शायद इस जन्म मे फिर मुलाकात हो ना हो
चंडीगढ़ के बहुत सारे घरों में से एक घर 32 वर्षीय आदित्य और 30 वर्षीय श्रेया का भी था जिस को उन्होंने 10 साल पहले बहुत प्यार से सजाया था। उनका 8 साल का बेटा अहान उनकी दुनिया था। लेकिन अब उनके रिश्ते मे पहले जैसी बात नहीं बची थी।
आदित्य को अपने ऑफिस में नताशा नाम की लड़की से प्यार हो गया था। नताशा सुंदरता की मूरत थी। पूरे ऑफिस में हर कोई उसकी एक झलक पाने के लिए बेकरार रहते था पर यह जानते हुए भी कि आदित्य का एक 10 साल का बेटा और बहुत प्यारी पत्नी है नताशा ने आदित्य को अपने प्यार मे फसा दिया।
श्रेया एक बहुत सीधी-सादी, अपने काम से मतलब रखने वाली, खुदगर्ज और निस्वार्थ महिला थी। उसको पता था कि कुछ ना कुछ तो गड़बड़ है लेकिन उसने अपने पति पर कभी शक नहीं किया।
एक दिन ऑफिस से लौटकर आदित्य ने श्रेया का हाथ पकड़ कर कहा, "श्रेया मुझे तुमसे कुछ बहुत जरूरी बात करनी है।"
श्रेया ने कहा, "खाना खाने के बाद बात करते हैं।"
खाना खाते वक्त दोनों चुपचाप थे, लेकिन उनके मन में अलग ही अंतर्द्वंद चल रहा था। श्रेया को पता था कि कुछ बुरा होने वाला है। कुछ देर शांति के बाद आदित्य ने कहा, "मुझे तलाक चाहिए।"
श्रेया चुप रही यह देख कर आदित्य ने आगे की बात जारी रखी, "मैं किसी और से प्यार करता हूं और उससे शादी करना चाहता हूं। श्रेया मैं जानता हूं तुम बहुत अच्छी लड़की हो और तुम ऐसी जिंदगी नहीं जीना चाहती इसलिए मैं तुम्हें इस शादी से आजाद करता हूं।"
श्रेया ने कुछ जवाब नहीं दिया लेकिन उसके चेहरे से जाहिर था कि उसका दिल टूट चुका है। वह चुपचाप सोने चली गई और रात भर पूरे घर में उसके रोने की आवाज गूंजती रही।
आदित्य को बहुत बुरा लगा पर वह कुछ ना कर सका क्योंकि वह नताशा से बहुत प्यार करता था और शादी करना चाहता था। उसके हिसाब से ऐसी शादी मे बंधकर रहना गलत हैं जिसमे प्यार ना हो।
अगले दिन आदित्य ने तलाक के कागजात तैयार करवाएं जिसके मुताबिक श्रेया उसकी कंपनी, घर आदि की 50% हिस्सेदार है और वह सब उसको तलाक के बाद मिल जाएगा। श्रेया ने उन कागजात को देखते ही फाड़ दिया। आदित्य ने उसको समझाने की कोशिश करी और वो जोर जोर से रोने लगी।
अगले दिन जब आदित्य घर वापस आया तो उसने देखा श्रेया कागज पर कुछ लिख रही थी। पर वह सो गया। सुबह उठकर उसने पाया कि उसके सामने एक कागज रखा था जिस पर तलाक की शर्ते लिखी थी।
वह शर्त यह थी
1.श्रेया को आदित्य की संपत्ति में से कुछ नहीं चाहिए था।
2.उसे तलाक से 1 महीने पहले तलाक का नोटिस चाहिए।
3.तलाक होने तक दोनों सामान्य तरह से पति पत्नी की तरह रहेंगे।
4.महीने के अंत तक रोजाना आदित्य श्रेया को ब्राइडल स्टाइल में कमरे से मैंन गेट तक तक लेकर जाएगा।
बाकी सब शर्तें तो ठीक थी लेकिन आदित्य को आखरी शर्त कुछ अटपटी और बचकानी लगी पर वह मान गया क्योंकि उसको पता था कि अगले महीने उसके बेटे के इम्तिहान थे और वह अपने बेटे को परेशान नहीं करना चाहता था।
