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A school love story of a boy in 7th class

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Hello everyone, let me introduce you who i am??

तो मेरा नाम है राहुल और मैं हूं 7th class में

सॉरी मैं अभी 12th मै हूं लेकिन मेरी जो कहानी है

वो शुरू होती है 7th class से,

तो मैं 7th class से पहले एक नॉर्मल स्टूडेंट था , एक हस्ता खेलता प्यारा सा बच्चा लेकिन जब मैं 7th class में आया तो मेरे कुछ दोस्त बन गए गोपाल , लालदेव , और भी कई ।

और मेरा वो पहला दिन था स्कूल का और मैं सबसे पीछे बैठा था ,

Because I was a beckbencher.

सब कुछ सही ही चल रहा था , कुछ खास नही हो रहा था। स्कूल की पहली घंटी बहुत boring गई मेरी और वैसी ही सेकंड घंटी , और ये सिलसिला चलता रहा बीच में मैंने एक लड़की को देखा जो की सबसे आगे बैठी थी और सर की फेवरेट स्टूडेंट थी , पर मैंने उस पर ध्यान नहीं दिया । क्योंकि मैं काफी शरीफ़ और संस्कारी स्टूडेंट था , वो बात अलग थी की मैं बैकबेंचर था । और boring सिलसिला चलते चलते lunch time हो गया । अब जो की वो सरकारी स्कूल था इसलिए lunch के बाद मैं और मेरा दोस्त गोपाल स्कूल से भागने का सोचे ।

और lunch के बाद घर चले गए । पर हमे क्या पता था कि अगले दिन watt लगने वाली है । और फिर जब अगले दिन हम स्कूल पहुंचे वही सस्ते लिवाज मे। Pray के बाद हम क्लास में गए, अपनी सीट पर बैठे सब नॉर्मली चल रहा था टीचर आए , एटेंडेंस ली, उसके बाद क्लास मॉनिटर ने एक पेपर sir को दिया , हां वही लड़की जिसपर मैने ध्यान नही दिया था , और अभी भी नहीं दिया । मैं और मेरा दोस्त पीछे बैठ कर मस्ती कर रहे थे । लेकिन हम लोगों को क्या पता था कि उस पेपर में lunch के बाद भागने वाले स्टूडेंट के नाम थे । सर एक एक करके सबका नाम ले रहे थे और सब खरे भी हो रहें थे हमारा नाम भी आया हम भी खरे हुए । हमे कुछ समझ नही आ रहा था की आखिर हों क्या रहा है ??

कुछ समय बाद पता चला की हमलोगो की kutai होने वाली है पर luckily उस दिन हमलोगों की kutai नही हुई और unluckily उस दिन सर ने हमलेगो की बैज़्जती की सारे क्लास के सामने वो भी खरे करके । फिर भी हम हंस रहे थे क्योंकि बेशरामो की तरह हंस रहे थे । अब खूब बैज़्जाती के बाद सर ने पढ़ाना शुरू किया । और हम दोनो(में और गोपाल) ने बैठकर डिसाइड किया कल से आगे बैठंगे। और ये सोचकर पढ़ना स्टार्ट किया। सर क्लास से बाहर चले गए । और कुछ देर बाद हुई lunch time तो उसमे कुछ स्टूडेंट फिर खिड़की से कूदकर भाग गए , तो ये सब देखकर न हमारी नियत थोड़ी सी खराब हो गई हमने सोचा की ये लड़के भी बैज़्जत हुए हम भी बैज़्जात हुए और इन्हे शर्म नही आ रही तो हम क्यों शर्म करे तो हमने भी किताब उठाई और खिड़की से कूदकर भाग गए । लेकिन हम लोग ने डिसाइड किया था कल कल आगे बैठेंगे और हमने किया वही आगे बैठे । तो क्लास में दो मॉनिटर थे एक लड़की में और एक लड़के में और उस दिन हमारी पिटाई हुए । लेकिन कुछ दिन आगे बैठने के बाद boy's मॉनिटर जो की लालदेव था उस से हमारी दोस्ती हो गई । लेकिन हमे फिर भी पिटाई लगती थी क्योंकि उसके लिए दोस्ती अलग जगह थी और moniterpanti अलग जगह । और ऐसे ही दिन बीतते गए । कुछ दिन बाद मैने देखा एक नई लड़की आई क्लास में और सर से बहुत अच्छे से जम रही थी उसकी । तो मैने लालदेव से पूछा भाई तू जानता है इसे ये कोन है?? तो उसने जो बताया उसे सुनकर मैं पूरी तरह shocked हो गया । उसने कहा "बे यही तो मॉनिटर है गर्ल्स की "। मैने कहा ये कैसे हो सकता है ये तो कल स्कूल आई ही है ये मॉनिटर कैसे ?? उसने बोला "अबे गधे ये बहुत पुरानी स्टूडेंट कुछ समय के लिए नानी के यहाँ गई थी " । मैने कहा ठीक है फिर वो लड़की कोन थी जिसे मैं मॉनिटर समझ रहा था । उसने कहा वो उसकी दोस्त है । मैने कहा ठीक हैं फिर ।।।।।

