Ch- 5 THE LIQUID FIRE

1806 Words
रिहान ने अपनी मुट्ठियाँ भींचीं और नफरत से उसे घूरा। "पिंजरा? तुझे सच में लगता है कि तू मुझे यहाँ कैद करके रख सकता है? मैं तेरी नाक के नीचे से उड़ जाऊँगा और तुझे पता भी नहीं चलेगा, विक्रांत।" विक्रांत के चेहरे पर एक डार्क और शरारती मुस्कान उभरी। वो रिहान के इतना करीब आ गया कि उनकी सांसें आपस में उलझने लगीं। "ओह स्वीटहार्ट... तुम बहुत क्यूट हो। सच कहूँ तो मैं तुम्हें ज्यादा देर कैद रख भी नहीं सकता, वर्ना तुम्हारी इस क्यूटनेस से कहीं मैं ही ना मर जाऊँ।" "मरेगा तो तू ज़रूर... और मेरे ही हाथों से। देख लेना," रिहान ने उसके सीने पर हाथ रखकर उसे पीछे धकेलने की कोशिश की। विक्रांत मुस्कुराया और पीछे हटते हुए अलमारी की ओर बढ़ा। "बस आज रात के लिए रुक जाओ। कल सुबह मैं खुद तुम्हें तुम्हारे घर छोड़ दूँगा। तब तक के लिए, ये लो कुछ कपड़े और जाकर शावर ले लो। तुम काफी थक गए हो।" रिहान ने नफरत से मुँह फेरा और कमरे के कोने में रखे मखमली सोफे पर धप से बैठ गया। उसने अपने जूते उतारे और पैर टेबल पर टिका दिए। "Let's have a drink," रिहान ने सपाट आवाज़ में कहा। विक्रांत के हाथ अलमारी पर ही रुक गए। उसने मुड़कर रिहान को देखा और अपनी भौहें सिकोड़ीं। "क्या?? स्वीटहार्ट, तुम्हें चोट लगी है और तुम बहुत थके हुए भी हो। ऐसे में ड्रिंक करना ठीक नहीं है।" रिहान ने उसे ऐसी नज़र से घूरा जैसे वो उसे अभी कच्चा चबा जाएगा। "मेरी चिंता करना बंद करो शेखावत। बस वो बोतल निकालो, वरना मैं खुद अपना रास्ता ढूंढ लूँगा।" विक्रांत ने एक ठंडी सांस ली। "ठीक है, जैसी तुम्हारी मर्जी।" विक्रांत ने अपनी प्राइवेट बार कैबिनेट खोली और अपनी फेवरेट 'ब्लैक लेबल' की बोतल निकाली। उसने दो क्रिस्टल ग्लास मेज पर रखे और अपने ग्लास में शराब डालने लगा। इससे पहले कि वो रिहान के ग्लास की तरफ बढ़ता, रिहान ने झटके से उसके हाथ से पूरी बोतल छीन ली। "ग्लास बच्चों के लिए होते हैं," रिहान ने कहा और सीधे बोतल का ढक्कन खोलकर उसे अपने मुँह से लगा लिया। विक्रांत की आँखें फैल गईं। उसने रिहान का हाथ पकड़ने की कोशिश की। "Are you crazy? ये बहुत पावरफुल है रिहान, तुम इसे झेल नहीं पाओगे। बस करो!" रिहान ने पूरी ताकत से विक्रांत को खुद से दूर धकेला और बिना पलक झपकाए आधी से ज़्यादा बोतल गटक गया। तेज शराब की जलन उसके गले से होते हुए सीने तक उतरी, लेकिन उसने चेहरे पर शिकन तक नहीं आने दी। उसने खाली बोतल टेबल पर पटकी और अपनी आस्तीन से मुँह पोंछा। विक्रांत उसे बस देखता रह गया। रिहान की आँखों में अब एक नशीली और खतरनाक चमक थी। रिहान उठा, बेड पर रखे कपड़े उठाए और बिना विक्रांत की तरफ देखे सीधे शावर लेने चला गया। बाथरूम का दरवाज़ा एक धमाके के साथ बंद हुआ, जिसकी गूँज पूरे कमरे में फैल गई। विक्रांत अभी भी वहीं खड़ा था, खाली बोतल को देख रहा था। उसके होंठों पर एक ऐसी मुस्कान आई जो किसी गहरे राज़ जैसी थी। उसने धीरे से बुदबुदाया, "You are a beautiful disaster, Rihan... and I am addicted to the chaos." बाथरूम किसी महल के हिस्से जैसा था—आलीशान और विशाल। एक तरफ कांच की बड़ी दीवार थी जहाँ से बेडरूम का हिस्सा धुंधला सा दिखता था। रिहान ने आईने में खुद को देखा, उसकी आँखें लाल थीं और जिस्म पर चोट के निशान थे। उसने धीरे-धीरे अपने कपड़े उतारे और ठंडे पानी से भरे बाथटब में लेट गया। पानी की ठंडक उसके दिमाग की आग को कम करने की कोशिश कर रही थी। तभी, अचानक बाथरूम का दरवाजा