गाड़ी जैसे ही पुलिस स्टेशन की ऊंची दीवारों के सामने रुकी, हवा में एक अजीब सा भारीपन छा गया।
रिहान ने खिड़की से बाहर देखते हुए ठंडी आवाज़ में कहा, "तुम्हारे साथ जाने से बेहतर है कि मैं जेल चला जाऊँ। और वैसे भी, ये पुलिस वाले मुझे यहां कितने ही दिन तक रख पाएंगे? मेरे लॉयर्स की टीम एक फोन कॉल की दूरी पर है।"
विक्रांत ने अपनी सिल्क की शर्ट के कफ्स ठीक किए और गाड़ी से उतरते हुए कहा, "देखो रिहान, हकीकत को समझने की कोशिश करो। इस वक्त तुम्हारी माफिया फैमिली पूरी तरह टूट चुकी है। लीडर मर चुका है और हर कोई इस होड़ में लगा है कि उस खाली कुर्सी पर कौन बैठेगा। तुम्हारे अपने सगे खून के प्यासे हैं। इस वक्त दुनिया की कोई भी जेल या कोई भी कोना तुम्हारे लिए सेफ नहीं है... सिवाय मेरे साये के।"
"उसका ध्यान मैं खुद रख लूँगा," रिहान ने दांत पीसते हुए जवाब दिया और गाड़ी का दरवाजा खोलकर बाहर निकल गया।
स्टेशन के अंदर का माहौल टेंस था। एक बंद कमरे में सिर्फ तीन लोग मौजूद थे—DGP, रिहान और विक्रांत। मेज पर रखी पीली रोशनी रिहान के चेहरे पर पड़ रही थी, जिससे उसका गुस्सा और भी साफ़ दिख रहा था।
DGP ने फाइल खोलते हुए कहा, "मिस्टर रिहान, आप पर अंडरवर्ल्ड का नया मास्टरमाइंड होने के गंभीर चार्जेस हैं। हमारे पास ऊपर से ऑर्डर्स हैं कि आपको देखते ही एनकाउंटर कर दिया जाए। आप एक चलते-फिरते खतरे की तरह हैं।"
विक्रांत ने तुरंत हस्तक्षेप किया, "लेकिन सर, मैंने आपसे पहले भी कहा था कि रिहान इस सब में इन्वॉल्व नहीं है। वो तो खुद इस हिंसा से दूर रहना चाहता है।"
DGP ने चश्मा उतारकर विक्रांत की ओर देखा। "विक्रांत जी, देखिये... रिकॉर्ड्स के मुताबिक इसी शख्स ने आपको किडनैप किया है, आपकी जान को खतरा पहुँचाया है, फिर भी आप इसकी तरफदारी कर रहे हैं? यह कानून की समझ से परे है।"
तभी रिहान अपनी कुर्सी को पीछे धकेलते हुए खड़ा हो गया।
उसने मेज पर अपने दोनों हाथ टिकाए और DGP की आँखों में आँखें डालकर बोला, "बंद करिए अपना ये नाटक! मुझे पता है कि तुम सब मिले हुए हो। ये शख्स जो देश का सबसे बड़ा 'White-Coat' बिजनेसमैन बना बैठा है, आपको क्या लगता है इसके हाथ बहुत साफ़ हैं?"
रिहान ने अपनी उंगली विक्रांत की तरफ तानी और गरजते हुए कहा, "हाँ, मैंने इसे किडनैप किया! और मेरा बस चले तो मैं अभी इसे मौत के घाट उतार दूँगा, क्योंकि इसी ने मेरे डैड का खून किया है!"
पूरे कमरे में सन्नाटा छा गया। DGP का चेहरा सख्त हो गया। "मिस्टर रिहान, क्या आप जानते हैं कि आप किस पर और क्या इल्जाम लगा रहे हैं? विक्रांत जी का समाज में एक रुतबा है, और वो यहाँ आपको बचाने आए हैं।"
"ये मुझे बचाएगा? ये?!" रिहान पागलों की तरह हँसा, एक ऐसी हँसी जिसमें दर्द और नफरत दोनों थे। "मेरे डैड ने मरने से पहले आखिरी कॉल इसे ही किया था। एक्सीडेंट के वक्त इसकी कार की लोकेशन डैड की कार से मैच हो रही है। तीन दिन पहले इसने डैड को धमकी दी थी कि अगर इसका 'कंसाइनमेंट' पूरा नहीं हुआ, तो ये हम सबको मिटा देगा!"