उसके कुछ दिनों बाद जो की हम आगे बैठते थे तो जहा हम बैठते थे वही बगल में वो लड़की बैठती थी । और आप लोग कब सोच रहे होंगे की मैने लड़कियों का नाम क्यों nhi बताया अभी तक।। तो भैया सब्र की घड़ी समाप्त हो गई है ।। एक मेरा दोस्त लालदेव जिसकी पहचान क्लास की लार्कियों से थी , और यही वो नमूना है जो हमे लड़कियों से मिलाए थे, उसने क्लास में जो गर्ल्स की रियल मॉनिटर थी उसे कहा Asma Zara kopy दिखाओ तो।।

मेरा ध्यान उस नाम पर चला गया और मैने उसके नाम पर एक कमेंट किया " Asma वो भी जमीन पर " । लेकिन इस बात का उसको बुरा nhi लगा। फिर ऐसे ही हम बात करतें थे एक दूसरे से हंसी मजाक करते थे और मेरा दोस्त गोपाल जो कोई भी मौका nhi छोड़ता था उसे चिराने या छेरने का ।।

हम अच्छे दोस्त बन गए ..

और धीरे धीरे हमारा exam नजदीक आ गया पर मुझे कोई टेंशन nhi था क्योंकि मैं पढ़ने में ठीक ठाक स्टूडेंट था ।।

पर मुझे कलम तोड़ना बहुत पसंद था और मैं सैतानिया भी बहुत करता था , मेरे घर में एक पेड़ था कांटे वाला मैं उनमें से एक कांटा तोड़कर लाता था और किसी के भी सीट के नीचे रख देता उसके बाद का मजा आप सब लोग जानते है।। और बेचारा गोपाल मैने उसके सीट के नीचे भी कांटा रखा था और वैसे भी वो दोस्त ही क्या जो कामिने न हो ..

मैने सबसे ज्यादा कलम उसके ही तोड़े थे स्कूल टाइम मे , इतने की वो आज भी मुझे कलम देने से डरता है । एक week मे मैं उसके पांच से ज्यादा कलम तोड़ देता था। फिर भी मैं उसका बेस्ट फ्रेंड था। और एक दिन ऐसे ही मैने asma की फ्रेंड की कलम तोड़ दी । और वो मुझ पर काफी गुस्सा भी हुई । पर मुझे उस वक्त क्या पता था की ये गुस्सा और गुस्सा करने वाली लड़की मुझे आगे भी झेलनी पड़ेगी। Ha ये वही लड़की जिसे मैं प्यार करता हूं ।।।

आगे की कहानी बताएंगे आपको ....