खुला। रिहान की आँखें फटी की फटी रह गईं। विक्रांत अंदर दाखिल हुआ, और उसके बदन पर एक भी कपड़ा नहीं था। उसका तराशा हुआ जिस्म और उसकी आँखों में छिपा वो पागलपन रिहान के होश उड़ाने के लिए काफी था। "ये... ये क्या बदतमीजी है? तुम यहाँ क्या कर रहे हो? तुम्हारे कपड़े कहाँ हैं?" रिहान ने घबराते हुए पानी के अंदर खुद को सिकोड़ा। विक्रांत के चेहरे पर एक शिकारी की मुस्कान थी। वो धीरे से बाथटब की तरफ बढ़ा। "Is not it... I'm looking too sexy?" वो बिना किसी हिचकिचाहट के बाथटब के अंदर उतर गया। रिहान चिल्लाया, "ये क्या कर रहे हो! अगर तुम्हें शावर लेना था तो बोल देते, मैं बाद में आ जाता!" रिहान जैसे ही टब से बाहर निकलने के लिए उठा, विक्रांत ने बिजली की फुर्ती से उसे दबोच लिया। उसने रिहान को अपनी बांहों में जकड़ कर वापस टब की दीवार से सटा दिया। पानी की बूंदें उनके जिस्मों पर फिसल रही थीं। रिहान ने शर्म और गुस्से के मारे अपनी आँखें झुका लीं। "छोड़ मुझे विक्रांत... ये गलत है।" "गलत और सही की परिभाषा मैंने बहुत पहले जला दी थी रिहान," विक्रांत की आवाज़ अब बहुत भारी और 'Seductive' हो गई थी। उसने रिहान की ठुड्डी पकड़कर उसका चेहरा अपनी तरफ किया। "तुम्हारी ये नफरत... ये गुस्सा... ये सब झूठ है। तुम्हारी धड़कनें कुछ और ही कह रही हैं।" विक्रांत ने रिहान के गीले बालों को पीछे हटाया और उसके गले पर अपनी गर्म सांसें छोड़ीं। रिहान का पूरा शरीर कांप उठा। वो लड़ना चाहता था, उसे मुक्का मारना चाहता था, लेकिन उसकी अपनी 'Desire' उसे धोखा दे रही थी। विक्रांत के जिस्म की गर्मी और उसकी खुशबू रिहान के दिमागी संतुलन को बिगाड़ रही थी। "I told you... I don't care about anything, I just want you," विक्रांत ने फुसफुसाते हुए अपने होंठ रिहान के होंठों के इतने करीब लाए कि उनके बीच की दूरी एक महीन धागे जैसी रह गई। रिहान का गुस्सा उस पल बर्फ की तरह पिघलने लगा था, लेकिन अचानक उसकी रगों में रायचंदों का वो पुराना गरूर जाग उठा। उसने अपनी पूरी ताकत बटोरी और विक्रांत को अपने सीने से झटके से दूर धकेला। टब का पानी चारों तरफ बिखर गया। "Are you crazy? तुम्हें अंदाज़ा भी है कि तुम अभी क्या करने वाले थे?" रिहान की आवाज़ गूँजी, उसकी छाती तेज़ी से ऊपर-नीचे हो रही थी। वो पानी से बाहर निकलने की कोशिश करने लगा। लेकिन विक्रांत? वह किसी भूखे शिकारी की तरह था जो अपने शिकार को इतनी आसानी से जाने नहीं देता। वो फिर से रिहान पर हावी हो गया और उसे दोबारा टब की ठंडी दीवार से सटा दिया। "I know exactly what I'm doing, baby... और तुम्हें भी पता है कि तुम यही चाहते हो।" विक्रांत ने बिना उसे संभलने का मौका दिए अपनी पकड़ और सख्त कर ली। उसने अपना चेहरा रिहान के गले में धंसा दिया और उसकी नाजुक खाल को अपनी जीभ से lick किया और फिर अचानक एक गहरा 'Bite' कर लिया। "आह!" रिहान के होंठों से एक दर्द भरी कराह निकली, जो धीरे-धीरे एक सिसकी में बदल गई। दर्द और मजे का एक अजीब सा मिश्रण उसके पूरे शरीर में बिजली की तरह दौड़ गया। विक्रांत ने रिहान के दोनों हाथों को पकड़कर टब के किनारे पर पिन कर दिया। रिहान अब पूरी तरह बेबस था। "Stop it vikki! हम दोनों मर्द हैं... तुम्हारा दिमाग खराब हो गया है। ये मुमकिन नहीं है!" विक्रांत धीरे से हँसा, उसकी आँखों में वो 'Dark Obsession' साफ झलक रहा था। "So what? तुम्हें मर्द पसंद हैं और मुझे तुम... doesn't it make it interesting, hmm?" विक्रांत ने रिहान