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नमस्ते दोस्तों मे अंकुर त्यागी मेरी पहली कहानी एक सपना वो भी अधुरा ! है इस कहानी मे एक परिवार के सपने को पूरा करने की कोशिश

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मे अपने घर से निकलीं ही थी की मूझे एक आवाज आती है मुझे वो आवाज जानी पहचानी सी लगती है वो आवाज मेरी बहन की थी वो वहन जो एक साल पहले मर गई थी मुझे लगता है कि मेरी बहन अभी जिंदा हे जब मेरी बहन मरी थी तो हमें उसकी लाश भी नहीं मिली थी उस बजह से मुझे लगा मेरी बहन अभी जिंदा हे चलो छोड़ो उस कि बातों को मे लेकर चलता हूँ आपको अपने घर मेरे घर मे मै और मेरी बूढ़ी माँ ही है हमें जो आस थी वो थी अपनी बहन की वो भी भगवन ने उसे उप्पर बुला लिया रह गई मे मे भी एक लड़की क्या करुँ कुछ कर भी नहीं सकती एक लड़की क्या कर सकती हे बताओ समाज का डर और अपना घर मेरे बाद् माँ का क्या होगा ये सब सोच कर पागल हो जाती हूँ मेरा भी मन करता हे की शहर जाऊ और मज़े करुँ और लड़कियों की तरह पर क्या करुँ माँ हे वो भी बूढ़ी हे जो कुछ कर नहीं सकती मे ही हूँ जो भी हूँ एक दिन मैंने सोचा था की शहर हो आऊं और मे चल दी पर आधे रास्ते ही पहुची थी मुझे माँ की याद आ गई मेरे बाद् माँ का क्या होगा मे बापस आ गई मे अपने माँ से बहुत प्यार भी करती थी एक दिन मेरी माँ की तबीयत

बहुत ज्यादा ख़राब हो गई और मे घावरा गई की मेरा क्या होगा मे कहा जाउंगी अगर माँ को कुछ हो गया तो समाज मुझे जीने भी नहीं देगा मे ये सब सोच कर रोने लगी और बहन को याद करने लगी अगर वो जिंदा होती तो हमें ये दिन देखने नहीं पड़ते हम शहर मे होते और मे भी कुछ कर रही होती /आगे-

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वैसे मे कोई लेखक तो नहीं हूँ पर आज मे सोच रहा था क्यों ना मे भी एक कहानी लिखूँ तो मैंने उठाई अपनी कलम और लिख दी ये कहानी अपनी
मेरे साथ ये होना ही था जो कुदरत ने बनाया हे वो एक ना एक दिन जाएगा मे ये सब सोच कर चुप हो गई और काम पे लग गई और मेरी माँ की तबीयत बहुत ही खराब होती जा रही थी एक दिन माँ भी मर गई उस दिन मे माँ और बहन दोनों को याद करके बहुत रोइ पर क्या करती जिसको जाना था वो भी चलें गए मे एक दम अनाथ हो गई मेरा कोई भी नहीं था मे अपने चाचा के यहाँ चली गई मुझे वहां कुछ दिन रखा जब तक रखा जब तक मेरी माँ की तेरहवी ना हो गई क्योंकि उन्हें भी सामाज का डर था इस लिए इन्होने मुझे रखा और तेरहवी होने के बाद् मुझे धका दे कर घर से बहार निकाल् दिया और मेरा घर भी कब्ज़ा लिया और मुझे बदचलन बता कर सामाज मे पिटवाया अगर मेरे पास मेरी माँ और बहन होती तो मे भी कितनी खुश होती ये सब सोचती हुई मे गाँव से निकाल आई और शहर की और चल दी मुझे कुछ भी मालूम नहीं था की शहर में क्या होगा मे शहर की और चलती जा रही थी ना मेरे पास पैसे थे और ना कपड़े मे भिखारी की तरह जा रही थी मेरे कपड़े भी पिटाई से फट् गए थे मे बे शुद्द चलें जा रही थी और मे बस ये सोच रही थी की अगर मे माँ को साथ लेकर पहले आ जाती तो ये दिन देखने ना पड़ते