तब तक के लिए bye.…...

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A boy love story part 1❤️❤️❤️
Hello everyone, let me introduce you who i am?? तो मेरा नाम है राहुल और मैं हूं 7th class में सॉरी मैं अभी 12th मै हूं लेकिन मेरी जो कहानी है वो शुरू होती है 7th class से, तो मैं 7th class से पहले एक नॉर्मल स्टूडेंट था , एक हस्ता खेलता प्यारा सा बच्चा लेकिन जब मैं 7th class में आया तो मेरे कुछ दोस्त बन गए गोपाल , लालदेव , और भी कई । और मेरा वो पहला दिन था स्कूल का और मैं सबसे पीछे बैठा था , Because I was a beckbencher. सब कुछ सही ही चल रहा था , कुछ खास नही हो रहा था। स्कूल की पहली घंटी बहुत boring गई मेरी और वैसी ही सेकंड घंटी , और ये सिलसिला चलता रहा बीच में मैंने एक लड़की को देखा जो की सबसे आगे बैठी थी और सर की फेवरेट स्टूडेंट थी , पर मैंने उस पर ध्यान नहीं दिया । क्योंकि मैं काफी शरीफ़ और संस्कारी स्टूडेंट था , वो बात अलग थी की मैं बैकबेंचर था । और boring सिलसिला चलते चलते lunch time हो गया । अब जो की वो सरकारी स्कूल था इसलिए lunch के बाद मैं और मेरा दोस्त गोपाल स्कूल से भागने का सोचे । और lunch के बाद घर चले गए । पर हमे क्या पता था कि अगले दिन watt लगने वाली है । और फिर जब अगले दिन हम स्कूल पहुंचे वही सस्ते लिवाज मे। Pray के बाद हम क्लास में गए, अपनी सीट पर बैठे सब नॉर्मली चल रहा था टीचर आए , एटेंडेंस ली, उसके बाद क्लास मॉनिटर ने एक पेपर sir को दिया , हां वही लड़की जिसपर मैने ध्यान नही दिया था , और अभी भी नहीं दिया । मैं और मेरा दोस्त पीछे बैठ कर मस्ती कर रहे थे । लेकिन हम लोगों को क्या पता था कि उस पेपर में lunch के बाद भागने वाले स्टूडेंट के नाम थे । सर एक एक करके सबका नाम ले रहे थे और सब खरे भी हो रहें थे हमारा नाम भी आया हम भी खरे हुए । हमे कुछ समझ नही आ रहा था की आखिर हों क्या रहा है ?? कुछ समय बाद पता चला की हमलोगो की kutai होने वाली है पर luckily उस दिन हमलोगों की kutai नही हुई और unluckily उस दिन सर ने हमलेगो की बैज़्जती की सारे क्लास के सामने वो भी खरे करके । फिर भी हम हंस रहे थे क्योंकि बेशरामो की तरह हंस रहे थे । अब खूब बैज़्जाती के बाद सर ने पढ़ाना शुरू किया । और हम दोनो(में और गोपाल) ने बैठकर डिसाइड किया कल से आगे बैठंगे। और ये सोचकर पढ़ना स्टार्ट किया। सर क्लास से बाहर चले गए । और कुछ देर बाद हुई lunch time तो उसमे कुछ स्टूडेंट फिर खिड़की से कूदकर भाग गए , तो ये सब देखकर न हमारी नियत थोड़ी सी खराब हो गई हमने सोचा की ये लड़के भी बैज़्जत हुए हम भी बैज़्जात हुए और इन्हे शर्म नही आ रही तो हम क्यों शर्म करे तो हमने भी किताब उठाई और खिड़की से कूदकर भाग गए । लेकिन हम लोग ने डिसाइड किया था कल कल आगे बैठेंगे और हमने किया वही आगे बैठे । तो