
शीर्षक: दस हज़ार का वादाअध्याय 1: एक अजानी पहचानआरव की ज़िंदगी एक ही धार पर चल रही थी - ऑफिस, घर, और फिर ऑफिस। 28 साल का एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर, जिसके सपने उसकी कोडिंग स्क्रीन्स में कहीं खो से गए थे। एक शाम, वह अपने ऑफिस के बाद वाली चाय की दुकान पर बैठा था, जब उसकी नज़र फुटपाथ पर पड़ी एक पुरानी, चमड़े की डायरी पर पड़ी।उसने उसे उठाया तो उसमें एक हिसाब की किताब थी। कुछ खर्च के कागज़, कुछ पुराने बिल, और बीच में एक नया, चमकता हुआ 500 रुपये का नोट। लेकिन सबसे ऊपर एक चिट्ठी थी, जिसके अंदर लिखा था:"यह मेरी पिछले साल की बचत है। इससे किसी ज़रूरतमंद की मदद कर देना। भगवान आपका भला करे।"आरव हैरान रह गया। यह कौन है जो इतनी बड़ी रकम ऐसे छोड़ जाता है? उसने डायरी को और गौर से देखा। पीछे एक छोटा सा डूडल था - एक चिड़िया और एक सितारा। शायद किसी लड़की की है।उसने डायरी अपने पास रख ली। शायद कोई लौटकर आए।कोई नहीं आया।अध्याय 2: एक नया संसारअगले हफ्ते, आरव ने उसी डायरी के साथ एक नया काम किया। उसने उस 500 रुपये को एक बेचारे बूढ़े आदमी को दे दिया, जिसकी ठेला उलट गया था, और उसके साथ डायरी में लिखा:"आपके 500 रुपये एक बूढ़े ठेले वाले की मदद के लिए इस्तेमाल कर दिए। आगे भी आपकी बचत से लोगों की मदद करता रहूंगा। - एक अजनबी"इस तरह से एक अनजानी लड़की के साथ उसका संवाद शुरू हो गया। वह हर हफ्ते कुछ न कुछ रकम निकालता (हमेशा 500 या 1000 के नोट) और किसी ज़रूरतमंद को दे देता, और उसका सारा हिसाब उसी डायरी में लिख देता। वह भी जवाब देती, अपने ख्याल लिखती।"आपने एक बच्चे की फीस भरकर उसे स्कूल भेजा। आपका बहुत बहुत शुक्रिया। आपका दिल बहुत बड़ा है। - अनाहिता"आरव को पता चला उसका नाम अनाहिता है। उनका यह अनोखा रिश्ता महीनों तक चलता रहा। वह उसे अपनी परेशानियाँ बताने लगा, वह अपने दर्द बताती। वे दोनों एक दूसरे के लिए एक राज़ बन गए, बिना मिले, बिना जाने।अध्याय 3: मिलने की बेकसीआरव को एहसास हुआ कि वह अनाहिता से प्यार करने लगा है। उसने एक दिन डायरी में लिखा:"अनाहिता, मैं आपसे मिलना चाहता हूँ। आप कहाँ हो? आपका चेहरा देखे बिना भी मैं जानता हूँ कि आप मेरे लिए खास हो।"जवाब आया, दर्द भरा: "मिलना मुमकिन नहीं है। मेरी ज़िंदगी में ऐसी मुश्किलें हैं जो मैं आप पर थोपना नहीं चाहती। बस ऐसे ही बातें करते रहें, ठीक है?"आरव ने माना नहीं। उसने कसम खाई कि वह ढूंढकर ही सही, उसे मिलेगा। डायरी में एक पता था, जहाँ से उसने पहली बार उठाई थी। वह वहां पहुंचा। एक छोटा सा, पुराना मकान। पड़ोसियों से पूछा तो पता चला कि वहां एक अनाहिता नाम की लड़की रहती थी, लेकिन वह और उसका परिवार कुछ महीने पहले ही वहां से चले गए थे। लोगों ने सुना था कि उसके पापा का काफी कर्ज़ था और वे लोग चुपचाप शहर छोड़कर भाग गए थे।आरव को ठेस लगी। उसने सोचा, शायद इसलिए वह नहीं मिल रही थी।