और मेरी माँ बीमारी से ना मरती मे अपने कदम बढाये जा रही थी पर मैंने ये भी नहीं सोचा कि तू शहर मे जा कर कहा रहेगी तब तक में ये सब सोचती जब तक मे शहर आ गई थी और शहर मे आ कर मे बहुत रोइ माँ और बहन को याद करके मेरा शहर आना जब मे शहर पहुची तो वहा का माहौल देखने मे मुझे ज्यादा बक्त ना लगा और मे शहर मै काम खोजने लगी मे एक घर मे चली गई वहा के मालिक बहुत अच्छे थे मैंने वहा चूल्हा चोकर का काम कर लिया मुझे घर भी चाहिए था और खाना भी मैंने इस कारण ये काम अच्छा समझा और ये काम करने लग गयी और मे मन लगा कर वो काम करने लगी और मुझे वहा सारिका दिखाई दी जो मेरे बचपन की सहेली थी वो बहुत अच्छे कपड़े पहने घूम रही थी मे उस को देख कर बहुत खुश हुई पर उस ने मुझे देखा भी नहीं था मैंने सोचा पहले अपना काम कर लेती हूँ और बाद् मे मिल लुंगी और काम मे लग गई जब तक मेरा काम निपटा तब तक वो चली गई थी मे उसे खोजने के लिए निकल गई और अपने मालिक से दस दिन की छुट्टी भी ले ली और मे कितनी पागल थी मूझे ये मालूम भी नहीं था वो कहा रहती हे और क्या काम करती है बस मे उसे खोजने निकल पड़ी मे उसे इधर उधर ढूंढने लगी मेरे दस दिन मे से अभी तक सात् दिन ही गुज़रे थे की वो मुझे फिर दिखाई दी अबकी बार वो गाड़ी मे बैठी थी क्या गाड़ी थी ऐसी गाड़ी मेरे मालिक पर भी नहीं थी मे उस की तरफ भागी पर वो तो गाड़ी मे बैठी थी वो चली गई मुझे बहुत बुरा लगा और मे बहा से चली गई फिर आठवे दिन फिर आई उसी जगह पर वो ना मिली मे उसका इतंजार करके वहा से निराश हो चली गई मुझे लगा की वो मुझे यही मिलेगी मे नौवे दिन भी फिर आ गई फिर भी मुझे निराश होना पड़ा अब मुझे डर बैठ गया मेरी छुट्टी का आखरी दिन बचा हे मे उस आखरी दिन को फिर वहा पहुच गई वहा बैठ कर उसका इंतजार करने लगी बस कुछ इंतजार करने के बाद् वो आ गई मैंने उसे आवाज लगा दी उसने मेरी तरफ देखा और वो मेरी तरफ आने लगी मे आज बहुत खुश थी की आज मेरे बचपन की सहेली मिल गई वो भी मुझे देख कर बहुत खुश हुई और वो मेरे पास आकर मेरे बारे मे बात करने लगी माँ और बहन के बारे मे पूछने लगी मैंने उसे रोते हुए जबाब दिया कि अब इस दुनिया मे वे दोनों नहीं हे उसे एक दम बहुत बुरा लगा और उसने मुझे गले लगा लिया मे पागल उसे निहार रही थी कि और सोच रही थी की उसने शहर मे आकर कितने रुपए कमा लिए हे जो गाड़ी मे घूम रही हे उसने मुझसे पूछ लिया क्या कर रही हे काम मैंने कहा मे एक घर मे चूल्हा चोकर कर रही हूँ उस ने कहा चल ये काम छोड़ दे और मेरे साथ चल मैंने मना कर दिया और वहा से चल् दी फिर आधे रास्ते जा कर मैंने सोचा अरे पागल तू कितनी पागल हे आज तेरी सहेली मिली हे और उसने तुझे काम के लिए बोला हे और तूने मना कर दी और मे वहा से बापस मालिक के घर आ जाती हूँ और मालिक से अपना सारा हिसाव किताब करके अपनी सहेली के पास आ जाती हूँ मेरी सहेली मे वहा फिर पहुच जाती हूँ जहां मुझे मेरी सहेली मिली थी वहा मुझे मेरी सहेली नहीं मिलती हे तो मे वहा के व्यक्ति से पूछती हूँ की अपने मेरी सहेली को देखा हे जिसका नाम सारिका हे वो मना कर देता हे