bc

YOU'RE ONLY MINE

book_age18+
0
FOLLOW
1K
READ
forbidden
age gap
forced
curse
drama
mythology
enimies to lovers
like
intro-logo
Blurb

अध्याय 1 — नीलामीगायू शर्मा हमेशा जानती थी कि उसका सौतेला बाप एक राक्षस है।लेकिन उसे यह कभी नहीं लगा था कि वह उसे सेकंड-हैंड फ्रिज की तरह बेच देगा।कमरे में सिगार, पसीने और गंदे पैसों की बदबू भरी थी।ऊपर झूमर चमक रहे थे, और नीचे खड़े थे शैतान — डिजाइनर सूट में, सोने की अंगूठियाँ पहने, चेहरे पर टेढ़ी मुस्कान लिए।गायू एक छोटे से स्टेज पर खड़ी थी।नंगे पैर।सफेद सादी सी कुर्ती में।उसके हाथ पीछे बँधे थे।बहुत कसकर नहीं।बस इतना कि वह भाग न सके।उसका दिल इतनी तेज़ धड़क रहा था कि उसे डर था — कहीं ये लोग उसकी धड़कन की बोली न लगा दें।“अगली आइटम…”माइक से एक भारी आवाज़ गूँजी।“इक्कीस साल की।कुँवारी।आज्ञाकारी।”गायू की आँखों में आँसू तैर आए।“नाम?” किसी ने चिल्लाकर पूछा।“गायू शर्मा,” दलाल बोला।“दिल्ली से।”नीचे बैठे आदमी हँस पड़े।“नाम तो बड़ा क्यूट है,”किसी ने कहा।“पर फेस और बॉडी उससे भी ज़्यादा।”गायू ने दाँत भींच लिए।अगर नज़रें मार सकतीं, तो आधा हॉल मर चुका होता।“शुरुआती बोली — पचास लाख।”एक हाथ उठा।“साठ।”दूसरा हाथ।“अस्सी।”“एक करोड़।”गायू के कानों में सीटी सी बजने लगी।एक करोड़…दो करोड़…तीन करोड़…वह कोई लड़की नहीं रह गई थी।वह एक प्रॉपर्टी बन चुकी थी।तभी दरवाज़ा खुला।और पूरा हॉल चुप हो गया।जैसे मौत ने एंट्री ली हो।काले सूट में एक आदमी अंदर आया।लंबा।चौड़े कंधे।आँखें इतनी ठंडी कि उनमें इंसानियत का नामोनिशान नहीं था।उसकी चाल में अहंकार नहीं था।कंट्रोल था।हर कदम ऐसा लग रहा था जैसे फर्श उसका हो।दलाल घबरा गया।“स…सर,”वह हकलाया।“आप आएंगे, ये पता नहीं था।”आदमी ने एक नज़र भी स्टेज पर खड़ी लड़की पर नहीं डाली।सीधा बोला,“नीलामी रोक दो।”पूरा हॉल सिहर उठा।“लेकिन सर—”उसने बस उँगली उठाई।दलाल चुप हो गया।“यह लड़की मेरी है,”आदमी ने ठंडे स्वर में कहा।किसी ने हिम्मत करके पूछा,“आप बोली कितनी लगाएँगे?”आदमी ने पहली बार स्टेज की तरफ देखा।गायू की आँखें उससे टकराईं।और उसे ऐसा लगा जैसे उसकी आत्मा नंगी हो गई हो।उसकी आँखों में कोई वासना नहीं थी।कोई दया नहीं थी।बस मालिकाना हक़ था।“जितनी माँगो,”वह बोला।पूरा हॉल सन्न।दलाल की आवाज़ काँपने लगी।“प…पाँच करोड़?”“ठीक है।”“दस?”“ठीक है।”“बीस—”“ठीक है।”अब लोग बड़बड़ाने लगे।“ये आदमी पागल है?”“ये है कौन?”दलाल पसीने से भीग गया।“सर… आख़िरी कीमत… पचास करोड़।”आदमी ने जेब से कार्ड निकाला।मेज़ पर फेंका।“कट कर लो।”गायू के घुटने काँप गए।पचास करोड़।उसकी पूरी ज़िंदगी की कीमत।आदमी स्टेज की तरफ बढ़ा।पहली बार उसके चेहरे पर हल्की सी मुस्कान आई।डरावनी मुस्कान।उसने गायू की ठुड्डी दो उँगलियों से उठाई।“अब तुम मेरी हो,”वह बोला।गायू ने काँपती आवाज़ में कहा,“मैं इंसान हूँ… कोई चीज़ नहीं।”वह हँसा।धीमी, ठंडी हँसी।“मेरे लिए दोनों एक जैसे हैं।”उसने अपने आदमी को इशारा किया।“इसे मेरी गाड़ी में डालो।”गायू चीख़ी।“मुझे छोड़ दो!”उसने झुककर उसके कान में कहा —“भागने की कोशिश की…”उसकी आवाज़ फुसफुसाहट थी।पर मतलब मौत।“तो तुम्हारा सौतेला बाप सबसे पहले मरेगा।”गायू चुप हो गई।आँसू उसकी पलकों से गिरते रहे।आदमी सीधा हुआ।“मेरा नाम वेदांत मल्होत्रा है,”वह बोला।“और आज से…”उसकी उँगली उसके दिल पर ठहरी।“तुम मेरी प्रॉपर्टी हो।”---😈🖤 **TO BE CONTINUED…**

