भूतो का कहार

4809 Words
दिवाली की खौफनाक रात कहानी दिवाली की वो खौफनाक रात, सब लोग यह तो जानते है की दिवाली जगमगाती रोशनी और लाइट्स का त्यौहार है। पर जो ज्यादा तर लोग नहीं जानते वो ये है की दिवाली की रात अमावस्या की रात होती है और हर अमावस्या की रात काली शक्तिया सबसे ज्यादा ताक़तवर हो जाती है। लेकिन 19 साल का सुमित इस बात से अनजान था वह अपने दोस्त विजय से साथ दिवाली की रात सड़क पर घूम रहा था तभी विजय की नज़र मंदिर के पीछे एक सुनसान से घर के पीछे गयी वहा एक सुन्दर लड़की लाल साड़ी पहनी दिया जला रही थी। विजय सुमित को लेकर उस घर के पास चला गया जैसे ही दोनों वहा पहुंचे उन्होंने देखा की पूरा घर दियो से सजा था। उन्हें बालकनी में खड़ी वह सुन्दर लड़की नजर आयी। उसने फिर वही मन लुभाने वाली मुश्कान देकर उन दोनों को अंदर बुलाने का इसारा दिया। घर अंदर से भी उतना ही खूबसूरत सजा हुआ था जितना की बाहर से, मेज पर खाने के लिए अलग-अलग चीज़े रखी हुयी थी। सुमित मेज से एक लड्डू उठाकर खाने लगा पर उसके हाथ से गलती से वह निचे गिर गया जैसे ही सुमित लड्डू उठाने के लिए निचे झुका उसने देखा की मेज के निचे एक भयानक काली परछाई थी जो सुमित को देखते ही कही गायब हो गयी। सुमित जैसे ही विजय को यह बताने ऊपर उठा उसने देखा की विजय सीढ़ियों के ऊपर खींचा चला जा रहा था सुमित बेहद घबड़ाने लगा था। फिर अचानक घर में पायल की आवाजे आने लगी जैसे की कोई लड़की एक कमरे से दूसरे कमरे में जा रही हो। सुमित उस आवाज के पीछे-पीछे सीढ़ियों से ऊपर चला गया लेकिन ऊपर जाते ही उसे कमरे के अंदर पंखे से लटकी हुयी एक लाश दिखी। सुमित उस लाश का चेहरा देखकर बुरी तरह कापने लगा क्योकि वो किसी और की नहीं बल्कि विजय की ही लाश थी। सुमित डरते-डरते पीछे मुड़ा तो उसके ठीक सामने वही सुन्दर लड़की खड़ी थी और उसे देखकर मुस्कुरा रही थी। पर इस बार सुमित को वह मुश्कान मन लुभाने वाली नहीं बल्कि बेहद डरावनी लग रही थी। अचानक घर की सारी लाइट्स बंद हो गयी वह घर धीरे-धीरे एक खंडहर में बदल गया। वह लड़की अब भी सुमित को देखकर मुस्कुरा रही थी। अचानक लाल साड़ी पहनी हुयी उस लड़की के बाल सफ़ेद और लम्बे होने लगे और आँखे एकदम लाल पड़ गयी और चेहरा एकदम डरावना हो गया था। सुमित उसे देखकर एकदम सुन्न पड़ गया था वह लड़की हाथ में चाकू लिए सुमित की तरफ बढ़ रही थी सुमित ने किसी तरह अपना होश संभाला और बिना कुछ सोचे सीधा घर से बाहर भागा लेकिन वह लड़की अभी भी सुमित के पीछे पीछे आ रही थी । वह लड़की सुमित को मारने के लिए अपना हाथ उसकी तरफ बढ़ाया लेकिन सुमित तब तक बाहर निकल गया था। उसने जल्दी से घर का दरवाजा बाहर से बंद कर लिया। वह लड़की उस दरवाजे को अंदर से बहुत ही तेज़ से ठोक रही थी। लेकिन अचानक ठोकने की आवाज बंद हो गयी और फिर सुमित को उस लड़की की चीखने की आवाज सुनाई देने लगी जैसे वह उस घर के अंदर कैद हो गयी हो। सुमित वहा से जल्दी से निकला और अपने घर जाकर चुपचाप सो गया। अगली सुबह जब सुमित उठा तो उसकी माँ ने बताया की उसका दोस्त विजय कल रात से लापता है तब सुमित ने पूरा किस्सा अपनी माँ को बताया। माँ ने उससे कहा की कई साल पहले दिवाली की रात