लड़का प्यारा सा फुलवारी है और लड़कियां कांटो की झाड़ी है।
अरे ना जाने ये समाज क्यों इतना लडको की मारी है हर वक्त लड़का लड़का करते है जैसे लगता है ये इनके बुढ़ापे की गाड़ी है। लड़कियां पढ़ाई के साथ साथ घर के काम भी करती है फिर भी समाज सोचता है कि लड़कियां उनकी ही जिम्मेदारी है, लेकिन लड़का समाज के लिए प्यारा सा फुलवारी है परंतु लड़कियां फिर भी काटो की झाड़ी है।।
अरे ना जाने क्यों ये समाज इतना भेदभाव की आज्ञाकारी है लड़कियां एक बार मां बाप की तबियत खराब हो जाने पर वे जान तक देने को तैयार रहती है और लड़को को कोई फर्क नही पड़ता है जैसे हाथी के ऊपर चीटी की सवारी है,लेकिन फिर भी लड़का समाज के लिए प्यारा सा फुलवारी है और लड़कियां फिर भी उनके लिए काटो की झाड़ी है।।
अरे इतना दुःख सहने के बाद भी वे कुछ नही कहती है वे यह सोचकर चुप रहती है की खराब किस्मत ही हमारी है परंतु अगर लड़को के ऊपर जरा सी बात आ जाए तो वे ये साबित करने लगते है की वे करते कितने जुल्मों की व्यापारी है,लेकिन फिर भी लड़का समाज के लिए प्यारा सा फुलवारी है और लड़कियां फिर भी उनके लिए काटो की झाड़ी है।।