मे वहा बैठ कर रोने लग जाती हूँ और सोचने लग जाती हूँ अब क्या करुँ मे मैंने तो अब अपनी नौकरी भी छोड़ दी तकरीबन चार बज गए होंगे मेरी सहेली वहा आ जाती हे मे उसे आवाज लगाकर उसे अपने पास बुला लेती हूँ और उसके साथ चली जाती हूँ और उसके घर जाकर जब मे देखती हूँ की उसका घर कितना बड़ा हे तो मे बहुत खुश हो जाती हूँ और मे भी सपने मे खो जाती हूँ और सोचने लगती हूँ अगर उसके पास इतने सारे रुपए और इतना अच्छा घर हे ये कोई अच्छी सी कंपनी मे काम करती होगी मैंने उससे नौकरी के बारे मे पूछा उस ने मना कर दिया और बोला अरे यार तुझे आम खाने से मतलब हे या उसके गुद्लि गिने मे मैंने आम बोल दिया और हम दोनों हस पड़े और उसने मुझे एक कमरे की और इशारा किया और बोला आज से ये तेरा कमरा मे बहुत खुश हुई ये बात सुन के और मे अपना सारा सामान जो मालिक ने दिलाया था वो लेकर मे अपने (मतलब दिखाए हुए कमरे मे) चली गई और वहा जाकर मे आराम करने लग गई और मुझे अकेला छोड़ कर सारिका अपने काम पर चली गई और मे उसके घर मे दौड़ लगाने लगी कभी उस कमरे मे तो कभी उस कमरे मे लगभग उस माकन मे आठ कमरे होंगे और फिर मे खाने मे झुट गई और मैंने खाना बना लिया और वो भी आ गई हम दोनों ने मिलकर खाना खाया और बहार घूमने चल दिए उस ने मुझे पूरे शहर मे घुमाया मे और सारिका दोनों घर बापस आ जाते हे और अपने अपने कमरे मे चलें जाते हे जब सुबह होती हे तो मेने उससे कहा कि मुझे भी लग वा दो अपनी कम्पनी मे सारिका ने मुझसे मना कर दिया और बोला ये काम तुझसे नहीं होगा जो मे करती हूँ मैंने कहा अरे हो जाएगा मे दिन भर परेशान रहती हूँ थोड़ा काम कर लुंगी तेरी कम्पनी मे चल ठीक हे बात करके बताती हूँ तुझे उसने मुझसे ऐसा कहा और चली जाती हे अपने काम पर जब वो बापस आती हे तो वो मुझसे वहा ले जाने को कहती हे और अपने कमरे मे चली जाती हे और मुझे काम के डर के मारे मुझे नीद भी नहीं आती है और मे बहुत जल्दी से तैयार हो जाती हूं मे ज्यादा उत्साहित थी जाने के लिए मे और सारिका दोनों चल देते हे वो मुझे एक बहुत बड़े घर मे ले जाती हे वहा बहुत सारी लड़की और औरत थी मे ये सब देख कर उस से पूछती हूँ ये सब क्या हे ये यहाँ सभी काम करने आई हे उसने कहा हा ये सब यही काम करती हे और यही रहती हे मे समझ ना सखी सारिका मुझे एक कमरे मे ले जाने लगी उस कमरे मे एक पच्च्पन् या पचास की एक औरत बैठी थी वो मुझसे पूछ बैठती हे क्या नाम हे तेरा मे जबाब देती हूँ मेरा नाम कोमल हे वो हम्म करती हे और वो कहती हे कि काम कर लेगी या ना और सारिका की और देखती हे मे गर्दन हिला कर हा का जवाव देती हूँ तो वो कहती हे ठीक है कल से आना और सारिका से कहती हे इसको तू समझेगी काम या किसी और को दूँ इसको सारिका कहती हे किसी और को दो ये मेरे बस कि ना हे इसको समझाना ये काम ठीक हे मे अभी बुलाती हूँ पूजा को वो समझा देगी उसको काम और वो अपनी हांथो को बजाती हे तो वहा खडी एक लड़की आ जाती हे तो वो औरत मेरी तरफ इशारे करती हे और कहती हे कल से इस को काम सीखना हे ठीक हे और वो लड़की हा कहकर चली जाती हे कोठे का सफर मे सुबह फिर