अध्याय 4: आखिरी वादाएक दिन, आरव को डायरी में एक आखिरी चिट्ठी मिली। उसमें लिखा था:"मेरी प्यारी दोस्ती, आज मेरी आखिरी चिट्ठी है। हम लोग कल यहाँ से जा रहे हैं। पापा ने सारा कर्ज उतार दिया है और हम नए शहर में नई जिंदगी शुरू कर रहे हैं। आप मेरे लिए एक ख्वाब थे जो पूरा नहीं हो सका। मैं आपसे वादा करती हूँ, एक दिन जरूर मिलूंगी। अब तक के लिए, अलविदा। - तुम्हारी अनाहिता"चिट्ठी के साथ, वह पहला 500 का नोट था, जिससे सब कुछ शुरू हुआ था।आरव का दिल टूट गया। उसने उस नोट को अपने बटुए में रख लिया, अपनी आँखों के सामने। उसने वादा किया कि जब भी वह उसे देखेगा, उसे याद दिलाता रहेगा कि एक दिन वह जरूर आएगी।अध्याय 5: पाँच साल बाद...पांच साल बीत गए। आरव अब एक सफल स्टार्टअप का मालिक बन चुका था। लेकिन उसके बटुए में वह पुराना, गीला हो चुका 500 का नोट आज भी था। उसके दोस्त उसका मजाक उड़ाते थे, लेकिन वह जानता था कि यह नोट उसके प्यार की निशानी है।एक बार, वह बिजनेस मीटिंग के लिए एक बहुत ही बड़ी कंपनी के ऑफिस पहुंचा। वहां की प्रोजेक्ट मैनेजर से मिलने गया तो उसकी सांस रुक सी गई।कैबिन में एक खूबसूरत, confident लड़की बैठी थी। उसके डेस्क पर एक छोटा सा फोटो फ्रेम था - उसमें एक डूडल था, एक चिड़िया और एक सितारा।आरव ने हड़बड़ाहट में पूछा, "आपका नाम क्या है?"लड़की ने मुस्कुराकर कहा, "अनाहिता। अनाहिता शर्मा।"आरव कुछ बोल नहीं पाया। उसने अपना बटुआ निकाला और वह पुराना, जर्जर 500 का नोट निकालकर डेस्क पर रख दिया।अनाहिता ने नोट को देखा। पहले तो उसे कुछ समझ नहीं आया, फिर उसकी नज़र उसके ऊपर बने हुए डूडल पर पड़ी। उसकी आँखें भर आईं। वह उठी। उसके हाथ कांप रहे थे।"तुम... तुम हो वह?" उसने फिसफिसाते हुए कहा।"हाँ, अनाहिता। मैं हूँ वह अजनबी। आपने कहा था न, एक दिन जरूर मिलेंगी। मैं आपका इंतज़ार कर रहा था," आरव ने आँखों में आंसू लिए हुए कहा।पता चला कि अनाहिता के पापा ने कर्ज उतारकर अपना business दोबारा शुरू किया था और अनाहिता ने अपनी पढ़ाई पूरी करके यह नौकरी हासिल की थी।अंत: दस हज़ार का प्यारउन दोनों की मुलाकात होने लगी। वे पिछले पांच सालों की कमी पूरी करने लगे। एक खूबसूरत शाम, आरव ने अनाहिता को प्रपोज़ किया।अनाहिता ने हाँ में सिर हिला दिया।शादी के दिन, जब जैसे ही मिलने का समय आया, आरव ने अनाहिता को एक गिफ्ट दिया। एक सुंदर सी बॉक्स।अनाहिता ने खोला तो अंदर वही पुरानी डायरी थी। उसमें एक नया हिसाब जोड़ा गया था। आरव ने हर महीने 500 रुपये बचाए थे, उन पांच सालों में। कुल थे - 10,000 रुपये।उसके ऊपर लिखा था:"प्यारी अनाहिता, तुमने एक 500 रुपये से मेरी जिंदगी बदल दी। यह लो, मैंने तुम्हारे लिए 10,000 रुपये जोड़े हैं। इससे हम अपने नए घर की पहली savings रखना चाहेंगे। क्योंकि तुम्हारी एक छोटी सी बचत ने मुझे सबसे बड़ा खजाना - तुम्हारा प्यार - दे दिया।"अनाहिता रो पड़ी। वह 10,000 रुपये सिर्फ एक रकम नहीं थे, वह उनकी जुदाई के पांच सालों का ए

