good chaise
अँधेरा शहर को अपने आगोश में लेने लगा है, स्ट्रीट लाइट्स के रौशनी सड़क के कुछ हिस्सों को रोशन कर रही है तो ज्यादातर हिस्से पर अँधेरा अभी भी पसरा हुआ है, सर्दी में यूँ तो अँधेरा जल्दी ही रौशनी पर हावी हो जाता है, लेकिन आज 6 बजते-बजते रात जैसा माहौल हो गया है, स्ट्रीट लाइट की कृतिम रोशनी से खेलते अंधरे को पार करती एक परछाई सी सड़क पर तेजी से बढ़ रही है, करीब ५ फीट .४ इंच कद की भावना सरीन तेज कदमो से घर की और जा रही है. उसके एक हाथ में थैला है और दूसरे कंधे पर लटका बैग तेजी से उसकी रफ़्तार से मेल कर रहा था, इसी बीच उसे अपने पीछे से किसी के तेजी से पीछा करने वाले अंदाज में आने का अहसास होने लगा, उसने अपनी रफ़्तार और तेज कर दी, लगभग भावना अभी, घर से करीब 50 मीटर की दुरी पर थी तभी पीछे से किसी ने उसके हाथ का थैला लिया और उसके आगे आगे दौड़ने लगा, भावना सब समझ चुकी थी, रुक बदमाश कहते हुए वह लगभग दौड़ पड़ी थी, इतने में बैग लेकर वह लड़का भावना के घर में घुस गया.भावना घर में घुसते हुए-रुक आज में तुझे मजा चखा कर रहूंगी। ऋषि को पकड़ लेती है, इतने में माँ हाल में आ जाती है, और कहती है क्या हुआ, क्या किया इसने, भावना- पता नहीं कहा से उछलकूद करके आ रहा था और अँधेरे रस्ते में मुझे डराने के लिए मेरा पीछा करने लगा और घर के बाहर से राशन का थैला लेकर भाग आया, तुम ही बताओ माँ में इसका क्या करूँ? माँ ऋषि से- क्यों रे दीदी को परेशान करके क्या मिलता है तुझे, ऋषि- कुछ नहीं माँ , मै तो मदद कर रहा था, भावना- रहने दे तेरी मदद नहीं चाहिए, और दोबारा ऐसा किया तो देख लेना फिर, माँ- ठीक है अब झगड़ा बंद करो और खाने की तैयारी करो.
मिडिल क्लास फैमिली की भावना सरीन, माँ के साथ दिल्ली एक विकासपूरी की सिंगल स्टोरी बिल्डिंग के ग्राउंड फ्लोर पर रहती है, पिता की असमय मौत के कारण स्नातक की पढाई ख़त्म होते ही भावना को घर खर्च चलने के लिए एक स्टोर में नौकरी करनी पड़ी, भावना का छोटा भाई ऋषि १०वीं क्लास में पढता है, माँ घर में ही रहती है. जिंदगी की दुश्वारियों से दोचार होता तीन सदस्यों को परिवार सिमिति संसाधनों में खुश रहना सिख गया है. हां कभी कभी ऋषि अपनी उम्र के हिसाब से जिद करता है तो माँ उसे दीदी का एक्साम्प्ल दे देती है, जीवन सकूं से है.