रिहान का गला रुंध गया था पर आवाज़ अभी भी बुलंद थी। "ये जो पूरी दुनिया पर राज करना चाहता है, जो अंडरवर्ल्ड का असली बादशाह बनना चाहता है... आप कह रहे हैं कि ये मुझे बचा रहा है? इसका बस चले तो ये मुझे अभी मारकर उस कुर्सी पर बैठ जाए। ये उन भेड़ियों से कम नहीं जो मेरा खून पीना चाहते हैं, बस इसका तरीका थोड़ा 'कॉर्पोरेट' है।"
विक्रांत खामोश रहा, उसके चेहरे पर कोई भाव नहीं था।
रिहान ने DGP की तरफ रुख किया। "DGP सर, आपको मुझपर यकीन हो या न हो, मुझे फर्क नहीं पड़ता। लेकिन मैंने कुछ गलत नहीं किया। और अगर फिर भी आप मुझे जेल भिजवाना चाहते हैं, तो शौक से भिजवाइये।
लेकिन याद रखियेगा, आपका कानून मुझे वहाँ ज्यादा दिन तक रोक नहीं पाएगा। रायचंदों की सलाखें बाहर नहीं, लोगों के दिमाग में होती हैं।"
कमरे में तनाव इतना बढ़ गया था कि लग रहा था जैसे कोई चिंगारी सब कुछ राख कर देगी।
विक्रांत खड़ा हुआ और रिहान के कंधे पर हाथ रखने की कोशिश की, जिसे रिहान ने झटक दिया। विक्रांत ने DGP से कहा, "सर, ये अभी सदमे में है। इसे मेरे हवाले कर दीजिये, मैं इसकी पूरी जिम्मेदारी लेता हूँ।"
"तू मेरी जिम्मेदारी लेगा? साले, मैं खुद को सरेंडर कर रहा हूँ! मुझे तेरी किसी भीख की ज़रूरत नहीं है," रिहान दहाड़ा, उसका गला नफरत से भर चुका था।
विक्रांत ने उसकी बात को पूरी तरह अनसुना कर दिया और DGP की ओर मुड़ा। उसने लगभग ऑर्डर देते हुए कहा, "सर, मैंने आपसे जो कहा वही कीजिये। मैंने ऊपर तक बात संभाल ली है। आप इस मामले को यहीं दबा दीजिये और फाइलों को बंद कर दीजिये।"
DGP के चेहरे पर झिझक थी। "लेकिन सर? यह कानूनी रूप से..."
विक्रांत ने अपनी आँखें थोड़ी सिकोड़ीं और DGP की ओर एक ऐसी नज़र से देखा कि उनके शब्द उनके गले में ही फंस गए। कमरे में सन्नाटा छा गया।
वो सन्नाटा जिसमें विक्रांत की ताकत साफ़ झलक रही थी। DGP ने बिना कुछ कहे अपना सिर झुका लिया और फाइलों पर दस्तखत कर दिए।
"मैं तेरे साथ कहीं नहीं जाऊंगा विक्रांत!" रिहान ने चिल्लाकर कहा, लेकिन विक्रांत ने बिजली की फुर्ती से उसका हाथ मरोड़ा और उसे जबरदस्ती घसीटते हुए बाहर खड़ी कार की ओर ले गया।
रिहान ने विरोध किया, पैर पटके, लेकिन विक्रांत के बॉडीगार्ड्स के घेरे ने उसे हिलने तक का मौका नहीं दिया। विक्रांत ने उसे कार के अंदर धकेला, दरवाज़ा लॉक किया और खुद ड्राइविंग सीट संभाल ली।
गाड़ी जैसे ही हाईवे पर चढ़ी, रिहान ने झपट्टा मारकर ब्रेक और स्टीयरिंग की तरफ हाथ बढ़ाया। गाड़ी तेज़ी से डगमगाई। "मुझे कहीं नहीं जाना है , गाड़ी रोको!"
विक्रांत ने एक हाथ से स्टीयरिंग संभाला और दूसरे हाथ से रिहान की गर्दन दबोच कर उसे सीट से सटा दिया। "बस... बहुत हो गया तुम्हारा ड्रामा रिहान! अब ज़रा इसे देखो।"
विक्रांत ने अपनी जेब से फोन निकाला और एक वीडियो प्ले करके रिहान के सामने कर दिया। स्क्रीन पर एक छोटी सी मासूम बच्ची, रायना, एक आलीशान कमरे में खिलौनों के साथ खेल रही थी। उसे अंदाज़ा भी नहीं था कि उस पर मौत का साया मंडरा रहा है।
रिहान के चेहरे से रंग उड़ गया। उसकी आवाज़ कांपने लगी। "ये... ये क्या है? तुम लोगों ने क्या किया रायना के साथ? अगर उसे एक खरोंच भी आई तो मैं तुझे जिंदा नहीं छोडूंगा!"
विक्रांत ने फोन वापस जेब में रखा और गाड़ी की रफ्तार बढ़ा दी। "अभी तक उसे कुछ नहीं हुआ है, लेकिन अगर तुमने अब और ज्यादा नौटंकी की, तो उसका भी वही हाल होगा जो आज सुबह तुम्हारे डैड का हुआ है। अब चुपचाप बैठो, वरना..."
