कालेज के दिन
विनम्र घोषणा-प्रस्तुत धारावाहिक एक दिल दहलानेवाली घटना से प्रेरित है, जिसमें एक गैंग के कई गुंडे अनेक पुलिस अफसरों का धोखे से कत्ल कर देते हैं। इसी लोमहर्षक घटना का नाम, स्थान, पात्र व तारीख बदल कर धारावाहिक का शक्ल दिया गया है। लिहाजा, पुलिस व अन्य प्रशासनिक अफसरों का चरित्र-चित्रण निहायत काल्पनिक है। धारावाहिक लेखन का उद्देश्य किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं, अपितु विशुद्ध फिक्शन व मनोरंजन है।
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चेप्टर-1
छत्तीसगढ़ राज्य के जगदलपुर के धरमपुरा स्थित डिग्री कॉलेज में पहले ही दिन फर्स्ट ईयर की छात्रा श्रेया बंसल का सामना रैंगिंग करनेवाली सीनियर छात्राओं से हो गया।
श्रेया उन्हें करारा जवाब देती हुई बोल रही थी,‘‘कर लो रैगिंग। जितना चाहो, उतना। मगर याद रखो, ज्यादती करने की जुर्रत किए, तो ऐसा सबक सिखाऊंगी कि जिंदगीभर मेरे नाम से रोओगे कि किससे पाला पड़ गया था?’’
‘‘अरी, तू तो बड़ी तीस मार खां है री। कहां से आई है?’’एक सीनियर छात्रा दूसरी सीनियर छात्रा के कंधे पर हाथ रखकर स्टाइलिस्ट बनते हुए फिल्मी अंदाज में पूछी।
श्रेया तुनक कर जवाब दी,‘‘दंतेवाड़ा से आई हूं। क्यों क्या हुआ? गांव-देहात से आई समझ लिया क्या?’’
इस पर उसकी गर्लफ्रेंड मधु, श्रेया को खींची, जो हायर सेकंडरी स्कूल, दंतेवाड़ा में भी उसके साथ थी और डिग्री कॉलेज जगदलपुर में भी साथ-साथ पहुंच गई थी,‘‘अरे, छोड़ न! क्लास लगनेवाला है। मूड खराब मत कर अपना।’’
इस पर श्रेया, मधु के हाथ को झटकी। सीनियरों की आंखों में आंखें डाली और तमककर बोली,‘‘रुक तो जरा। देखूं, इनका रैगिंग!’’
इतने में एक दूसरी सीनियर छात्रा बोल पड़ी, जो अपनेआप को झांसी की रानी से कम नहीं समझती थी,‘‘तेवर देखो इसका। कैसी फुदक रही है? किसके घर की है रे तू, तीखी मिर्ची?’’
यह सुनकर श्रेया तो नहीं, उसकी फ्रेंड मघु जवाब दी,‘‘इसके पापा जगदलपुर के नए डीएसपी हैं।’’
‘डीएसपी’ सुनीं, तो वो कन्याएं दांतों तले ऊंगली दबा ली,‘‘हाय दैया! तब तो जायज है तेरा रवैया। जा, नहीं लेना रैगिंग। कहीं डीएसपी साहब भड़क गए, तो लेने के देने पड़ जाएंगे।’’
‘‘क्यों? क्या हुआ? लो न रैगिंग!’’श्रेया उनके एकदम करीब पहुंची और उनको बायें हाथ से ढकेलकर बोली, तो उनकी सिट्टी पिट्टी गुम हो गई। अब, वे वहां से दुम दबाकर खिसकने लगीं।
इस तरह कालेज में श्रेया का पहला दिन धांसू तरीके से गुजरा। वो भी मजेदार, शानदार व लज्जतदार। वो यही वाकिया अपने पापा-मम्मी को बता-बता कर लोट-पोट हुई जा रही थी। उसके मम्मी-पापा भी उसकी बातों में मजा ले रहे थे।
डीएसपी बनते ही, जब विकास बंसल की पोस्टिंग जगदलपुर अनुविभाग में हो गई, तब उसका परिवार भी जगदलपुर (बस्तर-जिला, छत्तीसगढ़) के डीएसपी क्वार्टर में शिफ्ट हो गया।
श्रेया बंसल की टीसी दंतेवाड़ा के शासकीय कॉलेज से निकाल ली गई और उसको जगदलपुर के डिग्री कॉलेज में बीएससी फर्स्ट ईयर में एडमिशन दिलवा दिया गया।
श्रेया कालेज में अपने गर्लफ्रेंड मधु के साथ फुटबाल प्रेक्टिस भी करती थी। इससे गेम्स आफिसर की नजर उसपर पड़ी और वो उससे पूछताछ करने लगे, तो उन्हें पता चला कि श्रेया हायर सेकंडरी स्कूल, दंतेवाड़ा की न केवल सेंटर फारवर्ड थी, वरन् कैप्टन भी रह चुकी थी।
अब, देखते-देखते वो दिन भी आ गया, जिसमें कालेज में ब्यायज और गर्ल्स टीम का चयन किया जाना तय हुआ।
इसके लिए कालेज के सभी ईयर के छात्र-छात्राओं का नाकआउट सिस्टम से ट्रायल मैच रखा गया। इसमें श्रेया और मधु का चयन गर्ल्स टीम में आसानी से हो गया।