एक लड़की ने उस घर में आत्महत्या की थी तब से उसकी आत्मा उसी घर में भटकती रहती है किसी को कभी पता नहीं चल पाया की उसने आत्महत्या क्यों की थी और उस घर में कोई भी नहीं जाता। यह बात सुनकर सुमित पूरी तरह हिल गया वह यह यकीन करना चाहता था की जो भी उसके साथ हुआ वह एक बुरा सपना था पर उस रात के बाद उसका दोस्त विजय कभी वापिस नहीं आया और सुमित को आज भी दिवाली की वो खौफनाक रात और उस लड़की की भयानक चीखे सोने नहीं देती। लक्ष्मी एक अद्भुत कहानी यह कहानी 17 साल की जिमि की है जो की दिवाली की छुट्टिया मनाने अपने मौसी के घर “कोची“ जा रहा था। जिमि का परिवार उसके मौसी के गांव में घुसा ही था की जिमि को बहुत तेज़ प्यास लगी और उसके पापा ने साइड के एक दुकान पर गाड़ी रोक दी तभी जिमि के पापा को कुछ लोगो की भीड़ दिखी। वहा वह आस-पास खड़े कुछ लोगो से पूछने लगे की भीड़ क्यों लगी हुयी है कोई कुछ जवाब देता उससे पहले ही जिमि की नज़र भीड़ के बिच में पड़ी एक औरत के लाश पर गई उस लाश को देखते ही जिमि को ऐसा लगा की कोई परछाई उसे छू कर गुजरी है। तभी जिमि का ध्यान सड़क पर पड़े उस औरत के सजने और सवरने के सामान पर गया उसने सबसे नजरे चुराते हुए वहा से एक कड़ा उठा लिया इतनी देर में जिमि के पापा उसे बुलाने लगे उसने जल्दी से वह कड़ा अपनी पॉकिट में रखा और वहा से चला गया। अपनी मौसी के घर पहुंचने के बाद जिमि सबसे थोड़ा अजीब-अजीब सा बर्ताव करने लगा, उसके घर वालो को लगा की वह उस सड़क पर लाश को देखकर डिस्टर्ब हो गया है। पर जिमि का ध्यान अभी भी उसके पास रहे उस कड़े पर था वह अपने कमरे में शीशे के सामने उस कड़े को पहनकर देखता और मुस्कुराता रहता। एक दिन जब जिमि अपने कमरे में उस कड़े को पहने खड़ा था तो उसका मन किया की वो पूरी तरह लड़की बन जाये। वह अपने कजन ऋचा के पास गया और उससे उसके सजने-सवरने का सामान मांगने लगा। फिर जिमि अपनी मौसी के कमरे में गया और वहा से उनकी साड़ी और लिपस्टिक उठाकर ले आया। वह तैयार हो ही रहा था की जिमि के पापा उसके कमरे में आ गए। जिमि को देखते ही उसके पापा उसे खूब डाटने लगे जिमि ने रोते हुए कहा की वह लड़की बनना चाहता है यह सुनकर उसके पापा बेहद गुस्से में आ गए और उसे बुरी तरह पीटने लगे और उसका कमरा बाहर से बंद करके चले गए। जिमि अपने कमरे में बैठकर जोर-जोर से रोने लगा की तभी अचानक उसे दीवार पर लड़की की एक परछाई नजर आयी और धीरे-धीरे वह परछाई उसकी तरफ आने लगी। जिमि वह परछाई देखकर थोड़ा घबड़ा गया और कमरे का दरवाजा जोर-जोर से पीटने लगा पर किसी ने दरवाजा नहीं खोला। उसने मुड़कर देखा तो वहा कोई नहीं था। फिर उसके बेड के निचे से एक अजीब सी आवाज आने लगी। माना कोई जिमि को पुकार रहा हो, जिमि ने जैसे ही बेड के निचे देखा तो वहा उसी औरत की लाश पड़ी थी जो उस दिन जिमि को सड़क पर दिखी थी। वह दिखने में बहुत डरावनी लग रही थी वह औरत उसकी ओर रेंगते हुए आयी और जिमि में समा गयी जिमि वही बेहोश हो गया। अगले दिन से जिमि अजीब तरह से बर्ताव करने लगा वह अपनी मौसी की साड़ी पहने रहता, लड़कियों की तरह सजता और सवरता और सब से बोलता की अब से उसका नाम लक्ष्मी है। कभी-कभी वह जोर-जोर से चिल्लाता और सारा