शर्मिंदगी का विषय है कि हमारे इतिहास हमारे गौरव की साक्षी रही सेना की इकलौती रेजिमेंट 61 वी केवलरी जिसने इजराइल जैसे देश के एक हिस्से हाइफा को ऑटोमन जर्मन साम्राज्य से आजाद करवाया उस रेजीमेंट को सेना में बचत के नाम पर नष्ट किया जा रहा है और हमारे समाज के बुद्धिजीवी सेना के रिटायर्ड अधिकारी और तमाम सैनिक बुद्धिजीवी चुप हैं अगर इसी प्रकार हमारी परंपराएं खत्म होने की कोशिश होती रही तो 1 दिन हम पूरी तरह से विरासत को संजोने की जगह पर खुद ही नष्ट हो जाएंगे हमारे समाज के बुद्धिजीवी वर्ग सैनिक वर्ग और सेना के बुद्धिजीवियों के इस ओर ध्यान आकर्षित करना चाहिए ..
वैसे यह फैसला उस कथित राष्ट्रवादी सरकार का फैसला है! और मिशन "ठाकुरों के चिन्ह मिटाओ" के तहत यह कदम उठा है।
यूं तो, राष्ट्रपति अंगरक्षक दस्ता भी नाकारा ही है। उसमें भी मुख्य रूप से घुड़सवारों का दस्ता है, फिर भी उस पर अनाप शनाप पैसा खर्च किया जाता है।
#शेखावाटी अंचल स्थित #सुल्ताना गांव में #जाट बहन के साथ हुई अभद्रता के विरुद्ध हो रहे आंदोलन में आज हमारे ही साथी सबसे आगे मिलेंगे .....जातिगत भसड़ फैलाने वाले कीड़े जाकर देख सकते हैं, हमारी लड़ाई किसी समाज से नहीं, असामाजिक तत्वों से है ..... और वो हर कीमत पर जारी रहेगी ।
हम लोग नारी अस्मिता के लिए अपने तख्त ओ ताज दांव पर लगाने वाले #महाराव #शेखाजी के वंशज हैं, हम क्षत्रिय हैं, और हम उन्हीं महान पूर्वजों के बताए मार्ग पर अविचलित चलते रहेंगे .....
क्योंकि- बहन/बेटियां सबकी साझा होती है ।
#जय_क्षात्रधर्म #जय_राजपूताना #जय_भारत