चूंकि श्रेया का फुटबॉल परफारमेंस बेहतरीन था, इसीलिए उसको कन्या टीम का कैप्टन बना दिया गया।
अगले दिन एक रोचक ट्रायल मैच प्रेक्टिस और मनोरंजन के लिए सलेक्टेड ब्यायज टीम और गर्ल्स टीम के बीच रखा गया।
मैच को देखने के लिए कालेज के दो पीरियड की छुट्टी कर दी गई। इससे फुटबाल मैदान फुटबालप्रेमियों से खचाखच भर गया। वहां तिल रखने की जगह न थी।
टीम के खिलाड़ियों को देखकर लड़के व लड़कियां अपने-अपने चहेते फुटबालरों का उत्साहवर्धन करने लगे।
निर्धारित समय पर मैच आरंभ हुआ, तो लड़कों ने शुरू में ही एक शानदार मूव बनाया और ब्वायज टीम के कैप्टन अक्षत कुमार ने लड़कियों को छकाते हुए एक खूबसूरत मैदानी गोल दाग दिया।
अब, युवक दूसरे गोल के लिए संघर्ष करने लगे। लेकिन, युवतियां भी कम न थी। उनके सटीक पास से बाल पर उनका सहसा नियंत्रण हो गया।
श्रेया बंसल एक के बाद एक पास करके एक धमाकेदार मैदानी गोल दाग कर खेल में वापसी कर ली और बायां हाथ जोरदार ढंग से झटककर फौलादी इरादा जाहिर कर दी कि लड़कियां, लड़कों से कम नहीं हैं।
डी के अंदर से शानदार गोल पड़ते ही दर्शक भौंचक्क से खड़े हो गए और कहने लगे, ‘‘वाह! श्रेया वाह!! तेरा जवाब नहीं!!!’’
इसके बाद युवक सकते में आ गए और मैच जीतने के लिए प्लान बनाने लगे। उधर प्रिसिंपल, पीटीआई सहित तमाम दर्शक, दर्शकदीर्घा से युवतियों को शाबासी पर शाबासी दिए जा रहे थे।
इससे चिढ़कर युवकों ने फाउल करना आरंभ कर दिया। इसी की देखा-देखी युवतियों ने भी फाउल करने का खतरनाक रास्ता अख्तियार किया।
जब अक्षत कुमार दोबारा बाल लेकर युवतियों के डी में जा घुसा और एक जोरदार गोल मारनेवाला था कि एक सीनियर छात्रा, जो बैकी थी, जिसका नाम श्रद्धा था, उसने उसको गुस्से से जान-बूझ कर लंगी मारकर गिरा दिया। पैर के प्रहार से अक्षत कुमार सिर के बल गिरा और बेहोश हो गया।
रेफरी तत्काल श्रद्धा को रेड कार्ड दिखाकर बाहर का रास्ता दिखाया। दूसरी ओर अक्षत कुमार का डॉक्टरी चेकअप किया जाने लगा।
चूंकि अक्षत कुमार, श्रेया बंसल का क्लासमेट था, इसीलिए वो श्रद्धा पर बरस पड़ी,‘‘आपने जान-समझ कर क्यों लंगी मारी? क्या आपको नहीं मालूम कि ये प्रदर्शन मैच है?’’
इस पर श्रद्धा चिढ़कर सफाई दी,‘‘एक सीनियर के सामने एक जूनियर की ये मजाल कि वो उसके गोलपोस्ट में घुसकर गदर मचाए?’’
‘‘खेल में सीनियर-जूनियर कहां हैं? सब फुटबालर हैं, प्रेक्टिस कर रहे हैं।’’ श्रेया तैश में श्रद्धा को जवाब दी।
इतने में श्रद्धा सीनियारटी का अकड़ दिखाई,‘‘क्या साथ-साथ फुटबाल खेलने से सीनियर-जूनियर का भेद मिट जाता है, जो कुतर्क कर रही है तू?’’
‘‘अरे, इस मैच का हारना-जीतना एक समान है। फिर भी आप अपनी हरकतों से बाज नहीं आईं।’’श्रेया फिर आवेश में बोली।
‘‘ठीक करी मैं अकड़ू के साथ। कभी और मौका मिलेगा, तो उसकी टांगे तोड़कर हाथ में पकड़ा़ दूंगी।’’श्रद्धा शर्मा तमतमाती हुई जवाब दी और पैर पटकती हुई मैदान के बाहर चली गई।
इसके बाद जब मैच आरंभ हुआ, तब युवक, युवतियों पर भारी पड़े और नुमाइशी मैच 2-1 से जीत लिए।
दरअसल, दर्दनाक घटना के बाद श्रेया का मन खिन्न हो उठा था। वो बेमन से अपनी टीम की बचाव भर कर रही थी कि शर्मनाक हार से बची रहे टीम।
भाग-1 पढ़ने के लिए दिल से शुक्रिया। कृपया अच्छी रेटिंग दीजिए। समीक्षा लिखिए। दोस्तों को शेयर भी करिए।
क्या श्रेया बंसल, अक्षत कुमार से मिलने हास्पिटल गई या वह भी अन्य लड़कियों की तरह अपने घर लौट गई। श्रद्धा शर्मा का अक्षत के प्रति खुन्नस कौन-सा रंग दिखाया? जानने के लिए नियमित पढ़ते रहिए रोमांचक धारावाहिक।
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