घर सर पर उठा लेता तो कभी किसी कोने में दुबक कर बैठ जाता और डरा -डरा सा सहमा हुआ रोता रहता। एक दिन रोते-रोते उसने अपने माँ से कहा की वह लक्ष्मी है और उसे हर जगह सैतान नज़र आते है और वे उसे आकर मार देंगे उसने कहा उन सैतान के पैर उलटे है, दाँत खून से सने हुए है और लम्बे-लम्बे नाखून है जिनसे वो उनपर हमला करना चाहते है। जिमि की हालत दिन पर दिन ख़राब होती जा रही थी। लेकिन वह रोज लक्ष्मी बनकर सजता-सवरता और अपना कमरा बंद करके नाचता रहता उसके घर वाले समझ नहीं पा रहे थे की उसके साथ क्या हुआ है और वो अपने आप को क्यों लक्ष्मी कहे जा रहा है। जिमि के पापा मदद के लिए आस पड़ोस में पूछने लगे, पता करने पर उन्हें मालूम पड़ा की वह लाश जो उन्होंने उस दिन सड़क पर देखी थी वो किसी और की नहीं बल्कि जॉजस लक्ष्मी की थी। जॉजस एक लड़के से प्यार करता था और वह अपना नाम बदलकर लक्ष्मी भी इसीलिए रखा था। वे दोनों एक दूसरे से शादी करना चाहते थे लेकिन जॉजस के घर वालो को यह मंजूर नहीं था उनके लिए ऐसा करना एक बहुत बड़ा पाप था और गांव में हो रहे बदनामी की वजह से उन्होंने जॉजस यानि की लक्ष्मी को सबके सामने मौत के घाट उतार दिया यह बात सुनकर जिमि के पापा के रोंगटे खड़े हो गए। उन्हें जिमि के साथ अपने बर्ताव के लिए बहुत पछतावा हुआ उन्हें समझ में आ गया था की उनके बेटे जिमि के शरीर में जरूर लक्ष्मी की आत्मा घुश गयी है वह जल्दी से पूरी बात बताने के लिए घर के लिए निकले लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। जिमि उस दिन भी अपना कमरा बंद करके नाच रहा था की तभी उसे लगा की उसके दरवाजे पर सैतान उसे मारने आ गए है वही सैतान जिनके पैर उलटे थे दाँत खून से सने हुए और लम्बे-लम्बे नाखून थे। जिमि घबड़ाहट के मारे जोर-जोर से चिल्लाने लगा। उसके बाकि घर वाले जब तक वह दरवाजा तोड़कर अंदर घुसे, जिमि का शरीर पूरी तरह से अकड़ चूका था वह तुरंत उसे हॉस्पिटल लेकर भागे डॉक्टर ने बहुत कोशिश की और वह किसी तरह जिन्दा बच गया। जब जिमि के पापा ने सबको जॉजस की कहानी आज उसे लक्ष्मी के बारे में कुछ भी याद नहीं लेकिन लक्ष्मी की तरह कई ऐसे लोग है जिनको गलत समझा जाता है और उन्हें उनके पसंद के लिए लोगो का बहुत बुरा बर्ताव सहना पड़ता है। यहाँ तक की कई लड़को को लड़कियों से प्यार करने के लिए और कई लड़कियों को लड़को से प्यार करने के लिएबताई तब सभी परिवार वालो को जॉजस के लिए बहुत दुःख हुआ और उन्होंने जॉजस के लिए प्रार्थना किय और जब उन्हें जिमि के पास वो कड़ा मिला उन्होंने वो भी जॉजस की कब्र के साथ गढ़वा दिया। कुछ दिनो बाद जिमि बिलकुल ठीक हो गया लोग उन्हें मार डालते है। भूतिया रास्ता की कहानी यह कहानी है सुजानपुर की पहाड़ो के बिच बसा एक खूबसूरत गांव, लेकिन कहते है इस गांव तक आने वाला जंगल का रास्ता भूतिया है। प्रभाकर कुछ दिन पहले ही इस गांव में रहने आया था वह भी गांव वालो से इस रास्ते के बारे में सुन रखा था। लेकिन प्रभाकर चुड़ैल भूत पर विस्वाश नहीं करता था। एक दिन वह रात को उसी रास्ते से अपने बाइक से शहर से लौट रहा था और उसकी बीबी “सुगंधा” भी उसके साथ थी। अचानक से एक काली बिल्ली उसका रास्ता काट देती