
बहुत समय पहले की बात है, एक गांव था जिसका नाम रामनगर था। उसे गांव में सदन अपने परिवार के साथ रहता था। उसके जन्म लेते ही उसकी मां गुजर गई, फिर वह अपने पिता के साथ रहने लगा उसके पिता टोकरी बनाने का काम करते थे। उसके पिता ने सदन को टोकरी बनाना सिखाए, क्योंकि सदन उनके काम में हाथ बटाएं, फिर उसके पिता ने उसे टोकरी बनाना सिखाएं। जब वह सीख गया तब, वह दोनों अपने काम को बढ़ाएं, दिन प्रतिदिन उनके मेहनत ने रंग लाई , एक दिन सदन के पिता साईकिल पर सवार टोकरी बेचने निकले, रास्ते पर जाते वक्त उनका एक्सीडेंट हो गया, पूरी रात सदन उसके पिता की प्रतीक्षा करता रहा , पर बतकईसमतई से वह नहीं आये , अगले ही दिन वह उसके पिता की तलाश में निकल पड़ा , रास्ते में उसके पिता बेहोश हालत में मिले,वह अपने पिता को जल्दी से अस्पताल में लेकर गया, सौभाग्य से उसके पिता बच गए, पर उनका हाथ खराब हो गया, सारी जमा पूंजी खत्म हो गई सदन के पिता के ईलाज में , सदन के पिता को याद आया की
Prashans