जल्दी जाग कर नास्ता करके तैयार हो जाती हूँ और काम के लिए मे सारिका से कहती हूँ की मैडम ने सुबह बुलाया था चला नहीं हे मे बहुत उतावली हो रही थी अपनी सहेली जैसे पैसे कमाने के लिए और मे सारिका दोनों वहा पहुच जाते हे मे सिर्फ उस पूजा का इंतजार कर रही थी जो मुझे काम सिखाएगी अरे वो दिख गई मुझे मे उस के और चलें लगी और मे पूजा के करीब् आ गई और पूजा का हाथ पकड़ कर कहा कैसी हो वो हसने लग गई और बोली ठीक हूँ मैंने काम सीखने को बोला तो उसने बोला मेनका से तो मिल आ मैंने कहा ठीक हे और मे वहा से मेनका (मतलब मैडम ) एक पास आने लगी और मे मैडम के पास आ गई मैडम ने कहा आ गई कोमल मैंने हा कहा और मैंने कह दिया मे पूजा के पास गई तो उसने मुझे आपके पास जाने को बोला मैडम- हा मैंने ही बोला था पूजा से जब तुम आओ तो पहले मेरे पास भेज ना हा ये कुछ् कागज हे इन पर साइन करो मे- मे पड़ी लिखी नहीं हूँ मे साइन नहीं कर सकती मे सिर्फ अंगूठा ही लगा सकती हूँ मैडम - ठीक हे अंगूठा ही लगा दे और मैंने वहा रखे कागज पर अपना अंगूठा लगा दिया और मे वही खड़ी रही और मुझे फिर पूजा अपने कमरे मे ले गई और मुझे पूजा ने लिपस्टिक क्रीम आदि सामान दे दिया और बोला की मेकअप कर ले और ये ले ये कपड़े हे इन्है पहन लेना मे कपड़े लेकर बहुत खुश हो गई और झट से मैंने मेकअप कभी नहीं किया था तो मैंने पूजा से ही कह दिया तुम ही कर दो मेकअप मेरा और मे फिर पहन आऊँगी कपड़े बस फिर मेरा मेकअप पूजा कर देती हे और मुझे सिखा भी देती हे और कहती हे की मुझे रोज़ थोडी ही करना होगा तेरा मेकअप चल हो जा तैयार मेहमान आने बाले होंगे और मे जब बाथरुम मे गई तो जब मैंने कपड़े देखें तो वो बहुत छोटे थे मैंने पूजा को आवाज लगाई तो पूजा आई मैंने कहा पूजा ये कपड़े तो छोटे हे पूजा ने कहा ठीक हे कपड़े चुप पहन आ नहीं तो नंगी ही खिच लाऊंगी बाथरुम मे से समझी मे हसने लगी और मैंने वो कपड़े पहन लिए पर मुझे शर्म आ रही थी और मे शर्म के कारण मे बाथरूम से निकल नहीं रही थी पूजा ने मुझे बाथरूम से बहार खींच लिया और मुझे एक चारपाई पर बैठा दिया और वो मेरे पैर और जांघ पर तेल लगाने लगी उसने मेरे हर जिस्म पर तेल की मालिश कर दिया मे बिलकुल चिकनी हो गई अगर कोई मेरे उप्पर कोई हांथ भी रखेगा तो वो भी रेपट जाएगा और वो मुझे एक और कमरे मे ले जाने लगी जिस मे बहुत गंदे गंदे फोटो लग रहे थे मैंने कहा ये सब क्या हे मे ये सब कम नहीं करती उस ने मैडम को बुला लिया और मैडम ने मेरे आते के साथ मेरे दो थपड मरे और मुझसे जबरदस्ती करने लगी मैंने चीलाना शुरू कर दिया और कहने लगी मे पुलिस से रिपोर्ट कर दूंगी तो मैडम ने कहा मेरे पास तेरा अंगूठे का निशान हे मे डर गई इन्होने मुझे केई हफ्ते बिना खाना खाये भूखा रखा मैंने हा कर दी और फिर इन्होने मुझे खाना दिया मुझे क्या मालूम था कि वो मुझसे वेश्या व्रती करवायेगी जो मे सपना लेकर यहाँ आई थी वो अधुरा रह गया और मेरा सफर यही तक रहा और वैश्या व्रती करते हुए मैंने भी अपनी लीला समाप्त कर ली समाप्त

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