है। प्रभाकर जोर से ब्रेक लगाता है तभी वह काली बिल्ली उसके बाइक के पास आकर गुर्राने लगी। दोनों बिल्ली को भगाने का प्रयास करते है लेकिन उस बिल्ली का गुर्राना बंद नहीं होता है। गुर्राते-गुर्राते वह सुगंधा के ऊपर चढ़ जाती है वह उसे हटाने का प्रयास करती है लेकिन बिल्ली उसे जोर से दबोचा हुआ होता है तब प्रभाकर बिल्ली को पीछे से पकड़ता है और सुगंधा को उसकी पकड़ से छुड़ाता है। फिर प्रभाकर एक पत्थर उठाकर उसे मरता है बिल्ली जोर से गुर्राते हुए सामने के पेड़ पर चढ़ जाती है और अचानक वहा से गायब हो जाती है। उसे अचानक गायब होते देख दोनों डर जाते है। प्रभाकर – ये बिल्ली कहा गायब हो गयी। सुगंधा – गांव वाले सही कहते है ये रास्ता सच में भूतिया है वो बिल्ली जरूर कोई भूत थी। प्रभाकर – तुम भी ना, जंगल का रास्ता है यहाँ जंगली बिल्लिया और जानवर तो होते ही है। सुगंधा – होते होंगे, लेकिन वो किसी पर इस तरह हमला नहीं करते होंगे। चलो-चलो अब जल्दी निकलो यहाँ से कही फिर से कोई जानवर ना आ जाये। प्रभाकर ने बाइक स्टार्ट किया लेकिन जैसे ही बाइक की हेडलाइट जली उसे सड़क पर कई सारे गहने गिरे हुए दिखाई दिए और उसमे सोने के सिक्के भी थे वह कुछ सोच पाता तभी उसे किसी औरत के रोने की आवाज आने लगी। सुगंधा – अब किसका इंतजार कर रहे हो हम किसी मुसीबत में ना फस जाये। वे दोनों घर लौट आये लेकिन प्रभाकर के आँखो के सामने वो सोने के गहने और सिक्के अभी भी घूम रहे थे। वैसे तो प्रभाकर को किसी बात की कमी नहीं थी लेकिन वो बहुत लालची था वो उन गहनों को किसी तरह हासिल करना चाहता था। अगले दिन प्रभाकर अकेले ही बीज लेने के लिए शहर जा रहा था और सुगंधा की बातो को अनसुना करके बाइक स्टार्ट करके घर से निकल गया। थोड़ी देर बाद वह उसी भूतिया रास्ते पर पहुंच गया दिन के समय भी वह रास्ता बिलकुल सुनसान था। प्रभाकर अपनी बाइक से चला जा रहा था तभी उसे रास्ते के किनारे पर एक सुन्दर सी दुल्हन दिखाई दी जो रो रही थी। उसे समझ नहीं आ रहा था की इस सुनसान रास्ते पर यह दुल्हन कहा से आयी। वह उससे कुछ पूछता तभी वह उसके पास आ गयी और रोते हुए बोली। दुल्हन – भाई साहब देखिये ना मै रास्ता भूल गयी हूँ, मुझे शहर जाना है क्या आप मुझे शहर छोड़ देंगे। प्रभाकर – लेकिन तुम यहाँ कैसे आयी, लोग कहते है की ये रास्ता भूतिया है। तुम दुल्हन के कपड़ो में हो और लोग कहा है। दुल्हन – क्या बोलू भाई साहब.. मै अपने पति के साथ कार से इस रास्ते से गुजर रही थी अचानक एक काली बिल्ली ने हमारा रास्ता काट दिया और हम लोग रुक गए। मेरे पति ने कार रोकी तभी उन्हें झाड़ियों के पीछे से किसी औरत के रोने की आवाज आयी वह वहा गए तभी उनकी चीखने की आवाज आयी मै दौड़ कर वहा गयी तो देखा वो वहा मरे पड़े है। प्रभाकर – तुम्हारा पति मर गया। दुल्हन – हां वो मर गए उनकी लाश झाड़ियों के पीछे पड़ी है आप प्लीज मेरी मदद करिये और मुझे शहर तक छोड़ दीजिये बदले में मै आपको ये सारे सोने के गहने के दूंगी और मेरे पास कुछ सोने के सिक्के भी है। सोने की बात सुनकर प्रभाकर की कान खड़े हो गए वो तो इसी की तलाश में आया ही था उसने उन सिक्को को अपने हाथो में ले लिया लेकिन जैसे ही उसने अपने