chap-preview
Free preview
अध्याय 1 — नीलामी
गायू शर्मा हमेशा जानती थी कि उसका सौतेला बाप एक राक्षस है। लेकिन उसे यह कभी नहीं लगा था कि वह उसे सेकंड-हैंड फ्रिज की तरह बेच देगा। कमरे में सिगार, पसीने और गंदे पैसों की बदबू भरी थी। ऊपर झूमर चमक रहे थे, और नीचे खड़े थे शैतान — डिजाइनर सूट में, सोने की अंगूठियाँ पहने, चेहरे पर टेढ़ी मुस्कान लिए। गायू एक छोटे से स्टेज पर खड़ी थी। नंगे पैर। सफेद सादी सी कुर्ती में। उसके हाथ पीछे बँधे थे। बहुत कसकर नहीं। बस इतना कि वह भाग न सके। उसका दिल इतनी तेज़ धड़क रहा था कि उसे डर था — कहीं ये लोग उसकी धड़कन की बोली न लगा दें। “अगली आइटम…” माइक से एक भारी आवाज़ गूँजी। “इक्कीस साल की। कुँवारी। आज्ञाकारी।” गायू की आँखों में आँसू तैर आए। “नाम?” किसी ने चिल्लाकर पूछा। “गायू शर्मा,” दलाल बोला। “दिल्ली से।” नीचे बैठे आदमी हँस पड़े। “नाम तो बड़ा क्यूट है,” किसी ने कहा। “पर फेस और बॉडी उससे भी ज़्यादा।” गायू ने दाँत भींच लिए। अगर नज़रें मार सकतीं, तो आधा हॉल मर चुका होता। “शुरुआती बोली — पचास लाख।” एक हाथ उठा। “साठ।” दूसरा हाथ। “अस्सी।” “एक करोड़।” गायू के कानों में सीटी सी बजने लगी। एक करोड़… दो करोड़… तीन करोड़… वह कोई लड़की नहीं रह गई थी। वह एक प्रॉपर्टी बन चुकी थी। तभी दरवाज़ा खुला। और पूरा हॉल चुप हो गया। जैसे मौत ने एंट्री ली हो। काले सूट में एक आदमी अंदर आया। लंबा। चौड़े कंधे। आँखें इतनी ठंडी कि उनमें इंसानियत का नामोनिशान नहीं था। उसकी चाल में अहंकार नहीं था। कंट्रोल था। हर कदम ऐसा लग रहा था जैसे फर्श उसका हो। दलाल घबरा गया। “स…सर,” वह हकलाया। “आप आएंगे, ये पता नहीं था।” आदमी ने एक नज़र भी स्टेज पर खड़ी लड़की पर नहीं डाली। सीधा बोला, “नीलामी रोक दो।” पूरा हॉल सिहर उठा। “लेकिन सर—” उसने बस उँगली उठाई। दलाल चुप हो गया। “यह लड़की मेरी है,” आदमी ने ठंडे स्वर में कहा। किसी ने हिम्मत करके पूछा, “आप बोली कितनी लगाएँगे?” आदमी ने पहली बार स्टेज की तरफ देखा। गायू की आँखें उससे टकराईं। और उसे ऐसा लगा जैसे उसकी आत्मा नंगी हो गई हो। उसकी आँखों में कोई वासना नहीं थी। कोई दया नहीं थी। बस मालिकाना हक़ था। “जितनी माँगो,” वह बोला। पूरा हॉल सन्न। दलाल की आवाज़ काँपने लगी। “प…पाँच करोड़?” “ठीक है।” “दस?” “ठीक है।” “बीस—” “ठीक है।” अब लोग बड़बड़ाने लगे। “ये आदमी पागल है?” “ये है कौन?” दलाल पसीने से भीग गया। “सर… आख़िरी कीमत… पचास करोड़।” आदमी ने जेब से कार्ड निकाला। मेज़ पर फेंका। “कट कर लो।” गायू के घुटने काँप गए। पचास करोड़। उसकी पूरी ज़िंदगी की कीमत। आदमी स्टेज की तरफ बढ़ा। पहली बार उसके चेहरे पर हल्की सी मुस्कान आई। डरावनी मुस्कान। उसने गायू की ठुड्डी दो उँगलियों से उठाई। “अब तुम मेरी हो,” वह बोला। गायू ने काँपती आवाज़ में कहा, “मैं इंसान हूँ… कोई चीज़ नहीं।” वह हँसा। धीमी, ठंडी हँसी। “मेरे लिए दोनों एक जैसे हैं।” उसने अपने आदमी को इशारा किया। “इसे मेरी गाड़ी में डालो।” गायू चीख़ी। “मुझे छोड़ दो!” उसने झुककर उसके कान में कहा — “भागने की कोशिश की…” उसकी आवाज़ फुसफुसाहट थी। पर मतलब मौत। “तो तुम्हारा सौतेला बाप सबसे पहले मरेगा।” गायू चुप हो गई। आँसू उसकी पलकों से गिरते रहे। आदमी सीधा हुआ। “मेरा नाम वेदांत मल्होत्रा है,” वह बोला। “और आज से…” उसकी उँगली उसके दिल पर ठहरी। “तुम मेरी प्रॉपर्टी हो।” --- 😈🖤 **TO BE CONTINUED…**

editor-pick
Dreame-Editor's pick

bc

His Unavailable Wife: Sir, You've Lost Me

read
10.9K
bc

The Luna He Rejected (Extended version)

read
617.9K
bc

Claimed by my Brother’s Best Friends

read
822.7K
bc

Secretly Rejected My Alpha Mate

read
36.2K
bc

The Lone Alpha

read
125.7K
bc

Bad Boy Biker

read
8.8K
bc

The CEO'S Plaything

read
19.6K

Scan code to download app

download_iosApp Store
google icon
Google Play
Facebook