आश्चर्य का बादल अपना घर बना चुक त ; जिसे देखते ही उस युवक को हंसी आ गई उसने धीमे किन्तु दृढ स्वर में कहा मैंकैप्टन विनोद हूँ और यह हमारे देश की आर्मी का हॉस्पिटल है।" कैप्टन विनोद की बातों ने मुझे आश्वस्त किय मैं अब धीरे धीरे 'सामान्य हों गया और मैंने कैप्टन वेनोद को सिस्टर जूलिया की कही बातें बता सुनकर ,कैप्टन विनोद के चेहरे पर रहस्यमयी मुस्कान ल गई और वे बोले- " तो सिसितर जूलिया से ्भ मिल चुके]" " जी , क्या मतलब है आपका ? " कुछ नहीं ,चलो मैं तुम्हे सूखे कपडे देता हूँ चेंज कर लो नहीं तो सच में सर्दी लग जायेगी।" और में कैप्टन विनोद के पीछे- पीछे एक बड़ेसे मरे में पहॅच गया| कमरे के चारो ओर हरे रंग के परं लगे हुए थे।'एक ओर एक बड़ा सा बेड पडा हुआ था और उसके सामने एक सोफा था बीच में एक टेबल था जिस पर दो ग्लास ,एक बड़ी बोतल ब्रांडी की और एक या दो पत्रिकाएं पड़ी हुई थीं। फमरे के एक कोने में एक बडी सी अलमार थी ;जिसमें से कैप्टन विनोद ने एक आसमानी रंग का 'कुरता - पायजामा निकालकर मुझे दिया और कमरे से लगे बाथरूम की ओर इशारा किया| मैं बाथरूम से कपडे चेंज कर जैसे ही निकलने लगा नेरी नजर बाथरूम की एक दीवाल पर पड़ी ह खून के छींटों से भारी हई थी| यह देखकर म घबडा गया और जल्दी से बाहर निकलने को मुदा कि बाथरूम मेंलगे आईने में खुद को ही देखकर चौंक गया] आईने में मेरा पूरा शरीर तो नजर आ रहा था लेकिन नेरे शरीर पर से मेरा सर गायब था अब मुझे डर लगने लगा और मैं हडबड कर बाथरूम से निकल गया| , मुझे इस तरह बाहर निकलते दैख कैप्टन विनोद ने हंसकर पूछा - " क्या हुआ ? अरे होँ ,तुम ने तो अब तक मुझे अपना नाम ही नहीं बताया।" कहॉं जाओगे ,बाहर बहुत तेज बारिश हो रहीहै| किन ,तुम जाना क्यों चाहने लगे अचानक यह मैं समझ नहीं पा रहा है।" ' कैप्टन विनोद आपकी बाथरूम की एक दीवाल पूर्र बून के ्छींटोंसे भरी हुई है। और और आपके बाथरू में लगा आईना भी कुछ अजीब सा है| उसमें मुझे मेरा पूरा शरीर तो दिखाई दिया लेकिन मेर नर ही गायब था] में अब बिलकुल भी नहीं रुकुंग बारिश में ही भीगता हुआ अपने कैम्प तक जाऊँगा|"कहते हुए में कमरे से बाहर जाने वाले दरवाजे की ओर बढ़ा। " रुको" तभी कैप्टन विनोद की कडकती आवाज गूंजी "तो तुमने सबकुछ देख ही लिया।" जी क्या मतलब है आपका ?" मेरी आवाज में डर भ गया था। नतलब चाहे जो हो|तुम तब तक यहॉं से नहीं ज पकते जबतक में तुम्हे कुछ बता न दूं क्क्कक्या बताना चाहते हैं आप ? जो आजतक कोई न जान सका।""जो आाज तक कोई न जान सका वह मैं जानका क्या करंगा| प्लीज ,अब मुझेजाने दें" - मेंडर से रुआंसा हो गया नहीं , बिलकुल भी नहीं| और , तुम्हे मुझसे डरनेर्क भी कोई जरुरत नहीं सैनिक सबकी रक्षा के लिए होते हैं। में भी तुम्हारी सुरक्षा ही कर रहा हूँ।" - कैप्टन विनोद के स्वर में ोमलता थी - " आओ मेरे साथ इस सोफे पर बैद जाओ] में तुम्हे एक कहानी सुनाता हैँ। कहानी खत्म होते ही में ुम्हे तुम्हारे कैम्प तक जीप से छोड़ आऊंगा वैसे भी तुम अपने साथियों से काफी आगेनिकल आये हो|वहां तक तुम अब चलते हुए शायद पहुँच स पाओ" प्टन विनोद के स्वर में जाने कैसी आश्वस्ति थी म जाकर उनके बगल में बैठ गया कैप्टन विनोद ने कहना शुरू किया - "दुश्मनोंने धोखे पे हमारे अस्पताल को अपना निशाना बनाय दुश्मन देश के दो सैनिक हमारे सैनिक के वेश में एक मारे ही घायल सैनिक को लेकर आये वह घायल था और और हमारे देश की सेना नेउसे बहुत ढूंढा लेकिन नहीं मिला था शायद , साजिश के तहत उसे घायल होते ही युसपैठियों ने कहीं छुपा दिया थाअचानक अपने खोये सैनिक को अपने हॉस्पिटल में पा सभी खुश हो गए और बिना अधिक पड़ताल किये ऑस्पिटल के गेस्ट रूम में घायल को लेकर आने वात छझ् वेष धारियों को ठहरने की इजाजत दैदी गई। अभी उस सैनिक का इलाज चल ही रहा था कि जोरों का ब्लास्ट हूआ और पूरा हॉस्पिटल एक पल में खंडहर में तब्दील हो गया।" लेकिन हॉस्पिटल तो अपनी शानदार स्थिति मेंखडा हैं।" बेरी बातों को अनसुना कर कैप्टन विनोद ने अपर्न वात जारी रखी - " कोई नहीं बचा उस् ब्लास्ट में। ोवाल पर पड़े खून के ्छंटि भी उसी ब्लास्ट में मां ाए होपितल के कर्मचारियों के हैं
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