यह बात जब आदित्य ने नताशा को बताई, तो वे जोर से हंस पड़ी और कहां, "लगता है तुम्हारी पत्नी पागल हो चुकी है।"
शर्त के अनुसार जब पहले दिन आदित्य ने श्रेया को उठाया तो उसे बहुत अजीब लगा। लेकिन छोटे आहान को यह देखना बहुत अच्छा लगा। आहान ने जोर-जोर से ताली बजाना शुरू कर दी और जब तक कि आदित्य श्रेया को गोद में लिए मेन गेट तक नहीं पहुंच गया उसकी तालियों की गूंज जारी रही। श्रेया ने तभी हल्के से आदित्य के कान में कहा कि, आहान को तलाक के बारे में कुछ मत बताना। आदित्य ने इस बात पर हामी भरते हुए सिर हिलाया और अपने ऑफिस की ओर रवाना हो गया।
दूसरे दिन उन दोनों ने बहुत आसानी से अभिनय किया तब आदित्य को एहसास हुआ की उसने कितने समय से श्रेया को ढंग से देखा भी नहीं है। उसने नोटिस किया रखें श्रेया के चेहरे पर हल्की झुर्रियां आ गई है और उसके बाल भी अब पहले जितने लंबे नहीं रहे थे। आदित्य को पता चल गया की श्रेया इस जिंदगी और शादी से कितना परेशान है और यह देख उसे बहुत दुख हुआ।
जैसे-जैसे दिन बढ़ते गए आदित्य ने श्रेया को नोटिस करना शुरू कर दिया उसके मन में एक अतरंगी भावना उमड़ ने लगी। आदित्य अपनी शादी के शुरूआती समय को याद करने लगा कि कैसे श्रेया ने अपना सारा समय और अपने सारे सपने आदित्य के घर के लिए कुर्बान कर दिए।
जैसे-जैसे महीना गुजरता गया आदित्य को श्रेया को उठाने में आसानी होती गई और वह उसकी दिनचर्या का कसरत की तरह हिस्सा बन गया। उसने यह भी देखा कि श्रेया अब पहले से बहुत पतली हो चुकी थी जिस कारण उसे उठाना और भी आसान हो गया था।
महीने के आखिरी दिन आदित्य उदास चेहरा लिये बैठा हुआ था तभी उसका बेटा उसके पास दौड़कर आया और उसने कहा "पापा मम्मी को उठाने का टाइम हो गया, चलो पापा जल्दी चलो।"
आहान के लिए यह देखना कि कैसे उसके पापा उसकी मम्मी को उठा कर घर से बाहर की ओर ले जाते थे बहुत मनोरंजक था। यह उसकी दिनचर्या का एक अनिवार्य हिस्सा बन गया था।
यह सब देख कर आदित्य खडा हो गया। उसके मन में दुख और शोक उमड़ आया।
श्रेया ने अपने बेटे आहान को अपने पास बुलाकर गले लगा लिया। आदित्य ने रोज की तरह श्रेया को उठाया और बाहर की ओर चलने लगा उसके मन में तरह-तरह के विचार आ रहे थे। वह बैडरूम से लिविंग रूम की ओर से जाते हुए दरवाजे पर पहुंच गया और श्रेया को नीचे उतार दिया। आदित्य को लग रहा था जैसे उसका दिल रुक गया है। वह उस पल बस श्रेया के साथ रहना चाहता था।
आदित्य ने फटाफट अपनी कार निकाली और ऑफिस की तरफ रवाना हो गया। उसके मन में साफ था कि उसे क्या करना है ऑफिस में पहुंचते ही वह सबसे पहले दौड़ कर नताशा के पास गया।
आदित्य को अपने पास बेसब्री से आते देख नताशा का चेहरा चमक उठा। उसको लगा कि महीना पूरा हो चुका है और अब वह दोनों आसानी से शादी कर सकते हैं। आदित्य ने नताशा जो पहली बात बोली वह नताशा ने कभी नहीं सोची थी। उसने कहा, आई एम सॉरी नताशा, बट आई लव श्रेया। गॉड आई लव हर सो मच! मुझे तलाक नहीं चाहिए। मुझे माफ कर दो, पर मै हमेशा से श्रेया से प्यार करता था। इस बात का एहसास मुझे अब जाकर हुआ हैं। मैं उसके बिना नहीं रह सकता। मुझे लगा मैं तुमसे प्यार करता हूं पर वह प्यार नहीं बस अट्रैक्शन थी। अगर मैंने आज तक किसी से प्यार किया है तो बस वो श्रेया है।"