की ठुड्डी पर धीरे से काटा और फिर उसके कान की लौ को चूमते हुए उसे अपनी जीभ से सहलाया। रिहान का शरीर अब उसके वश में नहीं रहा था। उसका गुस्सा, उसकी नफरत, और उसका बदला... सब कुछ उस गर्म पानी और विक्रांत की छुअन के नीचे दफ़्न होता जा रहा था। रिहान अब लड़ने के बजाय पिघलने लगा था। उसकी आँखों के सामने अंधेरा छाने लगा, सिर्फ विक्रांत का एहसास ही सच लग रहा था। विक्रांत ने रिहान की आँखों में देखते हुए कहा, उसकी आवाज़ में एक ऐसी गहराई थी जो रूह को चीर दे। "पता नहीं ये पल फिर मिले न मिले, पर आज रात, तुम सिर्फ मेरे हो रिहान। कोई रायचंद नहीं, कोई शेखावत नहीं... सिर्फ हम।" रिहान का जिस्म पानी और भावनाओं के भंवर में कांप रहा था। उसने एक आखिरी बार अपनी नफरत को ढाल बनाने की कोशिश की। "तुम कल पछताओगे इसके लिए विक्रांत..." रिहान के होंठों से एक सिसकी निकली। विक्रांत के चेहरे पर एक डार्क, कातिलाना मुस्कान उभरी। "I never regret loving you, I just want you now." विक्रांत ने अपने गीले हाथ रिहान के चेहरे पर रखे और उसके होंठों पर अपनी उंगली टिका दी, जैसे उसे खामोश रहने का आदेश दे रहा हो। कमरे की रौशनी मद्धम थी, और उस आलीशान बाथरूम में सिर्फ उनकी भारी सांसों का शोर था। रिहान ने धीरे-धीरे अपनी आँखें मूँद लीं। उसका शरीर अब विक्रांत की पनाह में था। उसने पूरी तरह सरेंडर कर दिया था। उस पल नफरत हार गई थी और एक अनकहा, गहरा खिंचाव जीत गया था। विक्रांत कुछ पल के लिए ठिठका। उसने रिहान के मासूम और मदहोश चेहरे को देखा, जहाँ पानी की बूंदें उसके होंठों पर ठहरी हुई थीं। विक्रांत ने रिहान को नहीं चूमा। उसने बस रिहान को गहराई से देखा, जैसे वो इस पल को अपनी यादों में कैद कर रहा हो। अचानक, विक्रांत मुस्कुराया और अपनी पकड़ ढीली कर दी। रिहान ने धीरे से अपनी आँखें खोलीं, उसकी नज़रों में उलझन थी। विक्रांत बिना कुछ कहे टब से बाहर निकलने लगा। उसके शरीर से गिरता पानी फर्श पर टपक रहा था। इससे पहले कि विक्रांत बाहर कदम रखता, रिहान ने झटके से उसका हाथ पकड़ लिया। रिहान की आँखों में एक बड़ा सवाल था—'तुम रुक क्यों गए?' विक्रांत ने पलटकर देखा और उसकी आवाज़ में एक अजीब सी नरमी थी। "तुम अभी नशे में हो स्वीटहार्ट... और मैं नहीं चाहता कि कल सुबह जब तुम्हारा नशा उतरे, तो तुम खुद से नफरत करो। हम कल सुबह बात करते हैं।" रिहान के स्वाभिमान को जैसे किसी ने चुनौती दे दी हो। शराब का नशा अब उसके दिमाग से उतरकर उसकी रगों में आग बनकर दौड़ रहा था। उसने विक्रांत का हाथ अपनी तरफ ज़ोर से खींचा, जिससे विक्रांत वापस टब के किनारे पर आ गिरा। रिहान की आवाज़ में एक जंगलीपन था। उसने विक्रांत की आँखों में आँखें डालकर कहा, "अब बहुत देर हो चुकी है विक्की... तुमने जो आग लगाई है, उसे बुझाना तो पड़ेगा ही।" रिहान ने विक्रांत को अपने और करीब खींच लिया। विक्रांत सन्न रह गया। उसने कभी नहीं सोचा था कि शिकार खुद शिकारी को दावत देगा। कमरे की मद्धम रोशनी में रिहान का चेहरा किसी 'Dark Angel' जैसा लग रहा था। विक्रांत के होंठों पर एक कातिलाना मुस्कान आई। उसने रिहान की कमर पर हाथ रखा और फुसफुसाया, "Be careful what you wish for, Rihan... क्योंकि इस आग में हम दोनों जलने वाले हैं।" बाहर बारिश की गूँज तेज़ हो रही थी, लेकिन उस बंद बाथरूम के अंदर एक ऐसा तूफान शुरू होने वाला था जिसे रोकने की ताकत अब किसी में नहीं थी। To be continued.......
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