गूंजती हुई अंधकार
गूंजती हुई अंधकार प्रवेश उनके सामने उठा - एक तेज धारदार मुँह पहाड़ी की सतह में, पूरी रोशनी को निगलते हुए। चार दोस्तों का एक समूह, टॉर्च और साहस के साथ, अंदर कदम रखा, उनकी हंसी नम चट्टानों की दीवारों पर गूंजती हुई। किंवदंतियाँ गुमशुदगी की, गहराइयों से बुलाने वाली आवाजों की फुसफुसाहट करती थी। लेकिन किंवदंतियाँ चुनौती दी जानी चाहिए। जैसे ही वे नीचे उतरे, हवा भारी होती चली गई। उनके बीम कालेपन को चीरते हुए, अंतहीन टनलों को प्रकट कर रहे थे। फिर, पहला चीत्कार। सैम गायब था। एक पल वह उनके पास था, मजाक कर रहा था। अगला, बस उसकी टॉर्च असमान फर्श पर लुड़कती हुई, चमकती हुई और फिर बुझ जाती। बाकी तीनों ने उसका नाम पुकारा, उनकी आवाज़ें विशाल खाई द्वारा निगल ली गई। गूंज विकृतियों में बदल गई, विकृत फुसफुसाहट में वापस दोहराती। वे आगे बढ़ते रहे, दिल की धड़कनें तेज हो गई। एक गीली आवाज ने पत्थर में खरोंच मारी - एक सांस, बहुत गहरी, बहुत अप्राकृतिक। फिर, एक और चीत्कार - एमा।
अंतिम दो दौड़ गए। दीवारें कसने लगीं, जैसे किसी जीवित चीज़ की तरह धड़कतीं। उनके अपने प्रतिबिंबों ने पोखरों में चमकते हुए, स्थानांतरित होते हुए, लौटकर मुस्कुराते हुए दिखे।एक आवाज़ हवा में तैरने लगी, परिचित लेकिन गलत।"और गहरे आओ। हम इंतज़ार कर रहे हैं।"बेन की पकड़ में टॉर्च कांपने लगी। परछाइयाँ फिसलने लगीं। अंधेरे ने उसे घेरने से पहले उसका अंतिम ख्याल था—वे कभी अकेले नहीं थे।