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Nekiyaan to pahad Jaise Lekin Anjaam Daraona

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तन्हाई में किए जाने वाले गुनाह इंसान की ज़िंदगी, दिल और ईमान को धीरे-धीरे कमजोर कर देते हैं। हम लोगों के सामने अच्छे बनते हैं, लेकिन असली इम्तिहान तब होता है जब हम अकेले होते हैं।यह संदेश हमें याद दिलाता है कि अल्लाह हर जगह मौजूद है—चाहे हम दरवाज़ा बंद कर लें या हिस्ट्री डिलीट कर दें। तन्हाई के गुनाह ना सिर्फ आख़िरत को, बल्कि हमारी दुनियावी ज़िंदगी, रिज़्क, सुकून और दिल की हालत को भी प्रभावित करते हैं।अभी भी वक्त है—तौबा का दरवाज़ा खुला है।अपने रब की तरफ लौट आओ, तन्हाई को गुनाह नहीं बल्कि इबादत का ज़रिया बनाओ, और सच्चा सुकून हासिल करो।

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Nekiyaan to pahad Jaise Lekin Anjaam Daraona
मैं अपनी उम्मत के ऐसे लोगों को जानता हूँ जो क़ियामत के दिन पहाड़ के बराबर नेकियाँ लेकर आएँगे, लेकिन अल्लाह तआला उन्हें उड़ते हुए धूल के ज़र्रों की तरह बिखेर देगा। तन्हाई एक दोधारी तलवार है— कभी इंसान को अपने रब के करीब कर देती है, और कभी उसे ग़म के अंधेरों में घेर लेती है। हम लोगों के सामने अपने आप को बहुत अच्छा दिखाते हैं, लेकिन हमारी असल हक़ीक़त वो है जो बंद कमरे की खामोशी और मोबाइल/स्क्रीन की तेज रोशनी में सामने आती है। तन्हाई के गुनाह वो कीमत हैं, जो इंसान की सालों की इबादतों को खत्म कर देते हैं। जब इंसान चारदीवारी के पीछे खुद को आज़ाद समझकर अल्लाह की हदों को तोड़ता है, तो वह अपने ईमान का सौदा कर रहा होता है। आज वही आँख जो महफ़िल में शर्म से झुकी रहती है, तन्हाई में बेहयाई के मंजर देखती है, और दिल धीरे-धीरे अंधेरा होने लगता है। हम कमरा बंद कर सकते हैं, लाइट बंद कर सकते हैं, हिस्ट्री डिलीट कर सकते हैं… लेकिन अल्लाह से कैसे छिपेंगे? क़ियामत के दिन इंसान हैरान रह जाएगा कि यह वही व्यक्ति है जो कुछ देर पहले लोगों के सामने सजदे में झुका हुआ था। मुहम्मद ﷺ ने फरमाया: मैं अपनी उम्मत के ऐसे लोगों को जानता हूँ जो पहाड़ के बराबर नेकियाँ लाएँगे, लेकिन अल्लाह उन्हें रेज़ा-रेज़ा कर देगा। सहाबा ने पूछा: या रसूलल्लाह! वो कौन लोग होंगे? आप ﷺ ने फरमाया: वो तुम्हारे ही भाई होंगे, तुम्हारी ही क़ौम से होंगे, तुम्हारी तरह रातों को इबादत भी करते होंगे, लेकिन तन्हाई में अल्लाह की हदों को तोड़ देते हैं। हज़रत यूसुफ़ علیہ السلام का वाक़या तुमने पढ़ा है— वो तन्हा थे, एक खूबसूरत औरत उन्हें गुनाह की तरफ बुला रही थी, उनके पास मौका भी था और ताकत भी, लेकिन उन्होंने कहा: “मैं अल्लाह की पनाह चाहता हूँ।” --- ❗ तन्हाई के गुनाह क्या हैं? इंटरनेट पर गंदी तस्वीरें और वीडियो देखना, सोशल मीडिया पर नामहरम की तस्वीरों पर ध्यान देना, उनसे गलत और नापसंद बातचीत करना, चैट और कॉल के जरिए हदों को पार करना… ये तुम्हारे तन्हाई के गुनाह हैं, जो तुम्हारी अंदरूनी हालत को खराब कर देते हैं। --- तुम ध्यान नहीं देते, लेकिन ये गुनाह तुम्हारी दुनियावी जिंदगी पर भी असर डालते हैं। हम कहते रहते हैं: हमारा रिज़्क क्यों कम हो रहा है? पैसा आता है मगर पता नहीं चलता कहाँ चला जाता है बरकत क्यों नहीं है? घर में सुकून क्यों नहीं है? दिल में ईमान क्यों नहीं लगता? याद रखो— तन्हाई के गुनाह इंसान को डिप्रेशन, बेचैनी और सुकून की कमी में डाल देते हैं। --- देखो, हम में से कोई भी पाक नहीं है, बस अल्लाह ने हमारा पर्दा रखा हुआ है। लेकिन जब गुनाह आदत बन जाता है, तो वह एक दिन सबके सामने आ जाता है। अगर दुनिया में कोई हमें गुनाह करते हुए देख ले, तो हम शर्म से जमीन में गड़ जाना चाहेंगे। तो क़ियामत के दिन क्या होगा? जब हम इनकार करेंगे कि हमने ऐसा नहीं किया, तो हमारी पूरी जिंदगी की फिल्म सबके सामने चला दी जाएगी। और फिर हमारे शरीर के हिस्से हमारे खिलाफ गवाही देंगे: आँखें, कान, नाक, हाथ और पाँव— सब सच बता देंगे। --- 🤲 आख़िरी बात याद रखो— अभी भी तौबा का दरवाज़ा खुला है। जिस उंगली से तुम गुनाह की तरफ क्लिक करते हो, उसी उंगली से अल्लाह का ज़िक्र शुरू कर दो। तन्हाई के गुनाहों का इलाज तन्हाई में ही छिपा है। तन्हाई में अपने रब को याद करो। अल्लाह तुम्हारे दिलों को साफ कर देगा और तुम्हें सच्चा सुकून अता करेगा۔

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