नितारा का रंधवा मेंशन जाना!
नितारा का रंधवा मेंशन जाना
दाई मा ने नितारा का सारा सामान पैक किया और नितारा चल पड़ी अवंतिका के साथ ।
पर वह जाते-जाते पीछे मुड़कर अपने पापा को देख रही थी, जिन्होंने उसे एक शब्द भी नहीं बोला। पर उनकी नजर अपनी जा रही बेटी पर ही थी।
अवंतिका के साथ आए ड्राइवर ने उनके हाथ से सारा सामान लिया । वही वह दोनों पीछे की सीट पर बैठ गई ।
गोलू बेटा अपना ध्यान रखना और........
दाय मा की बात आगे बढ़कर वो बोली :....
"हां पता है मैनु वहां किसी को परेशान नहीं करना और ना ही कोई शैतानी करनी.......मुझे वहां एक अच्छे बच्चे की तरह रहना है । दाय मा आप यह बात कितनी बार बोल चुकी हो "!.......
नितारा को ऐसा बोलता देख वह मुस्कुरा बिना नहीं रह पाई ।
वही अवंतिका बार-बार अपनी घड़ी में और साथ ही फोन में देख रही थी : ड्राइवर कितनी देर है।
जी आया मैडम ,,,,,,,वह आया और जल्दी से ड्राइविंग सीट पर बैठ गया ।
"ओके दाई मा बाद में मिलती हूं आपसे और अपना ध्यान रखिएगा और गोलियां भी टाइम पर लीजिएगा। जब मैं आपसे मिलूगी ना तो आपके शरीर में जान होनी चाहिए "........
नितारा ने बड़ी ही मासूमियत से अपनी बात कह डाली ।
दाई मां की आंखों में नमी उतर आई, वह अब थोड़े पीछे हो गई । और गाड़ी वहां से जाने लगी ।
एक नितारा ही है जो उनकी बहुत पास और नजदीक थी , अब उसे दूर होता देख वह रो पड़ी।
कार में नितारा ने अपने मां के तरफ देख :
"मां आ आप अभी भी उनके साथ रहती हो मतलब क्या आप अभी भी उन लोगों के साथ ही है ।
अगर है तो वह लोग मुझे पसंद नहीं करते ....पता नहीं क्यों उन मे से कोई मुझ से ठीक से बात नहीं करता वहां ........सिवाय ममता ममा और मिशा के और आप भी वहां जाते ही मुझ पर जरा भी ध्यान नहीं देते। आपका पूरा ध्यान तो उस समक्ष भैया और वायु पर ही होता है जो मुझे बिल्कुल भी अच्छी नहीं लग"............
" बस करो नितारा जब भी बोलना शुरू करती हो रुकने का नाम ही नहीं लेती"........अवंतिका जी के ऐसे भड़क जाने से वह चुप हो गई और
उनकी और देखने लगी।
अवंतिका जी उसे देख आगे बोली : उनके ही घर जाने वाली हो और उन्हें ही बुरा बोल रही हो,,,,,कुछ शर्म वर्म बच्ची तुम्हारे अंदर ,,,,,क्या वह भी शैतानी में भूल गई ।....
"पर ममा मैंने सिर्फ वायु को ही बोला है । वह बार-बार मेरे सामने आपको चिपक कर रहती है। जो कि मुझे नहीं अच्छा लगता और उसके पापा भी मुझे गुस्से से घूरते रहते हैं । जैसे कोई मैंने चोरी की".........
"अगर एक और शब्द निकला अपने मुंह से तो बाहर फेंक दूंगी ".......अवंतिका लगभग उस पर चिल्लाते हुए बोली।
नितारा जल्दी से अपना सर नीचे कर रोने लगी। अब इस वक्त उसे अपनी दाई मा याद आ रही थी।
उन दोनों को दूर हुए ज्यादा टाइम भी नहीं हुआ , पर एक दूसरे से वह इस कदर जुड़ चुकी थी , कि अब उन्हें सब खाली-खाली सा लग रहा था ।
आगे बैठे ड्राइवर को भी उसे मासूम जी बच्ची के लिए बुरा लगा , पर वह भी क्या कर सकता था, सिर्फ सुनने और देखने के अलावा !
एक घंटे बाद वह कार एक बंगलो के आगे आकर रुकी । ड्राइवर जल्दी कार से उतरा और पीछे का दरवाजा खोला।
कुछ ही देर बाद दोनों बड़े से दरवाजे की चौखट पर खड़ी थी ।
तभी हॉल में नितारा की उम्र की लड़की दौड़ते हुए दिखी और उसके पीछे वह महिला जो उस लड़की की मां है ।
"मिशा यह बहुत गलत है , आने तो तुम्हारे डेड को, उन्हें बता दूंगी कि आज तुमने पूरे दिन कुछ नहीं खाया ".......वह महिला उस लड़की को घूरते हुए बोली।
तभी वह लड़की कुछ बोलने को हुई थी कि उसकी नजर दरवाजे पर चली गई ।
"नीतू .......ममा देखिए कौन आया है "?.....उसने अपनी मां को इशारा किया और खुद भाग नितारा के पास चली आई और झट से उसकी गले लग गई ।
नीतारा ने भी उसे कसकर थाम लिया ।
नीतू मैंने तुम्हें बहुत मिस किया.......
मिशु मैंने भी तुम्हें बहुत मिस किया ........
वह महिला भी मुस्कुराकर वहां आ गई :"दीदी आप नितारा को भी लाई , अच्छा हुआ मिशा अब तु खाना खाएंगी ना , क्योंकि इस वक्त तुम्हारी बेस्ट फ्रेंड और मेरे गोलू भी आ गई । क्यु गोलू अपनी ममता मां से नहीं मिलेगी ।".......
नितारा मिशा से दूर होकर , उसका हाथ पकड़ कर ममता जी के पास आई :
"मैंने भी अपनी ममता मां को बहुत मिस किया । साथ ही आपके टेस्टी खाने को , क्या आप मेरे लिए भी कुछ लाएगी खाने के लिए , मुझे भी बहुत भूख लगी है ।".....
नितारा यह क्या हरकतें , तुमने वहा खाया था ना, इतना बार-बार खाते रहोगी तो वजन बढ़ जाएगा.... अवंतिका जी चिडते हुए बोली।
"दीदी यह आप क्या बोल रही हो और बच्चों चलो तुम दोनों को खाना खिलाती हु ".......ममता जी के कहते ही दोनों उनके पीछे से चली गई।
अवंतिका जी का नितारा के साथ ऐसा बर्ताव करता देख उन्हें अच्छा नहीं लगा । पर इस समय दोनों बच्चियों उनके सामने थी , इसलिए उन्होंने ज्यादा कुछ नहीं कहा ।
दिन यूं ही निकल गया और शाम के 5:00 बज रहे थे ।
नौकर से चाय का कहकर ममता जी सभी को बुलाने गई , क्योंकि आज घर के पुरुष भी अपने काम से जल्दी आ गए थे ।
जब वह अवंतिका जी के कमरे के अंदर जाने लगी, तभी ममता जी को अपनी जेठानी की आवाज सुनाई दी।
"मुझे पता है आप गुस्सा हो मेरे इस फैसले से , और होना भी चाहिए , पर सिर्फ दो महीने की बात है । नितारा फिर से राहुल के पास चली जाएगी ।".
तभी गुस्से से भरी तेज आवाज पूरे कमरे में गूंजी: "उसके बाद क्या फिर 2 महीने तुम्हारी वह नाजायज बच्ची इस घर में रहेगी , उसका क्या? जब मैंने तुमसे शादी के बात कही थी तभी तुमने वादा किया कि मेरे समक्ष और वायु को अपना प्यार दोगी, पर अब तुम अपने किए वादे से मुकर रही हो । "........
ममता जी आगे और कुछ नहीं सुनना चाहती थी । उन्होंने अपने कदम पीछे लिए ।
"अरे वाह मेरी सोनिए आज तो बड़ी सोनी लग रही है , बिल्कुल रांझे की हीर की तरह"....उस आवाज को सुन ममता जी हैरानी के साथ पीछे पलटी।
क्या आप भी कैसी बातें करते हैं .....वह थोड़ी शर्माते हुए बोली।
सोनीए क्या हुआ है ?....उस आदमी ने सवाल किया।
इस वक्त उनके ठीक सामने हरणजीत रंधावा यानी उनके पति खड़े थे ।
हरण जीत उनके नजदीक पर थोड़ी दूरी बनाएं किए: "कि हुआ मेरी जान को , जो चेहरा उतरा हुआ है? "....
"क्या होगा मैनु? आज नितारा आई हुई है बस सोच रही थी की , वह वायु के साथ कोई झगड़ा ना करें । नहीं तो भाई साहब अपना गुस्सा उस बीचारी पर उतारेंगे ।
माना वह थोड़ी शैतानी करती है , इसका यह तो नहीं ना कि हम अपनी कायदे भूल जाए । पिछली बार हाथ उठाते उठाते रह गए "....
ममता जी की बात सुनकर हरण रंजीत किसी सोच में गुम हो गए ।
क्या हुआ आप किथे खो गए ?....ममता जी ने पूछा।
"बस यही की भाभी के जाने के बाद नवजीत वीर जी वायु और समक्ष को लेकर चिंतित हो गए थे। सभी उन्हें दूसरी शादी करने को बोल रहे थे , पर उनके मन में भाभी की छवि इतनी गहराई छोड़ गई कि वह तैयारी नहीं थे
और करनी भी होगी तो उस लड़की को उनके बच्चों को अपनी खुद के बच्चों जैसे संभालना और वही ममता भरा प्रेम देना होगा "!....
फिर एक निश्चित सास छोड़ते हुए:
वैसे भी नितारा थोड़ी ही ज्यादा दिन रुकने वाली है ।....
दिन नहीं 2 महीने तक यही है वह .....
क्या ..यह की बोल रही है तू ?.....हरण रंजीत हैरानी से भरी आवाज में बोले ! तो ममता जी ने बस अपनी गर्दन हिलाई ।
कुछ समय बाद सब परिवार वाले नीचे हॉल में बैठकर चाय पी रहे थे ।
कि हुआ नवजीत बड़ा उखड़ा उखड़ा दिख रहे हो?.....सोफे बैठे बुजुर्ग आदमी ने पूछा जो हरण रंजीत और नवजीत रंधावा के पापा जी बलवंत जी थे।
उनके बगल में उनकी पत्नी गुरुलिन रंधावा चाय पी रही थी।
दूसरे सोफे पर दोनों भाई बैठे हुए और तीसरे सोफे पर अवंतिका और ममता जी बैठी हुई थी ।
नवजीत निराशा से :"मेनू लगता है अब हम लोगों को यहां से जाना चाहिए। "....
बलवंत जी ने गौर से उनके चहरे को देख :पुत्तर जो भी तेनु कहना है साफ कह ऐसे घुमा फिरा कर बात मत कर!.....
इसपर हरंजीत बोले :
"पापा जी वीर जी के कहने का मतलब है कि हम लोगों को चंडीगढ़ वापस जाना चाहिए और मीनू भी यही सही लगता है । आजकल हमारा काम इतने अच्छे से नहीं चल रहा । "....
hello everyone this is my first novel story for story writing aap