रिहान ने पास जाकर देखा, विक्रांत बेसुध पड़ा था, उसका सिर स्टीयरिंग पर झुका हुआ था। झटके के कारण एयरबैग्स फट चुके थे, पर विक्रांत के चेहरे पर एक अजीब सा सुकून था।
रिहान ने लड़खड़ाते हुए दरवाजा खोला और विक्रांत की कॉलर पकड़कर उसे बाहर खींचा। "उठ साले! इतनी जल्दी नहीं मरने दूँगा तुझे," रिहान ने उसे गीली जमीन पर पटक दिया।
विक्रांत के होंठों से एक हल्की कराह निकली। उसने अपनी धुंधली आँखों से रिहान को देखा और अपनी वही सिग्नेचर मुस्कान बिखेरी। "इतनी परवाह... सच में रिहान? या डर लग रहा है कि मेरे बिना इस अंधेरे में तुम्हारा क्या होगा?"
रिहान का चेहरा गुस्से से तमतमा उठा। उसने विक्रांत को एक पुराने बरगद के पेड़ से सटा दिया और उसकी गर्दन को अपने मजबूत हाथों से दबोच लिया। रिहान के हाथों की पकड़ इतनी सख्त थी कि विक्रांत की सांसें उखड़ने लगीं।
"तूने मेरे डैड को मारा और तुझे लगता है मैं तुझपर रहम करूँगा? मैं तुझे तड़पा तड़पा के मरूंगा।" रिहान की आवाज़ में किसी दरिंदे जैसी गरज थी।
विक्रांत उस हालत में भी मुस्कुराया। "ओह! तो इस बात का गुस्सा है? इतनी सी बात के लिए तुमने विक्की पर हाथ उठाने का रिस्क लिया?"
रिहान ने आव देखा न ताव, एक जोरदार मुक्का विक्रांत के जबड़े पर जड़ दिया। "छोटी बात? वो मेरे डैड थे! मेरे लिए सब कुछ थे! लेकिन अब मैं तुझे जिंदा नहीं छोड़ूँगा।"
रिहान का आपा खो चुका था। उसने विक्रांत पर मुक्कों की बारिश शुरू कर दी। विक्रांत ने एक बार भी पलटवार नहीं किया, वो बस रिहान के वार झेल रहा था, जैसे उसकी नफरत को और भड़का रहा हो।
अचानक, विक्रांत ने फुर्ती दिखाते हुए रिहान को अपनी बांहों में जकड़ लिया। उसकी पकड़ में एक अजीब सा दबाव था।
"आराम से स्वीटहार्ट... तुम थक जाओगे," विक्रांत ने उसके कान के पास फुसफुसाते हुए कहा। "वैसे जरा ये बताओ कि मैंने कब मारा तुम्हारे डैड को?"
रिहान ने झटके से खुद को छुड़ाया और चिल्लाया, "तुझे नहीं पता साले? आज सुबह तूने उनका एक्सीडेंट करवाया! मैं उनकी चिता को आग देकर आ रहा हूँ और मैंने कसम खाई है कि उनकी चिता ठंडी होने से पहले मैं तेरी चिता जलाऊँगा!"
विक्रांत की आँखों में एक चमक उभरी। "अफसोस... फिर तो तुम्हारा वादा टूट जाएगा, क्योंकि मेरी चिता जलने में अभी बहुत वक्त है।"
रिहान ने फिर से मुक्का तानना चाहा, पर विक्रांत ने रिहान की कलाई के पास एक खास नस को इतनी तेज़ी से दबाया कि रिहान का हाथ बिजली के झटके की तरह सुन्न हो गया।
"ये... ये क्या किया तूने? मुझे रिलीज कर अभी!" रिहान ने छटपटाते हुए कहा, पर उसकी बॉडी ने उसका साथ छोड़ दिया था।
विक्रांत मुस्कुराया। उसने पास पड़ी अपनी गन उठाई और रिहान के माथे पर तानते हुए कहा, "तो अब बताओ... किसकी चिता जलेगी? मैंने कहा था ना, मेरी मर्जी के बिना तुम मुझे हाथ भी नहीं लगा सकते। तुम अभी बच्चे हो, और बच्चे Daddy के सामने अदब से पेश आते हैं।"
रिहान की आँखों में अंगारे दहक रहे थे। "एक बार रिलीज कर कमीनें, फिर बताता हूँ कौन बाप है!"
विक्रांत ने गन का बैरल रिहान की खाल पर और जोर से दबाया। "अरे, मौत सामने खड़ी है पर एटीट्यूड देखो। अगर ये गोली चली, तो तुम्हारा भेजा उड़ जाएगा रिहान।"
रिहान की आँखों में खौफ का नामोनिशान नहीं था। "दम है तो चला गोली!"
विक्रांत ने ट्रिगर पर उंगली कसी। दोनों की आँखें एक-दूसरे में धंसी हुई थीं—एक तरफ सुलगता हुआ इंतकाम था और दूसरी तरफ एक गहरा, काला जुनून। विक्रांत ने ट्रिगर दबाया।
क्लिक!