क्लास में दो मॉनिटर थे एक लड़की में और एक लड़के में और उस दिन हमारी पिटाई हुए । लेकिन कुछ दिन आगे बैठने के बाद boy's मॉनिटर जो की लालदेव था उस से हमारी दोस्ती हो गई । लेकिन हमे फिर भी पिटाई लगती थी क्योंकि उसके लिए दोस्ती अलग जगह थी और moniterpanti अलग जगह । और ऐसे ही दिन बीतते गए । कुछ दिन बाद मैने देखा एक नई लड़की आई क्लास में और सर से बहुत अच्छे से जम रही थी उसकी । तो मैने लालदेव से पूछा भाई तू जानता है इसे ये कोन है?? तो उसने जो बताया उसे सुनकर मैं पूरी तरह shocked हो गया । उसने कहा "बे यही तो मॉनिटर है गर्ल्स की "। मैने कहा ये कैसे हो सकता है ये तो कल स्कूल आई ही है ये मॉनिटर कैसे ?? उसने बोला "अबे गधे ये बहुत पुरानी स्टूडेंट कुछ समय के लिए नानी के यहाँ गई थी " । मैने कहा ठीक है फिर वो लड़की कोन थी जिसे मैं मॉनिटर समझ रहा था । उसने कहा वो उसकी दोस्त है । मैने कहा ठीक हैं फिर ।।।।। उसके कुछ दिनों बाद जो की हम आगे बैठते थे तो जहा हम बैठते थे वही बगल में वो लड़की बैठती थी । और आप लोग कब सोच रहे होंगे की मैने लड़कियों का नाम क्यों nhi बताया अभी तक।। तो भैया सब्र की घड़ी समाप्त हो गई है ।। एक मेरा दोस्त लालदेव जिसकी पहचान क्लास की लार्कियों से थी , और यही वो नमूना है जो हमे लड़कियों से मिलाए थे, उसने क्लास में जो गर्ल्स की रियल मॉनिटर थी उसे कहा Asma Zara kopy दिखाओ तो।। मेरा ध्यान उस नाम पर चला गया और मैने उसके नाम पर एक कमेंट किया " Asma वो भी जमीन पर " । लेकिन इस बात का उसको बुरा nhi लगा। फिर ऐसे ही हम बात करतें थे एक दूसरे से हंसी मजाक करते थे और मेरा दोस्त गोपाल जो कोई भी मौका nhi छोड़ता था उसे चिराने या छेरने का ।। हम अच्छे दोस्त बन गए .. और धीरे धीरे हमारा exam नजदीक आ गया पर मुझे कोई टेंशन nhi था क्योंकि मैं पढ़ने में ठीक ठाक स्टूडेंट था ।। पर मुझे कलम तोड़ना बहुत पसंद था और मैं सैतानिया भी बहुत करता था , मेरे घर में एक पेड़ था कांटे वाला मैं उनमें से एक कांटा तोड़कर लाता था और किसी के भी सीट के नीचे रख देता उसके बाद का मजा आप सब लोग जानते है।। और बेचारा गोपाल मैने उसके सीट के नीचे भी कांटा रखा था और वैसे भी वो दोस्त ही क्या जो कामिने न हो .. मैने सबसे ज्यादा कलम उसके ही तोड़े थे स्कूल टाइम मे , इतने की वो आज भी मुझे कलम देने से डरता है । एक week मे मैं उसके पांच से ज्यादा कलम तोड़ देता था। फिर भी मैं उसका बेस्ट फ्रेंड था। और एक दिन ऐसे ही मैने asma की फ्रेंड की कलम तोड़ दी । और वो मुझ पर काफी गुस्सा भी हुई । पर मुझे उस वक्त क्या पता था की ये गुस्सा और गुस्सा करने वाली लड़की मुझे आगे भी झेलनी पड़ेगी। Ha ये वही लड़की जिसे मैं प्यार करता हूं ।।। आगे की कहानी बताएंगे आपको .... तब तक के लिए bye.…...

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