ऋषि नावेल को हाथ में लेकर कहने लगा- क्या दीदी मुझे नींद आ आ रही है अब सो जाओ , भावना चीख को अंदर ही दबा गयी और ऋषि की और तेजी से लपकते हुए- रूक तू फिर आ गया मुझे डराने, ऋषि बिस्तर पर नावेल फेंककर हँसते हुए भागने लगा और बोला- आप तो फिर दर गई दीदी, मैंने तो आपको डरने की कौशिस भी नहीं की इस बार, भावना ऋषि को पकड़ने की कोशिश करते हुए- मुझे पता है, तू मुझे डराने ही आया था, सुबह तेरी करतूत माँ को बताउंगी, देखना फिर, ऋषि दौड़कर दरवाजे से बाहर जाते हुए- ठीक है कह देना। मै भी कह दूंगा की दीदी रात को भूत वाला नावेल पढ़ रही थी... ये सुनकर भावना ऋषि को रोकते हुए, अरे रूक, मै तुझे कुछ नहीं कहूँगी बस माँ से तू कुछ मत कहना, ऋषि ये सुनकर वापस कमरे में आते हुए- ठीक है फिर एक काम और करो, भावना- क्या, ऋषि- वो फ्रीज़ में जो चॉकलेट रखी है अपने लिए उसे ले आओ, दोनों मिलकार खाएंगे, भावना इस बार गुस्से से- एक तो तेरी बदमाशियां छुपाऊ और ऊपर से चॉक्लेट भी खायेगा, जा में नहीं देती। ये सुनकर ऋषि वापस जाने की एक्टिंग करते हुए- ठीक है में माँ के पास सोने जा रहा हु, सुबह तुम देख लेना फिर.... . ये सुनकर भावना ऋषि को पकड़कर अपने पास बैठकर- ठीक है तू नहीं मानेगा, जा लेकर आ चॉक्लेट, ऋषि ये सुनकर खुश होकर दौड़ते हुए, फ्रीज़ से चॉक्लेट ले आता है, दोनों चॉक्लेट खाने लगते है.
सुबह के समय भावना ऑफिस तैयारी कर रही है, थोड़ी जल्दी करते हुए- माँ नाश्ता दे दो, देर हो रही है, माँ- ले जा तैयार हो गया है. भावना किचन की और बढ़ते हुए, माँ, आज थोड़ी देर हो जाएगी। माँ- ठीक है कौशिक करना की जल्दी आ सके, भावना ठीक है कहते हुए घर से बहार सड़क पर आ जाती है और ऑफिस की और बढ़ने लगती है, अपनी धुन में तेजी से चली जा रही भावना के करीब एक कार आकर तेजी के रूकती है जिससे उसका तार्तम्ये टूट जाता है, और वह कार की और देखने लगती है, तभी कार की खिड़की का शीशा खुलता है और......