His Silly Girl
🌑 अंधकार और आतंक (Andhera aur Khauf)
रात गहरी है। शहर की रोशनी से बहुत दूर, एक विशाल घने जंगल के बीच, एक खंडहरनुमा हवेली खड़ी है। इस हवेली के अंदर से किसी की भयंकर चीख़ की आवाज़ जंगल की खामोशी को चीरती हुई बाहर आ रही है। मानो कोई बेबस जान आखिरी बार बचने की कोशिश कर रही हो।
हवेली के अंदर के एक अंधेरे कमरे में, एक शख्स एक रॉकिंग चेयर पर बैठकर धीरे-धीरे झूल रहा है। उसकी उँगलियों के बीच जलती हुई सिगरेट है। वह बड़े आराम से सिगरेट का धुआँ उड़ाए जा रहा है। उस भयानक चीख़ के शोर में भी उसके चेहरे पर कोई शिकन नहीं है। बल्कि, उसके होंठों के कोने पर एक क्रूर मुस्कान है।
सामने की दीवार के पास, एक आदमी खून से लथपथ ज़मीन पर पड़ा दर्द से कराह रहा है। उसकी तरफ देखते हुए, रॉकिंग चेयर पर बैठे शख्स (जिसे हम अंडरवर्ल्ड का बादशाह कहते हैं) ने अपनी सुस्त, पत्थर जैसी आँखें उठाईं और बेहद ठंडी और सख्त आवाज़ में कहा:
"तुम्हें पता होना चाहिए था... मुंबई की इस काली दुनिया में, गलती करने की सज़ा सिर्फ मौत नहीं होती। यह तो बस शुरुआत है।"
उसने सिगरेट का आखिरी कश लिया और उसे ऐशट्रे में मसल दिया। उसकी आँखों में वहशत और ताकत की एक ठंडी चमक थी। चीख़ धीरे-धीरे थम गई। अब रॉकिंग चेयर पर बैठा शख्स भयानक खामोशी का प्रतीक बन गया था। यह खामोशी मौत से भी ज़्यादा डरावनी थी। वह धीरे से उठा। पूरे मुंबई शहर में उसका ही सिक्का चलता है। वही है... अर्जुन कपूर।
☀️ सुबह, कहीं और (Subah, Ek Doosri Jagah)
अगले दिन सुबह।
एक चमकता हुआ, प्यारा सा कमरा। चारों ओर नर्म मुलायम खिलौनों और बड़े-बड़े टेडी बेयर से भरा हुआ। नरम बिस्तर पर एक बहुत प्यारी परी सो रही है, एकदम मासूम बच्ची की तरह।
ठीक तभी कमरे में एक आकर्षक अधेड़ महिला ने प्रवेश किया। वह सोई हुई लड़की को देखकर ज़रा सा मुस्कराईं। बिस्तर के पास जाकर हल्के हाथ से लड़की के सिर पर हाथ फेरा और प्यार भरे लहजे में बुलाया, "कृषि, बच्चा, उठ जाओ। देखो सुबह हो गई है।"
पर लड़की उठी नहीं, बल्कि उस महिला की गोद में सिर रखकर अपनी प्यारी आवाज़ में बोली, "मम्मा, थोड़ी देर और सोने दो प्लीज़!"
कृषि की माँ ने बेटी के सिर पर हाथ फेरकर कहा, "नहीं बेटा। बहुत देर हो गई है। तुम्हारे स्कूल की क्लास का समय हो गया है। उठ जाओ, मेरी बच्ची।"
कृषि अब न चाहते हुए भी उठकर बैठ गई। होंठ फुलाकर उसने अपनी माँ की तरफ देखा और बोली, "मम्मा, मैं भी स्कूल जाना चाहती हूँ! मुझे भी दोस्त चाहिए! तो फिर आप और डैडी मुझे क्यों नहीं जाने देते स्कूल? रोज़-रोज़ ऑनलाइन क्लास अच्छी नहीं लगती मुझे!" 🥺
कृषि की बात सुनकर उसकी माँ पहले तो घबरा गईं। फिर जैसे-तैसे खुद को संभालकर हल्की सी नकली हँसी की कोशिश की और बोली, "अ... असल में बेटा... अ... मैं और तुम्हारे डैडी तुम्हें बहुत प्यार करते हैं। तुम्हें अकेले कहीं छोड़ नहीं सकते न बच्चा, डर लगता है!"
कृषि क्योंकि भोले मन की नासमझ लड़की थी, उसने माँ की बात को सच मान लिया। वह माँ से लिपट गई और बोली, "मम्मा, आई लव यू सो मच! और आई एम सॉरी। आप उदास मत होइए माँ प्लीज़। मैं अब बाहर जाने को नहीं बोलूँगी। आप बस दुखी मत होइए।"
कृषि की माँ ने उसे और ज़ोर से गले लगा लिया। बेटी की पीठ पर हाथ फेरते हुए उनकी आँखों में आँसू आ गए। वह जानती हैं कि उनकी यह छोटी सी परी बाहरी खतरनाक दुनिया से कितनी दूर है। इन चार दीवारों के अंदर ही वह महफूज़ है। लेकिन यह सुरक्षा देते हुए, उसका आज़ाद बचपन छीना जा रहा है। उन्होंने मन ही मन सोचा, 'मैं तुम्हें खो नहीं सकती, बेटा। कभी नहीं। तुम्हें इस दुनिया में किसी दोस्त की ज़रूरत नहीं है। सिर्फ मैं और तुम्हारे पापा हैं, तुम्हारी रक्षा करने के लिए।'
उन्होंने किसी तरह अपने आँसू छिपाए और कृषि से कहा, "ठीक है, मेरी बच्ची। चलो, अब उठो और फ्रेश हो जाओ। मैं तुम्हारे लिए तुम्हारा मनपसंद खाना बना रही हूँ।"
कृषि खुश होकर अपनी माँ के गाल पर एक चुम्मा दिया और बिस्तर से उतर गई। माँ ने एक पल के लिए दरवाज़े से बाहर की तरफ देखा—दरवाज़े के पीछे कितने गहरे राज़ छिपे हैं, जो यह मासूम लड़की नहीं जानती।
उन्हें क्यों छिपना पड़ा?
उस रहस्यमय अंडरवर्ल्ड के बादशाह अर्जुन कपूर के साथ इस सीधी-सादी लड़की का मिलन कैसे होगा?