हाथो में लिया वह लड़की अब दुल्हन से चुड़ैल में बदल गयी और जोर-जोर से हसने लगी और प्रभाकर धुएं में बदलने लगा। कुछ ही देर में प्रभाकर पूरी तरह से धुएं में बदल गया। उस चुड़ैल ने उस धुएं को एक बोतल में कैद कर लिया और ऊपर से ढक्कन लगाकर पहाड़ी के पीछे अपने घर के तैखाने में ले गयी। वहा पर पहले से ही धुएं से भरी कई सारे बोतले थी। चुड़ैल – आज मेरी 11 लोगो की गिनती पूरी हो गयी बिना सोने का लालच दिए मै इन्हे धुएं में नहीं बदल सकती थी, लालची कही के। कल अमावस्या है कल मै इन सब को इनके असली रूप में ले आउंगी और इन सबको मारकर इनके आत्मा पर कब्ज़ा कर लूँगी और फिर उसे अपने पति के शरीर में प्रवेश करा दूंगी और वो फिर से जीवित हो जायेंगे। दूसरी ओर रात काफी हो गयी थी प्रभाकर के घर नहीं पहुंचने पर सुगंधा को चिंता होने लगी। पूरी रात सुगंधा ने प्रभाकर का रास्ता देखा लेकिन नहीं आया उसे समझ नहीं आ रहा था की वहा कहा चला गया। तभी उसने देखा की गांव के मुखिया जी गांव के कुछ लोगो के साथ वहा से गुजर रहे थे वो उनके पास गयी और सारी बात बताई। मुखिया – बेटी सच-सच बताना, तुम लोग हाल ही में भूतिया रास्ते पर गए थे क्या? सुगंधा – जी गए तो थे लेकिन उससे मेरे पति के ना लौटने का क्या सम्बन्ध है। मुखिया – कितनी बार कहा है उस रास्ते का इस्तेमाल मत करो लेकिन पता नहीं लोगो को मेरी बात समझ क्यों नहीं आती है। सुगंधा – आखिर आप सभी को वहा से जाने से मन क्यों करते है क्या राज है उस रास्ते का। मुखिया – बेटी.. कुछ साल पहले एक नया शादी-सुदा जोड़ा इसी रास्ते से गुजर रहा था तभी गांव के ही कुछ बदमाश लोगो की नजर उन पर गयी उस दुल्हन के गहने देखकर उनके मन में लालच आ गया। उन्होंने उन गहनों के लालच में दोनो को मार दिया और मरते ही वह लड़की चुड़ैल बन गयी। उस दिन से जो भी उधर गया वह वापस नहीं लौटा। सुगंधा – मै वहा आज जाउंगी और अपने पति को वापस लेकर आउंगी। मुखिया – वहा से कोई नहीं लौटता बेटी वहा जाना जान-बूझकर मौत को गले लगाना है। लेकिन सुगंधा ने उनकी एक ना सुनी और मुखिया भी गांव के कुछ लोगो के साथ तांत्रिक को लेकर भूतिया सड़क वाले रास्ते पर पहुंचे, उनमे से कुछ लोगो ने अपने हाथ में मसाल भी ले रखी थी। जंगल के पास वाली पहाड़ी के पास से उन्हें मन्त्र की आवाज सुनाई दी वो सभी छिपकर देखने लगे। देखा की वही चुड़ैल मन्त्र पढ़ रही है। चुड़ैल – हे सैतानी ताक़त प्रकट हो देख मैंने तुझे खुश करने के लिए इन सारे जीवित लोगो को धुएं में बदल दिया है कुछ घंटे के बाद मै इन्हे आजाद करुँगी और इन्हे एक-एक करके मरूंगी इनका खून तुझे पिलाऊंगी और फिर इनके आत्मा पर कब्ज़ा कर अपने पति को जीवित करुँगी। तभी तांत्रिक ने पत्थर खींचकर एक बोतल पर मारा उसमे कैद एक आदमी बाहर निकला। चुड़ैल को इस बात का पता नहीं लगा क्योकि वह आँखे बंद करके मन्त्र पढ़ रही थी। तभी मुखिया जी बोले अरे ये तो भीमा है इसके साथियो ने ही मिलकर उस बेचारी औरत और उसके पति की हत्या की थी और ये लोग तो उस घटना के बाद गांव से गायब ही हो गए थे। तांत्रिक – वे गायब नहीं हुए थे ये चुड़ैल ने सबको कैद कर लिया था इन्ही की आत्मा से वो अपने पति को जिन्दा करना चाहती थी। सुगंधा – पर इसने मेरे पति को क्यों पकड़ा, मेरे पति तो कुछ नहीं किये थे। तांत्रिक – तेरा पति इन गुंडों की तरह लालची था वो भी इसके गहनों के चक्कर में आ गया था इसे अपने सिद्धि को पाने के लिए 11 लालची लोग चाहिए थे दस तो ये थे ही लेकिन 11 की गिनती पूरी नहीं हो रही थी लेकिन उस दिन जब तुम और तुम्हारा पति इस रास्ते से गुजर रहे थे तभी इसने जान लिया की तेरे पति को लालच में फसाया जा सकता है। वो बाते कर ही रहे थे की चुड़ैल अपनी आँखे खोली और अपने सामने फूटी बोतल देखकर गुस्से में भर गयी इतने में तांत्रिक ने कुछ मन्त्र पढ़कर मसाल को उसके ऊपर फेंका वो जलने लगी इसी बिच तांत्रिक ने सारी बोतलों को पत्थर मारकर फोड़ दिया और उसमे से कैद सभी लोग बाहर निकल गए। प्रभाकर भी उनमे से एक था उसे देखकर सुगंधा रोने लगी। चुड़ैल – ये तूने ठीक नहीं किया तांत्रिक इन लोगो ने मुझे और मेरे पति को मारा था तुमने इन दुष्टो को आजाद करा दिया। तांत्रिक – इनके गलती की सजा इन्हे जरूर मिलेगी, मै इस बात का वादा करता हूँ लेकिन तू जो कर रही थी ये करके तू ईश्वर को चुनौती दे रही थी। एक बार जो मर गया उसे जीवित नहीं किया जा सकता। चुड़ैल जलकर राख हो गयी। उसके बाद गांव वालो ने उन बदमासो को पुलिस के हवाले कर दिया। प्रभाकर के साथ-साथ पुरे गांव वालो ने लालच ना करने की कसम खायी उस दिन के बाद से वो रास्ता भूतिया नहीं रहा। चुड़ैल की आत्मा मुक्त ही गई। मौत के कुए का भूत कहानी यह कहानी है अमरपुर की हर साल की तरह इस बार भी इस गांव में बड़ा मेला लगा था। अगले दिन बाद मेले की शुरुआत होने वाली थी। हर बार की तरह नए-नए झूले, खिलौने, मिठाई वाला, चाट गोलगप्पे वाले भी अपनी दुकान सजाये बैठे थे लेकिन इस बार भी गांव के लोगो का ध्यान मौत के कुए वाले खेल पर लगा हुआ था। इस खेल के प्रचार वालो ने भी कोई कमी नहीं छोड़ी थी। मोहन एक रिक्शे पर माइक लिए घोषड़ा कर रहा था “आ गया.. आ गया एक बार फिर से आ गया जिस खेल ने जीता है सबका दिल वह फिर से आपके गांव आ गया, करोगे देर तो समस्या होगी विकट क्योकि बिक जायेंगे खेल के सारे टिकट” गांव का हर एक आदमी जल्दी से जल्दी टिकट लेकर खेल का सबसे पहला शो देखना चाहता था। अगले दिन खेल का पहला शो था लेकिन उसी रात गांव में एक अजीबो-गरीब घटना घटी। जहा पर मौत के कुए का खेल दिखाने की तैयारी थी आधी रात के बाद अचानक वहा से मोटर साइकिल चलाने की आवाज आने लगी एक घर में श्याम लाल, उसकी पत्नी देवकी और उसकी 6 साल की बेटी गूंजा सो रही थी अचानक से गूंजा की नींद खुल जाती है। गूंजा – पापा.. पापा.. जागो ना देखो मौत के कुए का खेल सुरु हो गया है चलो ना देखने। अपनी बेटी गूंजा की आवाज सुनकर दोनों जग जाते है। देवकी – अरे क्या हो गया गूंजा इतनी रात को कहा जाने की बात कर रही हो। गूंजा – माँ हमने उस मौत के कुए का टिकट लिया है ना देखो ना वो खेल सुरु हो गया है तुम्हे मोटर साइकिल की आवाज आ रही है ना। श्यामलाल – बेटा अभी तो रात है वो खेल तो कल शाम को सुरु होगा। गूंजा – पर ये आवाज कैसी है पापा। श्यामलाल – अरे होगी कोई आवाज.. चलो सो जाओ। गूंजा सो गयी लेकिन जैसे रात बीत रही थी मोटर साइकिल की आवाज बढ़ती जा रही थी कुछ देर बाद मोटर साइकिल की आवाज आनी बंद हो गयी और वहा से एक औरत और बच्चे के रोने की आवाज आने लगी। उस आवाज से गूंजा और उसके माता-पिता की नींद खुल गयी इस बार वह आवाज उन दोनों ने भी सुनी। वह सब बहुत डर गए वह उस जगह पर जाना तो चाह रहे थे लेकिन उनकी हिम्मत नहीं हो रही थी। अगली सुबह जब उन लोगो ने गांव वालो से यह बात बताई तो उनकी बातो पर किसी ने ध्यान नहीं दिया क्योकि उनके सिवा वह आवाज किसी ने नहीं सुनी थी इसका सायद ये भी कारण रहा हो की गूंजा का घर मेले वाले मैदान के पास में था। उसी शाम देवकी, श्यामलाल और गूंजा मेला देखने गए। चारो ओर लोगो की भीड़ थी कोई झूले पर बैठा चिल्ला रहा था, तो कोई नए खिलौने हाथ में लिए मुस्कुरा रहा था, कोई जलेबिया देखकर लार टपका रहा था, तो कोई गोलगप्पे के दुकान पर बिना गिने गोलगप्पे खा रहा था लेकिन गूंजा को तो इंतजार था मौत के कुए का खेल सुरु होने का वहा भी कई सारे लोगो की भीड़ थी। लोगो खेल चालू करने के लिए कह ही रहे थे की मोटर साइकिल स्टार्ट करने की आवाज आयी। मोटर साइकिल का चालक एक्सेलरेटर पर एक्सेलरेटर बढ़ाये जा रहा था। बाइक की आवाज पुरे मेले में गुज रही थी। दर्शक बाइक की आवाज से रोमांचिक हो रहे थे कई लोग तो सीटिया भी बजाने लगे थे लेकिन इस बिच लोगो ने देखा की मौत के कुए में एक छोटी सी बच्ची बैठी रो रही है लोगो ने आवाज लगायी की ये किसकी बच्ची है। कोई उस बच्ची को निकालता उसके पहले ही लोगो ने देखा कुए के अंदर अचानक एक औरत भी आ गयी उसका चेहरा बड़ा डरावना लग रहा था। वह बच्ची उसके गोद में जाकर बैठ गयी लोगो ने देखा की जब वो रहे है तो उनके आँखो से आंसू नहीं बल्कि खून निकल रहे है। कुछ ही देर में वो दोनों उड़ते हुए बाहर आ गए जिसने भी यह देखा वह बस एक ही आवाज में चिल्लाया “भूत, भूत” सभी लोग बाहर निकल आये। मौत के कुए के मालिक तक ये बात उसके कर्मचारियों द्वारा पहुंची उसे बहुत गुस्सा आया और बोला “ये क्या बकवास है और तुम लोगो ने ये क्या भूत भूत लगा रखा है, पुरे मेले में चहल-पहल है और यहाँ भूत की रट लगा रखी है, लगता है तुम लोगो का काम करने का मन नहीं है बस मुफ्त की पैसे चाहिए तुम्हे, चलो अगले शो की तैयारी करो” लेकिन अगला शो भी बिलकुल खाली रहा क्योकि ये अफवा फ़ैल गयी थी की मौत के कुए में भूत है अब तो मालिक का गुस्सा सातवे आसमान पर पहुंच गया और सारा गुस्सा अपने स्टाफ पर उतार दिया। उसी रात जब मालिक गहरी नींद में था तभी उसे तेज़-तेज़ बाइक चलाने की आवाज आयी उस आवाज से उसकी नींद खुल गयी वो गुस्से में बड़बड़ाता हुआ गया। वहा पहुंचते ही वह जो देखा उसे अपने आँखो पर विस्वाश नहीं हुआ उसने देखा की मौत के कुए में एक आदमी लगातार बाइक चलाये जा रहा है वह आदमी अपना सिर निचे कर रखा है। मालिक ने उसे बुलाया लेकिन मोटर साइकिल के चालक ने कोई जवाब नहीं दिया दूसरी ओर ये आवाज आस-पास के पुरे गांव वालो को सुनाई दे रही थी। सभी को आश्चर्य हो रहा था की आखिर इतनी रात को ये आवाज कैसी है। सभी को डर भी लग रहा था फिर भी कुछ लोगो ने हिम्मत की और गांव के सरपंच जी के साथ में मेले में पहुंचे गूंजा भी श्यामलाल के साथ वहा पहुंची वहा उन लोगो ने भी वही दृश्य देखा जो