रिहान पूरी तरह टूट चुका था। उसकी रगों में दौड़ता गुस्सा अब बेबसी में बदल गया था। वो शांत होकर सीट से लग गया, उसकी आँखें खिड़की के बाहर अंधेरे को देख रही थीं, लेकिन दिमाग में रायना की सलामती की दुआएँ चल रही थीं।
गाड़ी शेखावत हवेली के विशाल गेट्स के अंदर दाखिल हुई। जैसे ही वे अंदर पहुंचे, विक्रांत के माता-पिता—नीलिमा और वरुण शेखावत बाहर आए।
"बेटा! तू ठीक है ना?" नीलिमा ने विक्रांत का चेहरा थामते हुए पूछा। फिर उनकी नज़र रिहान पर पड़ी। उनके चेहरे पर नफरत उभर आई। "ये... ये तो वही है जिसने तुझे किडनैप किया था? ये यहाँ तेरे साथ क्या कर रहा है?"
वरुण शेखावत का पारा चढ़ गया। "मैं अभी पुलिस को कॉल करता हूँ। इस अपराधी की हिम्मत कैसे हुई हमारे घर में कदम रखने की?"
"रुक जाइये डैड!" विक्रांत ने सख्त लहजे में कहा। "आप लोग जैसा समझ रहे हैं, वैसा कुछ नहीं है। इसने मुझे किडनैप नहीं किया था।"
विक्रांत ने पास खड़े अपने भरोसेमंद सेक्रेटरी, समीर, की ओर इशारा किया। "समीर, इसे ले जाओ और मेरे कमरे में छोड़ दो। इसकी सुरक्षा में कोई कमी नहीं होनी चाहिए।"
समीर आगे बढ़ा। "चलिए सर, इस तरफ।"
रिहान अपनी जगह से टस से मस नहीं हुआ। उसकी और विक्रांत की आँखें एक बार फिर टकराईं। विक्रांत की आँखों में एक अजीब सी ownership थी। रिहान ने अपनी मुट्ठियाँ भींचीं और तेज़ कदमों से समीर के पीछे चल दिया।
जब वे चले गए, तो विक्रांत ने अपने पिता की ओर देखा। "डैड, मुझे आपसे अकेले में बात करनी है।"
विक्रांत ने वरुण को गहराई से समझाया, "रिहान की जान इस वक्त खतरे में है। उसके अपने अंकल उसे मारना चाहते हैं। मैं उसे इस हालत में अकेला नहीं छोड़ सकता। वो इस खेल का सबसे ज़रूरी मोहरा है।"
वरुण ने उसे गौर से देखा और धीमी आवाज़ में पूछा, "क्या ये वो लड़का है जिसके बारे में तुमने बताया था?"
विक्रांत की आँखों में एक डार्क चमक आई। "हाँ डैड, ये वही है।"
वरुण ने एक लम्बी सांस ली। "ठीक है बेटा, तुम वही करो जैसा तुम्हें सही लगे। लेकिन अगर इसने तुम्हें या हमारी फैमिली को ज़रा भी नुकसान पहुँचाया, तो मैं इसे खुद खत्म कर दूँगा।"
विक्रांत मुस्कुराया, " उसकी नौबत नहीं आएगी डैड।"
उधर, रिहान विक्रांत के आलीशान बेडरूम में पहुँच चुका था। कमरे की सजावट बहुत ही 'मस्कुलर' और 'डार्क' थी। काले और ग्रे रंग के इंटीरियर के बीच रिहान खुद को फंसा हुआ महसूस कर रहा था।
तभी विक्रांत अंदर दाखिल हुआ उसने कमरे का दरवाजा अंदर से बंद किया और भारी पीतल का लॉक घुमा दिया। कमरे की मद्धम पीली लाइट रिहान के चेहरे पर पड़ रही थी, जिससे उसके माथे की उभरी हुई नसें साफ़ दिख रही थीं। विक्रांत ने अपनी जैकेट उतारकर बेड पर फेंकी और धीमी, सधी हुई चाल से रिहान की तरफ बढ़ने लगा।
"तो रिहान स्वागत है तुम्हारा, इस नए पिंजरे में।"
"विक्रांत रिहान के इतना करीब आ गया कि उनकी सांसें आपस में टकराने लगीं। उसने रिहान के गले में हाथ डाला और उसकी आँखों में गहराई से देखते हुए फुसफुसाया।
"यहाँ कोई नियम नहीं हैं रिहान, सिवाय मेरे। आज रात, तुम्हें ये तय करना होगा कि तुम मेरे दुश्मन बनोगे... या मेरे गुलाम।"
रिहान के हाथ कांप रहे थे, इंतकाम और बेबसी के बीच फँसे हुए। उसे समझ नहीं आ रहा था कि उसे विक्रांत को मार देना चाहिए या रायना की जान बचाने के लिए उसके सामने घुटने टेक देने चाहिए।
To be continued.....