रात के करीब ११ बजे है, भावना अपने कमरे में है और एक नावेल पढ़ रही है, मुझे मत पढ़ो, मुझे नींद आ रही है, अब सो जाओ, भावना गर्दन घूमते हुए थोड़ा आश्चर्य से - पता नहीं क्या हो रहा है एक तो इतना सस्पेंस से भरा नावेल और पता नहीं ये आवाज, शायद मन का वहम है, खैर छोडो नावेल का मजा लेती हूँ, कहते हुए दोबारा नावेल में व्यस्त हो जाती है, थोड़ी देर बाद फिर से आवाज आती है मत पढ़ो, मुझे नींद आ रही है, अब सो जाओ. इस बार आवाज दायीं ओर से आ रही है, भावना को कुछ समझ नहीं आती और अचानक उठकर बिस्तर से कूद जाती है और नावेल को बिस्तर पर फेंककर हड़बड़ाते हुए - कौन है? नावेल उल्टा पड़ा है और उसमे से एक हाथ निकल रहा है, ये देख भावना दर के मरे चीखने को होती है........