मौत के कुए का मालिक देख रहा था। वह आदमी अब भी लगातार बाइक चलाये जा रहा था तभी फिर से वही औरत और बच्ची अचानक से वहा आ गयी। सभी गांव वाले उस औरत और बच्ची को गौर से देख रहे थे। तभी जो आदमी बाइक चला रहा था उसके सिर से खून बहने लगा उसके खून से मौत के कुए की पूरी दीवार लाल हो गयी। कुछ देर बाद वो औरत और बच्ची उसी तरह रोने लगे। अब तो सारे गांव वालो की हालत ख़राब हो गयी। किसी को कुछ समझ नहीं आ रहा था की आखिर ये लोग है कौन तभी मौत के कुए का मालिक फिर से चिल्लाते हुए कहता है “अरे सुन नहीं रहे हो तुम कौन हो, तुम लोगो को क्यों डरा रहे हो क्यों तुम मेरे खेल को बदनाम कर रहे हो” मालिक की बात सुनकर बाइक चलाने वाला अपना सिर ऊपर करता है उसे देखकर मालिक की आवाज लड़खड़ाने लगती है “तुम.. तुम कहा से आ गए विक्रम तुम तो…” सरपंच – अरे कौन है ये तुम इसे जानते हो क्या। तब बाइक चलाने वाला अपना बाइक रोकता है और कहता है की “क्यों मालिक आप बताओगे या मै बताऊ इन्हे” मालिक – मै क्या बताऊ मुझे कुछ नहीं पता… तब विक्रम ने बताना सुरु किया की… विक्रम – गांव वालो यह एक दुष्ट आदमी है, इसके सीने में दिल नहीं है यह जानवर है जानवर। मेरा नाम विक्रम है मै पिछले साल तक इसके साथ काम करता था आप तो जानते है की मौत के कुए में गाड़ी चलाना हर दिन मौत से गले लगाना जैसा काम है। मै हर रोज़ अपने परिवार और इसके लिए जान की बाजी लगाकर मोटर साइकिल चलाता था पर उस दिन सायद मेरा दिन ख़राब था। किसी दूसरे गांव में मेला लगा था मै अपना खेल दिखा रहा था की अचानक मोटर साइकिल का एक्सीडेंट हो गया और मेरा सिर कुए के दीवार से जा टकराया लगातार खून बहता रहा और मै बेहोश हो गया और फिर मेरी मौत हो गयी। विक्रम के मौत के बाद उसकी पत्नी और उसकी छोटी सी बेटी के सामने जीवन चलना बहुत कठिन हो गया वो एक दिन मालिक के पास गए और कुछ पैसे मांगे पर उसने कोई मदद नहीं की और वहा से भगा दिया। वे दोनों परेशान होकर बाहर चले आये विक्रम की पत्नी ने किसी और जगह काम करने की कोशिश की लेकिन कही काम नहीं मिला। भूखे-प्यासे सड़क पर भटकते कई दिन बीत गए और फिर भूख से उन दोनों की भी मौत हो गयी। विक्रम – गांव वालो आप लोग ही बताईये मेरा और मेरे परिवार का क्या दोष था जिसकी हमें सजा मिली। अरे हम तो कलाकार है इसी से हमारी रोजी चलती है लेकिन कल को कोई हादसा हो जाता है तो मालिक हमें मरने को छोड़ देता है हम पूरा जीवन आपके खुसी के लिए आपके मनोरंजन के लिए काम करते है और बदले में हमें क्या मिलता है। विक्रम की बात सुनकर गांव वालो ने उस मालिक को मारने के लिए घेर लिया। मालिक – अरे.. अरे मुझे छोड़ दो मुझसे गलती हो गयी। सरपंच – हम तुम्हे एक ही सर्त पर छोड़ेंगे की तुम अपने यहाँ काम करने वालो की गारंटी लोगे की उन्हें कुछ हो गया तो उस परिवार को बेसहारा नहीं छोड़ोगे। अरे आज कल तो बिमा होता है क्यों नहीं सबका बिमा करवा देते। सरपंच की बात मालिक मान गया उसने सभी काम करने वालो का बिमा करवाया। विक्रम जीते जी अपने और अपने परिवार के लिए कुछ नहीं कर पाया लेकिन मरने के बाद अपने साथियो का भविष्य सुरक्षित कर दिया।
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