नताशा थोड़ी देर चुपचाप रही और फिर कहां, "आई डोंट केयर! पता नहीं मैंने तुम जैसे इंसान को क्यों चुना मेरे पीछे इतने सारे लोग हैं मुझे अपना मुंह मत दिखाना चले जाओ यहां से। गो टू हेल! "
आदित्य खुशी से वहां से भाग कर चला गया। वह पूरे दिन ऑफिस खत्म होने का इंतजार करता रहा। ऑफिस का समय खत्म होने पर वह घर के लिए निकल गया रास्ते में वह फूलों की दुकान पर रुका और एक सुंदर गुलदस्ता खरीदा और फिर सोचा कि कार्ड पर क्या लिखूं बहुत सोचने के बाद मैं मुस्कुराया और लिखा "मैं तुम्हें हर सुबह ब्राइडल स्टाइल में उठाकर कमरे से मेन गेट तक ले जाऊंगा। बूढ़ा होने के बाद भी तुम्हें अपनी गोद में उठाऊंगा चाहे मेरी हड्डियां भी क्यों न टूट जाए और तब तक यह जारी रहेगा जब तक के मौत हम दोनों को अलग ना कर दे। आई लव यू श्रेया, प्लीज फोरगीव मी।"
उस शाम जब आदित्य घर पहुंचा उसके चेहरे पर एक खिली हुई मुस्कान थी। उसने पूरे घर पर अपनी पत्नी को ढूंढा और जोर-जोर से पुकाराने लगा, श्रेया बाहर आओ! पर श्रेया बाहर नहीं आई।
आदित्य को चिंता होने लगी और वह कमरे के और भाग कर गया। उसने कमरे में जो देखा उससे वह डर गया उसकी चेहरे की हवाइयां उड़ गई।
श्रेया बिस्तर पर बेहोश पड़ी थी। उसका चेहरा सफेद पड़ गया था और लग रहा था मानो उसमें जान ही ना हो।
आदित्य हड़बड़ा कर श्रेया के पास पहुंचा उसने श्रेया को उठाकर फटाफट कार में बैठाया और हॉस्पिटल की तरफ रवाना हो गया। पूरे रास्ते उसके चेहरे से पसीना पानी की तरह बह रहा था।
हॉस्पिटल में पहुंचकर उसको पता चला की श्रेया को ब्रेन ट्यूमर है। यह सुनकर उसके पैरों के नीचे की की जमीन खिसक गई।
ब्रेन ट्यूमर के ऑपरेशन के बाद श्रेया पूरे 2 महीने कोमा में रही। यह 2 महीने आदित्य के लिए 20 साल से भी ज्यादा लंबे थे। इस समय में उसको अपनी सारी गलतियों का एहसास हुआ और पता चला कि उसने अपने जीवन में कितने गुनाह किए हैं और श्रेया जैसे मासूम इंसान को कितना दुख पहुंचाया।
उसे यह भी पता चला कि श्रेया की अजीब शर्तो की क्या वजह थी वह चाहती थी कि अहान की नज़रो मे आदित्य की छवि खराब न हो और उसके मन मे अपने पिता के लिये कोई नकारात्मक प्रतिक्रिया न हो। अगर तलाक हुआ तो आहान को कम से कम धक्का दें और उसकी नजर में आदित्य एक प्यार करने वाला पति रहे।.
आदित्य को यह बात अब समझ आई की हमारे जीवन में बड़ी-बड़ी गाड़ियां, हवेलियां, संपत्ति और बहुत से पैसों से ज्यादा खुशी हमें हमारे जीवन के छोटे-छोटे रिश्ते और छोटे-छोटे पल दे जाते हैं। वह खुशियां जो हमें अपनों के साथ रहकर और समय बिता कर मिलती हैं, वह हम अपनी पूरी जिंदगी बेचकर भी वापस नहीं ला सकते। इसलिए हमें हमेशा अपने जीवनसाथी को अपना दोस्त बना कर अपने जीवन के हर अच्छे और बुरे पल को पूरी तरह से जीना चाहिए और एक दूसरे का साथ कभी नहीं छोड़ना चाहिए।