सन्नाटा छा गया। गन खाली थी।
विक्रांत ठहाका मारकर हँसा। "एक ही दिन में पूरे रायचंद खानदान को मारने में मजा नहीं आएगा। जा, तुझे छोड़ दिया।"
उसने रिहान के गाल को थपथपाया और अंधेरे जंगल की तरफ बढ़ने लगा।
रिहान पीछे से चिल्लाया, "कहाँ जा रहा है? रुक जा साले!"
जैसे ही विक्रांत की पकड़ ढीली हुई, कुछ ही मिनटों में रिहान की बॉडी फिर से नॉर्मल हो गई। उसकी रगों में दौड़ता खून फिर से उबलने लगा। "इसकी मौत मेरे ही हाथों होगी," यह बुदबुदाते हुए रिहान एक घायल तेंदुए की तरह विक्रांत के पीछे जंगल में भागा।
"कहाँ गया ये शेखावत? आज मैं इसे मार कर ही दम लूँगा!" रिहान पागलों की तरह झाड़ियों को हटाते हुए आगे बढ़ रहा था। उसे विक्रांत की वो मुस्कान किसी जहर की तरह चुभ रही थी।
तभी उसे दूर कुछ टॉर्च की रोशनी दिखाई दी। रिहान तुरंत एक घने बरगद के पेड़ के पीछे छिप गया। उसने अपनी सांसें रोक लीं और झाड़ियों के बीच से झाँका। सामने का नजारा देखकर उसके पैरों तले जमीन खिसक गई। उसके मुँह से बस एक ही शब्द निकला, "अंकल? ये यहाँ क्या कर रहे हैं?"
सामने उसके सगे चाचा, विक्रम रायचंद, अपने 20 हथियारबंद गुंडों के साथ खड़े थे। विक्रम के चेहरे पर वो हमदर्दी नहीं थी जो उसने सुबह अंतिम संस्कार के वक्त दिखाई थी।
विक्रम ने अपने आदमियों की तरफ देखते हुए कड़क आवाज़ में कहा, "वो रिहान इसी जंगल में है। सुबह होने से पहले उसकी लाश मेरे सामने होनी चाहिए। जाओ और उसे खत्म कर दो!"
"जी सरकार!" सभी गुंडे अलग-अलग दिशाओं में फैल गए।
विक्रम के बगल में खड़ा उसका सेक्रेटरी नीचता भरी हँसी हँसा। "कल सुबह का सूरज आपके लिए नई रोशनी लाएगा सर। रिहान की कब्र पर आप रायचंद खानदान के नए लीडर बनेंगे और अंडरवर्ल्ड में हमारी पुरानी साख वापस आएगी।"
विक्रम ने सिगार सुलगाया और धुएं का गुबार छोड़ते हुए बोला, "रिहान को लगा कि वो रायचंदों का वारिस है... उसे नहीं पता कि सिंहासन सिर्फ ताकतवर के पास रहता है, वारिसों के पास नहीं।"
पेड़ के पीछे खड़े रिहान की मुट्ठियाँ भिंच गईं। उसकी आँखों में खून उतर आया था। "इन्हें कैसे पता चला कि मैं यहाँ हूँ? जरूर उस विक्रांत की चाल होगी। उसने मुझे यहाँ फँसाया ताकि उसके रास्ते से रायचंद हट जाएँ। तुझे तो मैं छोड़ूँगा नहीं विक्रांत!"
रिहान ने वहां से निकलना ही बेहतर समझा। वो दबे पाँव जंगल की दूसरी तरफ भागा। आधी रात बीत चुकी थी और चाँद अब ठीक सर के ऊपर चमक रहा था, जैसे इस खूनी खेल का गवाह बन रहा हो। तभी अचानक रिहान के कानों में एक भारी आवाज़ पड़ी।
"वो रहा साला! पकड़ो उसे!"
विक्रम के आदमियों ने उसे देख लिया था। 20 से ज्यादा शिकारी अब रिहान के पीछे थे। रिहान अपनी पूरी जान लगाकर भाग रहा था। झाड़ियाँ उसके कपड़ों को फाड़ रही थीं, कांटों से उसके हाथ-पैर छिल रहे थे, लेकिन वो नहीं रुका।
भागते-भागते उसे सामने एक खंडहरनुमा पुरानी इमारत दिखी—शायद ब्रिटिश जमाने की कोई जेल या गोदाम था।
रिहान बिना सोचे उसके अंदर घुस गया, लेकिन वो उसकी सबसे बड़ी गलती थी। गुंडों ने कुछ ही पलों में उस इमारत को चारों तरफ से घेर लिया। रिहान चारों तरफ से घिर चुका था। गोलियों की गूँज और जूतों की आहट अब बिल्कुल करीब थी।
मौत दरवाजे पर उसका इन्तजार कर रही थी।